नई दिल्ली: अहमदाबाद में 64 वर्षीय एक मुस्लिम व्यक्ति की 20 मई को मौत हो गई, जिसे गोहत्या के एक मामले में पुलिस हिरासत में लिया गया था. इस घटना के बाद हिरासत में यातना दिए जाने के आरोप लगे हैं और गुजरात के सख्त गौ-सुरक्षा कानूनों के तहत पुलिस कार्रवाई को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं.
अहमदाबाद के जुहापुरा इलाके के निवासी ज़हीर शेख की मौत, अहमदाबाद के वेजलपुर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद हुई. परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान शेख को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया और बाद में उनकी चोटों के कारण मौत हो गई. इन आरोपों के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जहां स्थानीय लोग कथित रूप से शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.
पुलिस ने दावा किया था कि इस महीने की शुरुआत में जुहापुरा के एक खुले मैदान से 500 किलोग्राम से अधिक संदिग्ध गोमांस, एक जीवित बछड़ा, वाहन और अन्य सामान बरामद किए गए थे. इसके बाद पुलिस ने ज़हीर शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. पुलिस के अनुसार, शुरुआती छापेमारी के दौरान शेख फरार हो गए थे और उन्हें 18 मई को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया.
उनकी मौत के बाद शेख के परिवार ने पुलिस पर हिरासत में यातना देने का आरोप लगाया. शेख के बेटे तौफीक, जिन्होंने अस्पताल में अपने पिता की हालत देखी और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया, ने आरोप लगाया कि उनकी उम्र का ख्याल किए बिना पुलिस ने उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया.
तौफीक ने द वायर से कहा, ‘वे लगातार उन्हें पीटते रहे, उनकी दाढ़ी खींचते रहे और उनके गुप्तांगों पर भी मारा.’
तौफीक ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें ज़हीर शेख ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा और पैसे की मांग की. परिवार के सदस्यों और उनके वकील ने यह भी आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उन्हें जबरन एक संदिग्ध पेय पदार्थ पिलाया गया था.
मौत के बाद अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, जहां प्रदर्शनकारियों ने स्वतंत्र जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

अधिकारियों ने कहा कि पुलिस स्टेशन में उनकी पत्नी द्वारा लाई गई दवा लेने के बाद शेख की तबीयत बिगड़ गई थी.
परिवार ने कहा है कि उन्होंने शेख के पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में करवाने और एक्सीडेंटल मौत की न्यायिक मजिस्ट्रेट की अगुवाई में जांच करवाने पर ज़ोर दिया है.
तौफीक द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और परिवार तथा रिश्तेदारों की गवाही में दावा किया गया है कि शेख के शरीर पर चोटों के साफ निशान दिख रहे थे. स्थानीय लोग पुलिस स्टेशन के बाहर इकट्ठा होकर जवाबदेही और उनकी मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
तौफीक ने यह भी कहा कि हाल ही में उन्होंने उन्हीं पुलिस अधिकारियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला था, जिसमें वे जुहापुरा के मुस्लिम युवकों को सार्वजनिक रूप से प्रताड़ित करते दिखाई दे रहे थे. उनका कहना है कि इसी कारण पुलिस ने उनके पिता और छोटे भाई के खिलाफ ‘फर्जी मामला’ बनाया.
तौफीक ने द वायर से कहा, ‘उन्होंने मेरे पिता को इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा. फिर अस्पताल ने उनकी चोटों के इलाज के लिए कुछ दवाइयां देने को कहा. बाद में उन्हें फिर अस्पताल ले जाया गया, जहां पुलिस ने कहा कि उन्होंने खुद को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर दवाइयां लीं. लेकिन मरते समय भी मेरे पिता कहते रहे कि उन्हें बेरहमी से प्रताड़ित किया गया.’
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष और वडगाम से विधायक जिग्नेश मेवाणी ने मीडिया से कहा कि परिवार ने हिरासत में यातना का आरोप लगाया है और इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘आरोपी ने आरोप लगाया है कि उसके गुप्तांगों पर मारा गया. जबकि मामला अभी जांच के अधीन था, तब भी ऐसा किया गया. दो साल पहले भी इसी पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों पर हिरासत में यातना के आरोप लगे थे. 10-15 दिन पहले भी वेजलपुर पुलिस का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे एक मुस्लिम व्यक्ति को पुलिस वाहन से बांधकर पीट रहे थे. पुलिस को कानून और संविधान की सीमाओं के भीतर काम करना चाहिए. अगर किसी ने अपराध किया है तो उसे गिरफ्तार करें और कानूनी कार्रवाई करें, लेकिन यह अस्वीकार्य है.’
कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने भी कथित हिंसा की निंदा की.
उन्होंने कहा, ‘डीजीपी ने हमें आवश्यक कार्रवाई और जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन गुजरात में हिरासत में यातना की घटनाएं सच्चाई हैं. पुलिस कमिश्नर ने भी आश्वासन दिया है कि पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों के एक पैनल की निगरानी में कराया जाएगा और जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, उसे जवाबदेह ठहराया जाएगा.’
शेख के एक रिश्तेदार मौलाना मोहम्मद ने कहा कि बरामद मांस के गोमांस होने की पुष्टि तक नहीं हुई थी, फिर भी पुलिस ने शेख को इतना प्रताड़ित किया कि इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
उन्होंने द वायर से कहा, ‘मेरे चाचा का गोहत्या के किसी मामले से कोई संबंध नहीं था. उनका पिक-अप वाहन उनके घर के बाहर खड़ा था और हमारे पास इसे साबित करने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी है. पुलिस सिर्फ हमारे परिवार को किसी मामले में फंसाना चाहती थी.’
द वायर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए पुलिस से भी संपर्क किया है. जवाब मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा.
घटना के बाद से जुहापुरा के निवासी न्याय और कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. परिवार ने ज़हीर शेख का शव लेने से भी इनकार कर दिया है और कहा है कि उनकी ‘हत्या’ की जांच होनी चाहिए.
परिवार को अभी तक अस्पताल से शेख के मेडिकल रिकॉर्ड नहीं मिले हैं, क्योंकि उन्हें अस्पताल पुलिस ही लेकर गई थी.
2017 में गुजरात विधानसभा द्वारा गोहत्या को आजीवन कारावास से दंडनीय बनाने वाला कानून पारित किए जाने के बाद से राज्य में गोहत्या से जुड़े मामलों में स्थानीय सतर्कता समूहों (विजिलांटिज़्म) और पुलिस कार्रवाई में लगातार वृद्धि हुई है. 2017 में राज्य के पशु संरक्षण अधिनियम में संशोधन के बाद से गोमांस के परिवहन का दोषी पाए जाने वालों को 10 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.
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