नई दिल्ली: उत्तराखंड में गणतंत्र दिवस के समय एक 70 वर्षीय मुस्लिम बुज़ुर्ग को प्रताड़ित किए जाने के ख़िलाफ़ हिंदुत्ववादी भीड़ के सामने खड़े होने वाले दीपक कुमार, जिन्हें ‘मोहम्मद’ दीपक के भी नाम से जाना जाता है, एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उन्हें अपना जिम खोने का डर सता रहा है, क्योंकि वे कई महीनों से किराया दे पाने में असमर्थ थे, जिसके चलते उनके मकान मालिक ने बिल्डिंग खाली करने को कह दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस बिल्डिंग में दीपक का जिम है, वो चार महीने से उसका किराया नहीं दे पाए हैं. लिहाजा मकान मालिक ने उन्हें जगह खाली करने को कहा है. इसके साथ ही दीपक का आरोप है कि उनके मकान मालिक ने उनसे यह भी कहा है कि वे मुसलमानों के लिए खड़े होने वाले को अपनी जगह किराए पर नहीं देंगे.
इस संबंध में दीपक ने अखबार से कहा, ‘मैं लगातार किराया नहीं दे पा रहा था. हालांकि, अब हालात सुधर रहे थे क्योंकि तकरीबन 70 लोग हर दिन आने लगे थे. फिर भी मकान मालिक ने ये कहकर मना कर दिया कि वह मुझे बिल्डिंग किराए पर नहीं देना चाहते क्योंकि मैं मुसलमानों के लिए खड़ा होता हूं.’
मालूम हो कि कोटद्वार में किराए की इमारत में चल रहे दीपक के हल्क जिम में पहले करीब 150 सदस्य आते थे, लेकिन 26 जनवरी की घटना के बाद रोज़ाना आने वालों की संख्या घटकर सिर्फ़ 15 रह गई थी. बाद में कई लोग मदद को आगे आए. वकीलों और आम नागरिकों के समर्थन से सदस्य संख्या बढ़कर क़रीब 70 रोजाना हो गई, लेकिन आर्थिक नुक़सान पहले ही हो चुका था. जिम का मासिक किराया 40000 रुपये है, जिसे दीपक दे नहीं पा रहे थे.
ज्ञात हो कि 26 जनवरी को पार्किंसन रोग से पीड़ित 70 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार को उनकी दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने के लिए कुछ कट्टर हिंदुत्ववादी लोग परेशान कर रहे थे. तब दीपक ने उन लोगों का विरोध किया था. इस दौरान जब भीड़ ने उनसे उनका नाम पूछा, तब उन्होंने अपना नाम ‘मोहम्मद दीपक’ बताया. इस टकराव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दीपक सुर्खियों में आ गए.
घटना के कुछ दिनों बाद, 40 से अधिक बजरंग दल कार्यकर्ताओं का एक समूह कोटद्वार में दीपक के विरोध में इकट्ठा हुआ. उन्हें धमकियां दी गईं. और अब कई महीनों बाद आखिरकार मकान मालिक ने उन्हें जगह खाली करने को कह दिया है.
घर के लोन की क़िस्त चुकाने में भी परेशानी
अख़बार के अनुसार, इसके अलावा दीपक ने घर बनाने के लिए भी लोन लिया था, जिसकी किस्त 16,000 रुपये महीना है. लेकिन जिम की सदस्यता कम होने से उनकी आय घट गई, और वे इस किस्त को चुकाने में भी असमर्थ हैं.
इस संबंध में उन्होंने बताया, ‘जब सदस्यता अभियान चला, तो उन पैसों का इस्तेमाल मैंने लोन की किस्त और बच्चे की फीस के लिए किया, और मैं नियमित रूप से किराया नहीं दे पाया. अब मालिक बाहर निकालने की धमकी दे रहे हैं.’
ज्ञात हो कि मार्च में दीपक ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था. इस दौरान कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच चल रही है, इसलिए सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने से इसके प्रभावित होने की संभावना है.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सोशल मीडिया पर मैसेज या वीडियो भेजने से जांच प्रभावित होगी. यह एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए ज़रूरी है.
