हैदराबाद: हैदराबाद में अमेरिकी दूतावास को जोड़ने वाली एक सड़क का नाम बदलकर ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ करने के तेलंगाना सरकार के फैसले पर वामपंथी दलों ने नाराजगी जताई है.
मालूम हो कि इस सड़क को पहले यूएस कॉन्सुलेट रोड के नाम से जाना जाता था, जिसे अब अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम से बदल दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार (23 जून) को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमार्क ने वाणिज्य दूतावास में अमेरिका की आज़ादी की 250वीं वर्षगांठ के जश्न के हिस्से के तौर पर आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जहां सड़क का नाम बदलने की प्रक्रिया में एक पट्टिका का अनावरण किया गया.
तेलंगाना सरकार के इस पहल का वाम दलों ने विरोध किया है. उनका कहना है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़रायल युद्ध से दुनिया भर में तबाही मची हुई है.
सात वाम पार्टियां जिसमें – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), सीपीआई-एमएल (न्यू डेमोक्रेसी) और सीपीआई-एमएल (मास लाइन), मार्क्सिस्ट कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया और सीपीआई-एमएल (जनशक्ति) शामिल हैं, ने 23 जून को बाबू जगजीवन राम की प्रतिमा से आंबेडकर प्रतिमा तक एक जुलूस निकाला.
वहीं, 22 जून को सेंटर फॉर इंडिया ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने गोलकोंडा क्रॉसरोड से आरटीसी क्रॉसरोड तक एक और जुलूस निकाला था.
आंबेडकर प्रतिमा के पास लोगों को संबोधित करते हुए माले के राज्य सचिव जॉन वेस्ली ने तेलंगाना सरकार से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की. साथ ही यह भी कहा कि ऐसा न करने पर वामपंथी पार्टियां अपना विरोध और तेज़ करेंगी.
राज्य सरकार से दुनियाभर में युद्ध भड़काने वाले शख्स के महिमामंडन पर स्पष्टीकरण मांगते हुए वेस्ली ने पूछा कि क्या इस कदम का मकसद युद्ध को बढ़ावा देना है या भारत के खिलाफ टैरिफ लगाना.
उन्होंने कहा, ‘मोदी ने ट्रंप को ज़रूरत से ज़्यादा सम्मान दिया, लेकिन हैरानी की बात है कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने भी उसी रास्ते को अपनाया है.’
उन्होंने इस मुद्दे को जनता की चिंता का विषय बताया. वेस्ली ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारत की गुटनिरपेक्ष नीति के खिलाफ़ गए हैं.
उन्होंने कहा, ‘फासीवादी सोच वाली भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अनुसरण करके कांग्रेस ने लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.’
वहीं, भाकपा राज्य सचिवालय के सदस्य वीएस बोस ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ ने भारतीयों की जेब पर भारी बोझ डाला है. ऐसे में तेलंगाना सरकार ने ट्रंप के प्रति अपनी वफादारी दिखाई है.
‘बड़ी तारीफ़’
उधर, कॉन्सुलेट के कार्यक्रम में अमेरिकी राजदूत गोर ने सरकार के इस कदम की तारीफ़ करते हुए इसे यूएस-भारत संबंधों में हैदराबाद के बढ़ते महत्व को मान्यता देने वाला बताया.
गोर ने कहा, ‘हमारी साझेदारी की तेज़ी से बढ़ती रफ़्तार हैदराबाद से बेहतर कहीं और नहीं दिखती. हाई-टेक सिटी से लेकर एयरोस्पेस और डिफेंस तक, यह इलाका उस तरक्की को दिखाता है जो हमारे आपसी संबंधों की रफ़्तार को तय कर रही है.’
उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा, ‘हमारे अंतरिम व्यापार समझौते और ‘मिशन इंडिया’ के ज़रिए अमेरिका में 20 अरब डॉलर से ज़्यादा का नया निवेश आने की राह पर है. इससे हम यह साबित कर रहे हैं कि ‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब ‘अमेरिका अकेला’ नहीं है. हम तेलंगाना सरकार के उस उदार कदम के लिए बहुत आभारी हैं जिसके तहत ‘डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू’ का नामकरण किया गया. यह कदम उस मज़बूत और सम्मानजनक साझेदारी को दर्शाता है जिसे राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के लिए बढ़ावा दिया है.’
इस संबंध में उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने अमेरिका के साथ करीबी संबंध बनाने में तेलंगाना की भूमिका पर ज़ोर दिया. जबकि अमेरिकी कॉन्सल-जनरल लॉरा विलियम्स ने अमेरिका-भारत टेक्नोलॉजी सहयोग को आगे बढ़ाने में इस क्षेत्र की अहम भूमिका की सराहना की.
‘भारत का अपमान’
तेलंगाना सरकार के इस फैसले से नाराज माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य एस. वीरैया ने द वायर से कहा, ‘आमतौर पर सड़कों के नाम महान लोगों या प्रेरणा देने वालों के नाम पर रखे जाते थे. लेकिन ईरान में भारी तबाही मचाने के बाद ट्रंप इस श्रेणी में कैसे फिट बैठते हैं?’
उन्होंने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के अमेरिकी अपहरण और उन्हें अमेरिका में अकेले कैद रखने के कदम का ज़िक्र करते हुए इसे ट्रंप का कठोर और दमनकारी कदम बताया.
उन्होंने कहा, ‘ट्रंप ने क्यूबा पर कब्ज़ा करने की धमकी भी दी है और ग्रीनलैंड पर भी अपनी आक्रामक नज़र गड़ाए हुए हैं. इससे इन देशों की आज़ादी और संप्रभुता को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने उन अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन किया है जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद देशों की आज़ादी और संप्रभुता का सम्मान करने के लिए बनाए गए थे. इन नियमों को संयुक्त राष्ट्र ने भी स्वीकार किया था.’
एस. वीरैया ने यह भी कहा कि ट्रंप ने दुनिया के नियमों को तोड़ा है और अपनी मर्ज़ी से काम किया है.
भारत के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘ट्रंप ने 70 से ज़्यादा बार अपनी तारीफ़ की और दावा किया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम उन्होंने ही करवाया था. हालांकि, दोनों देशों के सैन्य प्रमुखों ने सीजफायर पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप ने दावा किया था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी धमकियों के आगे झुक गए और टकराव खत्म कर दिया.’
वीरैया ने कहा कि भारतीय सामानों पर ‘ट्रंप द्वारा शुरू किया गया टैरिफ वॉर भारत का अपमान था.’
उन्होंने सवाल उठाया, ‘रूस और ईरान से तेल और गैस न खरीदने के लिए भारत को ब्लैकमेल करके, ट्रंप ने देश में आर्थिक संकट पैदा कर दिया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ज़ीरो टैक्स पर अमेरिकी कृषि उत्पादों की बाढ़ लाकर भारतीय किसानों की कमर तोड़ दी. भारतीय उपज पर बुरा असर पड़ा क्योंकि अमेरिकी सामान सस्ते थे; उन्हें अमेरिकी सरकार से 60% सब्सिडी मिलती थी. दूसरी ओर, भारत में कृषि सब्सिडी उत्पादन लागत का 6% से ज़्यादा नहीं थी. ऐसे हालात में ट्रंप प्रेरणा के स्रोत कैसे हो सकते हैं?”
वहीं, माकपा के राज्य सचिव जॉन वेस्ली ने पूछा कि ट्रंप के बजाय उपनिवेश-विरोधी क्रांतिकारी भगत सिंह का नाम सड़क के लिए क्यों नहीं सोचा गया.
उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसे व्यक्ति का सम्मान करना, जिसे इंसानी ज़िंदगी की ज़रा भी परवाह नहीं है, बिल्कुल भी उचित नहीं है.’
इस संबंध में भाकपा के सेंट्रल कंट्रोल कमीशन के अध्यक्ष के. नारायण ने कहा कि ट्रंप ने पीएम मोदी को चुप करा दिया है. उन्होंने कहा, ‘उन्होंने ईरान के साथ युद्ध करके भारत और बाकी दुनिया में आर्थिक संकट पैदा करने के बाद ऐसा किया है.’
तेलंगाना में पार्टी के सहायक सचिव ईटी नरसिम्हा ने कहा कि ट्रंप किसी भी तरह से ऐसे रोल मॉडल नहीं हैं जिनके नाम पर किसी सड़क का नाम रखा जाए. नरसिम्हा ने कहा, ‘वह भारत के दुश्मन थे.’
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
