ओडिशा: रथ यात्रा के दौरान दो श्रद्धालुओं की मौत व कई अस्पताल में भर्ती, सरकार का भगदड़ से इनकार

ओडिशा के वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के दौरान राज्य सरकार ने दो श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि की है, लेकिन भगदड़ जैसी किसी भी घटना की खबरों का खंडन किया है. वहीं, विपक्षी दल के नेताओं ने रथयात्रा के इंतज़ाम पर सवाल उठाए हैं.

गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को रथ यात्रा के दौरान जगन्नाथ पुरी मंदिर के दृश्य. (फोटो साभार: @TheSincereDude/X)

नई दिल्ली: ओडिशा के पुरी में वार्षिक रथयात्रा के दौरान गुरुवार (16 जुलाई) को दो श्रद्धालुओं की मौत व कई अन्य के घायल होने और तबीयत अचानक बिगड़ने की ख़बरें सामने आई है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा के लिए पुरी में लाखों की संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए थे, तभी वहां ‘भगदड़ जैसी’ स्थिति बन गई.

इस घटना में कम से कम 100 लोगों के घायल होने की खबर है. बताया जा रहा है कि यह घटना शायद तब हुई जब भीड़-भाड़ वाले इलाके से एक एंबुलेंस गुज़रने की कोशिश कर रही थी. हालांकि, हादसे की असल वजह का अभी तक आधिकारिक तौर पर पता नहीं चल पाया है.

न्यूज़-18 की रिपोर्ट में बताया गया कि 200 से ज़्यादा लोगों को अस्पताल ले जाया गया था.

वहीं, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अधिकारियों ने भगदड़ मचने की बात से इनकार किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में एक अधिकारी ने कहा कि रथ यात्रा के दौरान ‘पुरी में हालात सामान्य’ रहे.

इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि दो श्रद्धालुओं की मौत भगदड़ की वजह से नहीं, दिल का दौरा पड़ने से हुई है, जिसका भीड़ के प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं था.

इसमें आगे कहा गया है, ‘बारिश से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित कई अन्य श्रद्धालुओं का अस्पतालों में इलाज किया गया और मेडिकल देखभाल के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई.’

खबरों के अनुसार, बयान में थकान, डिहाइड्रेशन और दम घुटने जैसी समस्याओं को ‘बारिश से जुड़ी बीमारियां’ बताया गया है.

इसमें यह भी कहा गया कि बीमार पड़ने वाले सात श्रद्धालुओं को इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों ने तुरंत अस्पतालों में पहुंचाया.

मरने वालों में से एक की पहचान 35 साल के अनिल डैश के तौर पर हुई है, जबकि दूसरे व्यक्ति की पहचान अभी पक्की नहीं हो पाई है.

इस संबंध में ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री महेश महालिंग ने पीटीआई को बताया कि जिस व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है, उनकी मौत शुरुआती इलाज मिलने के बावजूद दम घुटने और उसके बाद दिल का दौरा पड़ने से हुई है.

उन्होंने कहा कि रथ यात्रा में भारी भीड़ के कारण मामूली चोटें लगना आम बात है.

वहीं, इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पुरी के ज़िला मुख्यालय अस्पताल में लगभग 100 लोगों को ले जाया गया, जहां उनका इलाज हुआ. इनमें से 50 लोगों को भर्ती किया गया.

इस बीच, गुरुवार शाम को सोशल मीडिया पर  इस घटना की परेशान करने वाली तस्वीरें सामने आईं.

वहीं,  मुख्यमंत्री द्वारा तेज़ मौसमी बारिश के बीच जमा हुई भारी भीड़ की तस्वीरें भी पोस्ट की गईं, जिसमें सुरक्षाकर्मी भीड़ के मुकाबले बहुत कम नज़र आ रहे थे.

16 जुलाई, 2026 को पुरी में रथ यात्रा के दौरान एक पुलिस अधिकारी और कुछ सुरक्षाकर्मी श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालते हुए दिखाई दिए. (फोटो: @MohanMOdisha/X)

सीएम माझी ने 16 जुलाई की दोपहर एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, ‘भावना, भक्ति और आस्था का विशाल सागर.’

मालूम हो कि मुख्यमंत्री माझी इस धार्मिक आयोजन को बढ़ावा देने में सक्रिय रहे हैं, जो ऐतिहासिक रूप से बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करने के लिए जाना जाता है.

पीटीआई के अनुसार, इमरजेंसी रेस्क्यू टीमों और सुरक्षा कर्मियों ने कई लोगों को स्ट्रेचर पर बाहर निकाला और उन्हें मेडिकल मदद दी गई.

एजेंसी ने यह भी बताया कि गुरुवार शाम को समारोह की मुख्य जगहों पर अचानक भीड़ बढ़ गई थी, जिसके चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई और ‘कई’ लोग बीमार पड़ गए.

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ओडिशा से आने वाले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर लिखा, ‘पवित्र रथ यात्रा के दौरान हुई दुखद मौत के बारे में जानकर मुझे बहुत दुख हुआ है. दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करने के साथ-साथ, मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं. भगवान श्री जगन्नाथ प्रभावित परिवारों को असीम धैर्य और शक्ति प्रदान करें. मैं बीमार पड़े श्रद्धालुओं के जल्द स्वस्थ होने की भी प्रार्थना करता हूं.’

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दुख जताया और राज्य सरकार से अपील की कि भीड़ को ठीक से नियंत्रित कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखा जाए.

उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘दुख की इस घड़ी में बीजू जनता दल के सभी कार्यकर्ता हर किसी की मदद के लिए पूरा सहयोग देंगे. मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकार भीड़ को ठीक से मैनेज कर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.’

पीटीआई के अनुसार, बाद में पटनायक की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अस्पताल में घायलों से मुलाक़ात की.

कांग्रेस विधायक सागर चरण दास ने एक्स पर लिखा, ‘भगदड़ जैसी स्थिति के बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं को मेडिकल इलाज की ज़रूरत पड़ी है.’

कांग्रेस विधायक ने हादसे की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है.

गौरतलब है कि 2026 में भीड़ के अचानक बढ़ने की यह घटना 2025 की रथ यात्रा के दौरान हुई जानलेवा भगदड़ के एक साल बाद सामने आई है, जिसमें तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और 50 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे.

पिछले साल हुई भगदड़ के लिए भीड़ के कुप्रबंधन, बुनियादी ढांचे की कमियों और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी दिक्कतों को जिम्मेदार ठहराया गया था. एक जांच में यह बात सामने आई थी कि शहर का ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ – जो सीसीटीवी और ड्रोन फीड के ज़रिए भीड़ की आवाज़ाही और ट्रैफ़िक पर नज़र रखने वाला एआई-आधारित सर्विलांस सिस्टम है – ठीक से काम नहीं कर रहा था.

एक जांच समिति ने सर्विलांस नेटवर्क को मैनेज करने वाले ऑपरेटर को ब्लैकलिस्ट करने और इसकी देखरेख के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की थी.