नई दिल्ली: कर्नाटक में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सहयोगी एचडी कुमारस्वामी की जनता दल (सेकुलर) (जेडीएस) लगातार विरोध कर रहे हैं.
इस सिलसिले में दोनों दलों के नेताओं ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वी. अंबुकुमार को एक औपचारिक शिकायत सौंपी है, जिसके बाद कांग्रेस के कर्नाटक प्रभारी और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस विरोध को भाजपा और एनडीए का दोहरा रवैया बताया है.
उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में सोमवार (6 जुलाई) को भाजपा और जेडीएस से कहा कि अगर इनमें हिम्मत है तो सामने आकर कहें कि एसआईआर की प्रक्रिया गलत और लोकतंत्र-विरोधी है, साथ ही यह लोकतंत्र और संविधान पर हमला है और पूरे भारत में एसआईआर को तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए.
कांग्रेस नेता सुरजेवाला ने लिखा, ‘कर्नाटक में एसआईआर का विरोध करने वाले कर्नाटक के पूरी तरह से बंटे हुए और निराश भाजपा नेताओं (जिनके साथ निश्चित रूप से एचडी कुमारस्वामी भी शामिल हैं) का अजीब पाखंड है.’
सुरजेवाला ने आगे कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) और कर्नाटक कांग्रेस एसआईआर के प्रति भाजपा और जेडीएस के विरोध का स्वागत करती है. साथ ही उन्होंने इन नेताओं को चुनौती देते हुए सिलसिलेवार तरीके से चुनावी राज्यों में हुए एसआईआर को गलत बताने की हिम्मत दिखाने और चुनावी परिणामों को रद्द करने के लिए आवाज़ उठाने की बात कही;
1. बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर में 47 लाख मतदाताओं के नाम हटाना गलत था और बीते बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए.
2. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर में 84 लाख वोटर्स के नाम हटाना गलत था और बीते विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए.
3. असम में विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर में 11 लाख वोट हटाना गलत था और बीते विधानसभा चुनाव के नतीजों को रद्द कर दिया जाना चाहिए.
4. एसआईआर प्रक्रिया गलत, लोकतंत्र-विरोधी और लोकतंत्र व संविधान पर हमला है और इसे पूरे भारत में तुरंत खत्म कर दिया जाना चाहिए.
5. भारतीय निर्वाचन आयोग का एसआईआर शुरू करने का फैसला पूरी तरह गलत था और असल में यह वोट हटाने की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसका मकसद गणतंत्र और उसके लोगों को कमजोर करना है.
Strange hypocrisy by utterly divided and frustrated BJP leaders of Karnataka (joined of course by Mr. H.D.Kumaraswamy) in opposing “Special Intensive Revision” in Karnataka.
We, at @INCIndia & @INCKarnataka , welcome their opposition to SIR and call upon/dare them (BJP & JD-S)… pic.twitter.com/N6uZXCDjJj
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) July 6, 2026
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल और बिहार, दोनों ही जगहों पर एसआईआर प्रक्रिया विवादों में घिरी रही है.
उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल में 27 लाख वोटर इंतज़ार करते रह गए क्योंकि मतदान से महज दो हफ़्ते से भी कम समय पहले 19 ज्यूडिशियल ट्रिब्यूनल ने उनके भविष्य का फैसला करते हुए महज 139 लोगों के वोट देने के अधिकार बहाल किए. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया.
‘द वायर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की कुल 294 सीटों में से 150 सीटों पर वोटर लिस्ट से हटाए गए लोगों की संख्या जीत के अंतर से ज़्यादा थी; इनमें से भाजपा ने 99 सीटें जीतीं. 2021 में उसने इनमें से सिर्फ़ 19 सीटें जीती थीं.
‘स्थापित एसआईआर गाइडलाइंस का उल्लंघन’
बता दें कि कर्नाटक एनडीए के सीनियर नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक औपचारिक शिकायत सौंपते हुए कर्नाटक में जारी एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया है.
इस प्रतिनिधिमंडल में कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और शोभा करंदलाजे, कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावडी नारायणस्वामी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण समेत कई नेता शामिल थे.
नेताओं ने पत्र में कहा, ‘हम कर्नाटक राज्य में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) अभियान में भारी अनियमितताओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए यह पत्र लिख रहे हैं. एसआईआर आयोजित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी स्वीकृत प्रक्रिया की बिल्कुल भी परवाह नहीं कर रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना ही कमजोर हो रही है.’
A joint delegation of the @JanataDal_S and @BJP4Karnataka met the State Chief Electoral Officer and submitted a detailed complaint, supported by documentary evidence, over the Congress Government’s misuse of the SIR process to manipulate electoral rolls in Karnataka.
Along with… pic.twitter.com/hCtYniJ0JG
— ಹೆಚ್.ಡಿ.ಕುಮಾರಸ್ವಾಮಿ | HD Kumaraswamy (@hd_kumaraswamy) July 6, 2026
उन्होंने आगे कहा, ‘घर-घर जाकर जानकारी लेने के बजाय बीएलओ कम्युनिटी हॉल, मस्जिदों और यहां तक कि अपने घरों से भी एन्यूमरेशन फॉर्म भर रहे हैं.’
इसके अलावा, नेताओं ने बताया कि बीएलओ ने एसआईआर के मकसद से वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाए हैं. उन्होंने कहा, ‘ऐसा करना तय एसआईआर गाइडलाइंस का उल्लंघन है और इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं.’
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा, तो चुनावी सूची अविश्वसनीय और ऐसी हो जाएगी जिसे बनाए रखना मुश्किल होगा.
दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले ‘द वायर’ ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि भाजपा-शासित महाराष्ट्र में भी बीएलओ ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी इकट्ठा करने के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए हैं, क्योंकि उन पर भारी दबाव है और उन्हें तय समय-सीमा के भीतर काम करना है.
‘हर किसी को वोट देने का अधिकार मिले’
इस बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी के दावों को खारिज कर दिया और विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि वे ‘सिर्फ़ यह चाहते हैं कि गरीब लोगों और अल्पसंख्यकों को मुश्किलों का सामना करना पड़े’.
शिवकुमार ने कहा, ‘सरकार एसआईआर प्रक्रिया में दखल नहीं देगी. विपक्ष इसलिए परेशान है क्योंकि सरकार इस प्रक्रिया के बारे में बड़े पैमाने पर जागरूकता फैला रही है. लगभग 4.5 करोड़ लोगों ने जाति और आय प्रमाण पत्र हासिल कर लिए हैं. उन्हें ये प्रमाण पत्र ऑनलाइन डाउनलोड करने की सुविधा दी गई है. विपक्ष सिर्फ़ यह चाहता है कि गरीब लोगों और अल्पसंख्यकों को मुश्किलों का सामना करना पड़े.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमें बताएं कि बांग्लादेशी प्रवासी कहां हैं. अगर वे वहां हैं, तो जब आपकी सरकार सत्ता में थी तब आपने कार्रवाई क्यों नहीं की? उन्हें जितना चाहें उतनी आलोचना करने दें. आलोचना खत्म हो जाती है, लेकिन अच्छे काम हमेशा याद रखे जाते हैं.’
मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर किसी को वोट देने का अधिकार मिले. विपक्ष को इसके लिए सरकार द्वारा किए गए कामों की सराहना करनी चाहिए.
उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. और विपक्ष सिर्फ आलोचना करने के लिए ही बोल रहा है.
