नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (22 मई) को पत्रकार सौरव दास और आम आदमी पार्टी (आप) नेता व दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री गोपाल राय को नोटिस जारी किया है.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, ये नोटिस एक आपराधिक अवमानना याचिका से संबंधित हैं, जिसमें आबकारी नीति मामले में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को निशाना बनाने वाली कथित तौर पर अपमानजनक और अवमाननापूर्ण सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है.
वकील अशोक चैतन्य द्वारा दायर इस याचिका में आप आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तथा पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के खिलाफ भी अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी. लेकिन जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पहले ही शुरू की गई स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना कार्यवाही के अंतर्गत केजरीवाल और भारद्वाज को नोटिस जारी किए जा चुके हैं.
पीठ ने आदेश दिया कि दोनों मामलों की सुनवाई एक साथ की जाए और मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 अगस्त की तारीख तय की. न्यायालय ने सौरव दास और गोपाल राय को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई से पहले अपना जवाब दाखिल करें.

उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता वकील चैतन्य का आरोप है कि जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में आबकारी नीति मामले की सुनवाई के दौरान केजरीवाल, भारद्वाज, राय और दास ने उन्हें निशाना बनाते हुए कथित तौर पर उनके खिलाफ एक ‘सुनियोजित’ सोशल मीडिया कैंपेन चलाया.
याचिका के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब एक निचली अदालत ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में केजरीवाल और अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया था. बाद में सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की, जिसे जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था.
याचिका में कहा गया है कि केजरीवाल द्वारा 27 अप्रैल को कथित तौर पर प्रकाशित एक पोस्ट, जिसमें उन्होंने कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा की थी, को उनकी सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर ‘उसकी पहुंच (reach) और दृश्यता (visibility को अधिकतम करने’ के लिए पिन किया गया था. इसमें कहा गया है कि अन्य लोगों ने जस्टिस स्वर्णकांता के खिलाफ एक ‘कैंपेन‘ के तौर पर अपनी प्रतिक्रियाओं में तालमेल बैठाते हुए तथ्यात्मक रूप से गलत जानकारी साझा की.
अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका में उल्लिखित सोशल मीडिया सामग्री को सुरक्षित रखा जाए.
इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए पत्रकार सौरव दास ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक बयान जारी करते हुए कहा, ‘याचिकाकर्ता (वकील चैतन्य) का आरोप है कि मेरी रिपोर्ट में जस्टिस शर्मा के खिलाफ ‘गंभीर, बेबुनियाद और अपमानजनक आरोप’ शामिल हैं. मैं अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम हूं… सवाल उठाना अवमानना नहीं हो सकता.’
*STATEMENT*
As per reports, the Hon’ble Delhi High Court today has issued notice to me in a plea seeking initiation of criminal contempt proceedings over one of my reports concerning the appearance of conflict of interest and reasonable apprehension of bias in Justice Swarana…
— Saurav Das (@SauravDassss) May 22, 2026
गौरतलब है कि यह पूरा विवाद जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ अरविंद केजरीवाल और अन्य की रिक्यूज़ल याचिका से शुरू हुआ. केजरीवाल ने इस मामले में ‘पक्षपात की आशंका’ का हवाला देते हुए जस्टिस शर्मा से मामले से हटने का अनुरोध किया था. उनका कहना था कि जस्टिस स्वर्ण कांता के बच्चे केंद्र सरकार के सरकारी वकील हैं और तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं. ऐसे में उनसे निष्पक्षता की उम्मीद कैसे की जा सकती है.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस आरोप को निराधार बताते हुए रिक्यूज़ल याचिका खारिज कर दी. उन्होंने कहा कि इससे एक गलत मिसाल कायम होगी. क्योंकि उन पर लगाए गए आरोपों के समर्थन में पक्षपात का कोई सबूत नहीं है.
केजरीवाल द्वारा उनकी अदालत में पेश होने से इनकार करने के बाद दिल्ली के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया और आप नेता दुर्गेश पाठक ने भी ऐसा ही किया. जैसे-जैसे विवाद बढ़ता गया, जस्टिस शर्मा ने कहा कि उन पर लांछन लगाए जा रहे हैं, और उन्होंने इस मामले से खुद को अलग कर लिया; साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री और उनके पूर्व कैबिनेट सहयोगी भारद्वाज के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू कर दी.
