पश्चिम बंगाल: अन्नपूर्णा योजना के 26 लाख आवेदन ख़ारिज, कारणों में एसआईआर में नाम न होने का हवाला दिया

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि राज्य की नई सरकार द्वारा महिलाओं के लिए शुरू की गई अन्नपूर्णा भंडार योजना के लिए अब तक आए लगभग एक करोड़ 60 लाख आवेदनों में से 26 लाख आवेदन रद्द कर दिए गए, क्योंकि वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद पात्रता की शर्तों पर खरे नहीं उतरे.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार (1 जुलाई) को जानकारी दी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) डेटा के आधार पर महिलाओं के लिए नई शुरू की गई ‘अन्नपूर्णा योजना’ के लगभग 26 लाख आवेदन खारिज कर दिए गए हैं, जबकि 1.3 करोड़ से ज़्यादा आवेदन सही पाए गए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में अन्नपूर्णा योजना को शामिल किया था.

बीते चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हराकर सत्ता में आने के बाद भाजपा की सुवेंदु अधिकारी सरकार द्वारा 3 जून को यह योजना शुरू की गई थी. पिछले महीने पेश किए गए अपने पहले बजट में सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए 36,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.

इस संबंध में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रशासनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘हमें अन्नपूर्णा योजना के लिए लगभग 1.6 करोड़ आवेदन मिले थे. इनमें से 1.3 करोड़ से ज़्यादा आवेदन सही पाए गए, जबकि लगभग 26 लाख आवेदनों को इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि वे ज़रूरी शर्तों को पूरा नहीं कर रहे थे.’

इस कार्यक्रम में दस लाख से ज़्यादा लाभार्थियों के बैंक खातों में नकद लाभ ट्रांसफर किए गए.

उन्होंने कहा, ‘हमने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत नकद लाभ पाने वाले लाभार्थियों का सर्वे किया. इसमें पता चला कि कम से कम 27 लाख लोग या तो भारत के नागरिक नहीं थे या उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे. इस लिस्ट में ऐसे लाभार्थी शामिल थे जिनकी मौत हो चुकी थी, जो दूसरी जगहों पर चले गए थे, और कुछ ऐसे लोग भी थे जो कई खातों में मदद ले रहे थे. हमने उनके नाम हटा दिए क्योंकि भारतीयों के अलावा कोई और सरकारी लाभ नहीं ले सकता.ट

मालूम हो कि अन्नपूर्णा योजना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की महत्वकांक्षी योजना लक्ष्मी भंडार’ की जगह लाई गई है. लक्ष्मी भंडार योजना फरवरी 2021 में समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों की महिलाओं को हर महीने आर्थिक मदद देने के लिए शुरू की गई थी.

हालांकि, मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग बांग्लादेश से शरणार्थी के तौर पर आए हैं और जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है, या जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बने अपीलीय ट्रिब्यूनल में अपील की है, उन्हें तब तक फायदे मिलते रहेंगे जब तक उनके मामलों का निपटारा नहीं हो जाता.

मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा, ‘लक्ष्मी भंडार योजना के तहत दो करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 10 लाख पुरुष पाए गए हैं. क्या पुरुषों को लक्ष्मी भंडार के तहत सहायता मिलनी चाहिए? इसलिए, छंटनी करना ज़रूरी हो गया था.’

उल्लेखनीय है कि इस साल फरवरी में एसआईआर के दौरान अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद लगभग 63 लाख वोटरों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे. इसके अलावा 27 लाख मामले अपीलीय ट्रिब्यूनल के पास लंबित हैं.

मालूम हो कि अन्नपूर्णा योजना को लेकर भाजपा सरकार द्वारा 12 पन्नों के आवेदन की भी आलोचना हुई थी.

इस संबंध में सुवेंदु अधिकारी ने कहा, ’12 पन्ने के आवेदन फॉर्म की वजह से हमारी आलोचना हुई थी. असल में सिर्फ चार पन्ने ही भरने थे. अब जब आपने फॉर्म भर दिया है और आपका डेटा सरकारी पोर्टल पर अपलोड हो गया है, तो केंद्र और राज्य सरकार की अलग-अलग योजनाओं का फायदा उठाने के लिए आपको कोई और फॉर्म भरने की ज़रूरत नहीं है.’

इससे पहले मई में सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि पिछली तृणमूल सरकार के समय लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लगभग 30 लाख नकली लाभार्थियों को हर महीने आर्थिक मदद मिल रही थी.