नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार (26 मई) को चीन-पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर से जुड़े ‘बेबुनियाद ज़िक्र’ को खारिज कर दिया. साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बुनियादी ढांचा और जल सहयोग से जुड़े दोनों देशों के कदमों पर भी आपत्ति जताई.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर से जुड़े इन ‘बेबुनियाद ज़िक्र’ को पूरी तरह से खारिज करता है.
मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के ‘अभिन्न और अटूट हिस्से’ थे, हैं और रहेंगे. यह भारत का स्थायी और सर्वविदित रुख है और किसी अन्य देश को इस विषय पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है.
यह संयुक्त बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की चार दिवसीय चीन यात्रा के अंतिम दिन सोमवार को बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात के बाद जारी किया गया था.
इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्तों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी इस संयुक्त बयान में कहा गया कि पाकिस्तानी पक्ष ने अपने चीनी समकक्षों को ‘जम्मू-कश्मीर की स्थिति में हालिया घटनाक्रमों’ की जानकारी दी.
बयान में आगे कहा गया है कि बीजिंग ने अपने पुराने रुख को दोहराया है कि यह विवाद ‘इतिहास से जुड़ा हुआ मुद्दा है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार उचित और शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए.’
भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर विवाद केवल भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मामला है और 1972 का शिमला समझौता इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों से ऊपर है.
पाकिस्तान और चीन ने ‘किसी भी एकतरफा कार्रवाई’ का विरोध करने की बात भी दोहराई और दक्षिण एशिया में ‘शांति और स्थिरता बनाए रखने’ तथा विवादों को संवाद और कूटनीति के जरिए सुलझाने के महत्व पर जोर दिया.
यह बयान पिछले वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष की पृष्ठभूमि में आया है. पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर हमले किए थे. इसी महीने चीन के सरकारी मीडिया ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की थी कि उस संघर्ष के दौरान चीनी तकनीशियनों ने पाकिस्तान की सहायता की थी.
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि दोनों देश चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपेक) को आगे बढ़ाने, काराकोरम राजमार्ग के थाकोट-रायकोट खंड के विकास कार्य को तेज करने और ‘खुंजेराब दर्रे का बेहतर उपयोग’ कर दोनों देशों के बीच जमीनी संपर्क मजबूत करने पर सहमत हुए हैं.
यह राजमार्ग चीन के शिनजियांग क्षेत्र को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रास्ते पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से जोड़ता है. खुंजेराब दर्रा इसी सीमा क्षेत्र में स्थित है.
विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीपेक की कुछ परियोजनाएं ‘भारत के संप्रभु क्षेत्र’ में आती हैं. भारत ऐसे किसी भी प्रयास का ‘दृढ़ता से विरोध और खंडन’ करता है जो पाकिस्तान के ‘अवैध और जबरन कब्जे’ को मजबूत या वैध ठहराने की कोशिश करे तथा भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करे. मंत्रालय ने कहा कि यह बात पाकिस्तान और चीन दोनों को कई बार स्पष्ट रूप से बताई जा चुकी है.
संयुक्त बयान में सीमा-पार जल सहयोग को लेकर जताई गई सहमति पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि ‘जब दोनों देशों के बीच कोई साझा सीमा ही नहीं है, तो तथाकथित ‘सीमा-पार जल संसाधन सहयोग’ का सवाल ही पैदा नहीं होता.’
मंत्रालय ने आगे यह भी दोहराया कि उसने पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुए तथाकथित सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है. इसी समझौते के तहत पाकिस्तान ने अवैध रूप से शक्सगाम घाटी चीन को सौंप दी थी.
