श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में प्रशासन ने बुधवार (27 मई) को ईदगाह मैदान और जामिया मस्जिद में सामूहिक ईद नमाज की अनुमति नहीं दी. प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई लिखित कारण नहीं बताया गया.
एक बयान में कश्मीर के प्रमुख धर्मगुरु मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया है, जबकि लगातार आठवें वर्ष इन दोनों स्थानों पर सामूहिक नमाज की इजाजत नहीं दी गई है.
इन प्रतिबंधों की निंदा करते हुए मीरवाइज़ ने अपने एक्स हैंडल पर कुछ तस्वीरें साझा कीं, जिनमें श्रीनगर के नगीन इलाके स्थित उनके आवास और कश्मीर की सबसे बड़ी मस्जिद- जामिया मस्जिद के बाहर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती दिखाई गई.
उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘ईद जैसे पवित्र और खुशी के मौके पर कश्मीर के मुसलमानों का स्वागत बैरिकेड, पाबंदियों, बंद दरवाजों और डराने-धमकाने से किया जा रहा है. यह शासन नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक पहचान, गरिमा और मौलिक अधिकारों पर सुनियोजित हमला है, जिससे हमें गहरा दुख होता है.’
मीरवाइज़ ने कहा कि यह ‘दुर्भाग्यपूर्ण है कि कश्मीर में बच्चे ईदगाह में ईद की नमाज़ के आध्यात्मिक अनुभव और उससे जुड़ी खुशियों को देखे बिना ही बड़े हो रहे हैं.’
उन्होंने कहा, ‘पूरी एक पीढ़ी को अपनी परंपराओं को जानने और उन यादों को बनाने से वंचित किया जा रहा है, जिन्होंने सदियों से हमारे सामूहिक जीवन को आकार दिया है. लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को यह जान लेना चाहिए कि धरती की कोई भी ताकत उस गहरे आध्यात्मिक बंधन को मिटा नहीं सकती, जो कश्मीर के लोगों का ईदगाह, जामिया मस्जिद और उनके धार्मिक संस्थानों के साथ जुड़ा हुआ है. आस्था को न तो कैद किया जा सकता है और न ही ताकत के दम पर दबाया जा सकता है.’
कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु ने इस हफ़्ते की शुरुआत में ही घोषणा की थी कि वह ईदगाह मैदान में ईद की नमाज़ की अगुवाई करेंगे; यह वही जगह है जहां जम्मू-कश्मीर के राज्य होने के समय सबसे बड़ी सामूहिक ईद की नमाज़ होती थी.
यह पहली बार नहीं है जब ईदगाह मैदान और श्रीनगर के डाउनटाउन स्थित नौहट्टा इलाके की 14वीं सदी की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद को बिना किसी आधिकारिक आदेश के नमाजियों के लिए बंद किया गया हो.
ज्ञात हो कि 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ईद और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर इन दोनों स्थलों को लोगों के लिए बंद रखा है.
जम्मू-कश्मीर का सुरक्षा प्रशासन, जो केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है, ने संवेदनशील डाउनटाउन इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंकाओं का हवाला देते हुए, सामूहिक नमाज़ पर प्रतिबंध को सही ठहराया है. यह इलाका पहले भारत-विरोधी और आज़ादी-समर्थक विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र रहा है.
इस बीच, केंद्र शासित प्रदेश के बाकी हिस्सों में ईद की नमाज अदा की गई. श्रीनगर के हजरतबल स्थित असर-ए-शरीफ, बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ स्थित खानकाह-ए-मौला सहित अन्य प्रमुख मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर हजारों लोग एकत्र हुए. पड़ोसी लद्दाख में ईद गुरुवार (28 मई) को मनाई जाएगी.
इससे पहले मंगलवार (26 मई) को मीरवाइज़ को कथित तौर पर नज़रबंद कर दिया गया था. ऐसा इसलिए किया गया ताकि उन्हें उस 12 साल की लड़की के परिवार से मिलने से रोका जा सके, जिसकी पिछले हफ़्ते बडगाम ज़िले में हत्या कर दी गई थी.
उन्होंने कहा था कि प्रशासन ने उन्हें बडगाम के गलवानपोरा गांव में ‘शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने और उनके दुख में शामिल होने’ की अनुमति नहीं दी.
लड़की का शव 23 मई को उसके परिवार और पुलिस ने एक रात भर चले तलाशी अभियान के बाद उसके घर से महज़ 200 मीटर की दूरी पर बरामद किया था. इस मामले में 36 घंटे के भीतर ही मुदासिर अहमद मीर नाम के एक स्थानीय युवक को गिरफ़्तार कर लिया गया था.
मीरवाइज़ ने एक्स पर लिखा था, ‘यह अजीब है कि शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना और सहानुभूति जताने जैसी एक बुनियादी मानवीय पहल भी शासकों और उनके ‘शांति और सामान्य स्थिति’ के दावे के लिए खतरा मानी जा रही है.’
