नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कालिंदी कॉलेज की दो महिला प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह को पत्र लिखकर कॉलेज के कुछ पुरुष शिक्षकों के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न, आपत्तिजनक टिप्पणियों और धमकी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. यह जानकारी हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है.
रिपोर्ट के अनुसार, यह घटनाक्रम दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश के करीब 12 दिन बाद सामने आया है, जिसमें अदालत ने 18 मई को डीयू के कुलपति को मामले की स्वतंत्र रूप से जांच कर छह सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया था.
दोनों प्रोफेसरों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि कॉलेज की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) ने उनकी शिकायतों की जांच के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों की अनदेखी की.
अदालत ने अपने 18 मई के आदेश, जिसे 26 मई को संशोधित किया गया, में कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने कई ऐसे बिंदु उठाए हैं जिनसे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि आरोप कॉलेज की गवर्निंग बॉडी और आईसीसी से जुड़े लोगों के खिलाफ भी हैं. अदालत ने यह भी नोट किया कि आईसीसी की सिफारिशों के खिलाफ दायर अपील पर अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी ने निर्णय नहीं लिया है.
इसी आधार पर न्यायालय ने कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए कुलपति द्वारा स्वतंत्र रूप से अपील पर फैसला किया जाना उचित होगा.
हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, दोनों शिक्षिकाओं ने अब कुलपति को ईमेल के जरिए भेजे गए पत्र में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग दोहराई है. उनका कहना है कि मामले में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ और उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया.
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विश्वविद्यालय परिसरों में यौन उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों के निपटारे और आंतरिक शिकायत समितियों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद कुलपति इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं और शिकायतकर्ताओं की चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है.
