नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा पर भारत सरकार के टैक्स‑सैस या सरचार्ज लगाने की ख़बरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
इस संबंध में पीएम मोदी ने शुक्रवार (15 मई) को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि विदेश यात्रा पर इस तरह की पाबंदियां लगाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने एक एक्स पोस्ट में असामान्य रूप से कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘यह पूरी तरह से गलत है. इसमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है. विदेश यात्रा पर ऐसी पाबंदियां लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता. हम अपने लोगों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और ईज़ ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’
This is totally false.
Not an iota of truth in this.
There is no question of putting such restrictions on foreign travel.
We remain committed to improving ‘Ease of Doing Business’ and ‘Ease of Living’ for our people. https://t.co/9lxjbxz0nV
— Narendra Modi (@narendramodi) May 15, 2026
उल्लेखनीय है कि एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ी हुई आयात लागत की भरपाई के लिए विदेशी यात्रा पर एक साल का टैक्स लगाने पर विचार कर रही है.
सीएनबीसी-टीवी-18 ने शुक्रवार को सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी कि भारत सरकार विदेश यात्रा पर टैक्स/सरचार्ज लगाने के बारे में विचार कर रही है, जिसके लिए उच्चस्तरीय पर चर्चा हो रही है.
ख़बर में यह भी बताया गया था कि यह टैक्स संभवतः एक साल तक लागू रहेगा और इसका मकसद पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल और आयात की कीमतों में हुई बढ़ोतरी से पैदा हुए वित्तीय दबाव को कम करना है.
हालांकि, प्रधानमंत्री द्वारा इस ख़बर का खंडन किए जाने के बीस मिनट बाद मीडिया आउटलेट ने अपनी रिपोर्ट वापस ले ली, और इसे ‘गलत’ बताते हुए खेद व्यक्त किया.
मालूम हो कि यह ख़बर ऐसे समय में सामने आई है, जब इस हफ़्ते की शुरुआत में ही पीएम मोदी ने भारतीयों से अपील की थी कि वे विदेश में छुट्टियां मनाने और डेस्टिनेशन वेडिंग करने से बचें. यह अपील प्रधानमंत्री द्वारा दो बार की गई.
हाल ही में चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में संपन्न हुए चुनावों के महज़ कुछ दिनों बाद बीते रविवार (10 मई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के चलते उत्पन्न हुए आर्थिक दबाव को लेकर सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपने भाषण में भारत के लोगों से पेट्रोल और डीज़ल को लेकर किफ़ायत बरतने की अपील की थी. साथ ही एक साल तक सोना न ख़रीदने और खाने का तेल कम इस्तेमाल करने का भी आग्रह किया. इसके अलावा उन्होंने इस दौरान जहां तक संभव हो घर से काम करने (वर्क फ्रॉम होम), वर्चुअल मीटिंग करने और लोगों से विदेश यात्रा टालने की भी बात कही.
इसके बाद वडोदरा में एक हॉस्टल का उद्घाटन करते हुए उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा था, ‘आजकल विदेश यात्रा और विदेश में डेस्टिनेशन वेडिंग एक बढ़ता हुआ चलन बन गया है… लेकिन इसका नतीजा यह भी होता है कि विदेशी मुद्रा पर भारी खर्च होता है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘यह ज़रूरी है कि हम भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाएं और शादियों के लिए भी, मेरा मानना है कि भारत से ज़्यादा पवित्र जगह कोई और नहीं हो सकती.’
प्रधानमंत्री की इस अपील पर कड़ी आलोचना भी देखने को मिली थी. पीएम मोदी ने जिस रविवार नागरिकों से ‘संकट के समय’ में ‘सामूहिक त्याग’ की बात कही थी, उसी दिन उन्होंने तीन राज्यों के चार शहरों में भव्य व्यवस्था वाले समारोहों में हिस्सा लिया था. इसके बाद भी उनके ऐसे कार्यक्रम जारी रहे और इस दौरान उनकी विदेश यात्रा भी देखी गई.
गौरतलब है कि एक ओर जहां पीएम मोदी ने आम नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की, वहीं केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस बात का संकेत दिया कि घाटे का सामना कर रहे सरकारी खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पंप पर कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है.
इस बीच,केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में शुक्रवार को तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है. सीएनजी की क़ीमत भी दो रुपये प्रति किलो बढ़ाई गई है.
विपक्ष ने इस वृद्धि को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि चुनाव ख़त्म होने के बाद मोदी सरकार ने लोगों से वसूली शुरू कर दी है.
