सर्वदलीय बैठक: टीएमसी बागी सांसदों को बुलाने के विरोध में विपक्ष का वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र के पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने पेपर लीक, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन पर मोदी सरकार की चुप्पी और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की.

19 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में संसद के मनसून सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने कुछ समय के ले वॉकआउट किया. यह विरोध उन बागी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों को बैठक में बुलाए जाने के खिलाफ था, जिन्होंने क्षेत्रीय दल नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) का दामन थाम लिया है, जबकि उनकी अयोग्यता का मामला अभी भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास लंबित है.

बैठक के दौरान विपक्ष ने पेपर लीक, शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से जबरन हटाए जाने, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन पर मोदी सरकार की चुप्पी और पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग की.

विपक्ष ने परिसीमन पर भी चर्चा की मांग की. यह मांग ऐसे समय उठी है जब अटकलें हैं कि सरकार इस संबंध में संशोधित विधेयक ला सकती है. दूसरी ओर सरकार ने कहा कि उसने विपक्ष के सुझावों पर ध्यान दिया है, लेकिन अगर पार्टियां सदन में केवल नारेबाजी करेंगे तो इससे राजनीतिक नुकसान ही होगा.

हंगामे के साथ हुई शुरुआत

रविवार को बैठक की शुरुआत ही विवाद के साथ हुई. द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सहित विपक्षी दलों ने टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाए जाने के विरोध में प्रतीकात्मक वॉकआउट किया. हालांकि पिछले महीने डीएमके ने इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा नहीं लिया था, लेकिन द वायर को मिली जानकारी के अनुसार इस बार उसने अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर वॉकआउट किया.

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा, ‘आज पूरा विपक्ष – जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) शामिल हैं – ने तथाकथित एनसीपीआई दल को बुलाए जाने के विरोध में वॉकआउट किया, क्योंकि यह एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है.’

उन्होंने कहा, ‘टीएमसी की संख्या 28 सांसदों की है और जिन 20 तथाकथित बागी सांसदों के विलय की बात कही जा रही है, उसे अभी तक लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी नहीं दी है. उनकी अयोग्यता का मामला लंबित है. 91वें संशोधन के बाद अलग गुट बनाने की कोई गुंजाइश नहीं है, तो संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर इन बागी सांसदों को निमंत्रण भेजा?’

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि यह वॉकआउट मोदी सरकार के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध का संकेत था, जिसमें एनसीपीआई को आमंत्रित किया गया था. एनसीपीआई असल में 20 तथाकथित ‘बागी’ टीएमसी सांसदों का ठिकाना है, जबकि इस संबंध में अंतिम फैसला अभी भी लोकसभा अध्यक्ष के पास लंबित है.

हालांकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बाद में पत्रकारों से कहा, ‘एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता का अनुरोध किया है. आप उन्हें कैसे नज़रअंदाज़ कर सकते हैं? सभी को आमंत्रित करना सरकार का कर्तव्य है.’

‘भाजपा का विलय और अधिग्रहण अभियान’

बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी पर छोटे दलों को तोड़ने का आरोप भी लगाया. माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने इसे राजनीतिक विलय और अधिग्रहण (मर्जर एंड एक्विजिशन) करार दिया.

उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की जब 20 बागी टीएमसी सांसद एनसीपीआई में शामिल हो चुके हैं और दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में चले गए हैं, जिनके विलय को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को मान्यता दे दी.

ब्रिटास ने द वायर से कहा, ‘सरकार जिस तरह से विपक्ष की जगह छीन रही है, उसे लेकर नाराज़गी, आपत्तियां और विरोध था. सरकार अधिग्रहण और विलय जैसी कॉर्पोरेट तकनीकें अपना रही है.’

विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर चढ़ावा गबन के आरोपों पर सरकार की चुप्पी, पेपर लीक के खिलाफ चल रहे आंदोलनों और शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित कॉकरोच जनता पार्टी के धरना स्थल से सोनम वांगचुक को हटाए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाए.

इसके अलावा विपक्ष ने पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण और देशभर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया का मुद्दा भी उठाया. द वायर को मिली जानकारी के अनुसार सरकार ने इन मुद्दों को केवल संज्ञान में लिया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया.

परिसीमन विधेयक पर विपक्ष की आपत्ति

इस अटकल के बीच कि भाजपा अप्रैल में पारित न हो पाने के बाद परिसीमन विधेयक को फिर से पेश करने की योजना बना रही है, विपक्ष ने कहा कि अगर ऐसा कोई विधेयक लाया जाता है तो पहले उस पर सभी दलों से चर्चा की जानी चाहिए.

कांग्रेस से अलगाव के बाद यह भी चर्चा रही है कि क्या डीएमके इस विधेयक पर सरकार का समर्थन करेगी. तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) से गठबंधन कर लिया था, जिसके बाद दोनों दलों का गठबंधन समाप्त हो गया.

डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन परिसीमन को लेकर सरकार ने अब तक कोई स्पष्टता नहीं दी है.

उन्होंने कहा, ‘अगर आप महिला आरक्षण विधेयक की बात कर रहे हैं तो डीएमके हमेशा उसके पक्ष में है. लेकिन परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार ने अभी तक कोई स्पष्ट रुख नहीं रखा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘सिर्फ मीडिया में अटकलें चल रही हैं. सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसके मन में क्या है. दक्षिणी राज्यों के हितों को प्रभावित करने वाला कोई भी कदम डीएमके कभी स्वीकार नहीं करेगी. दक्षिणी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में हमने प्रस्ताव पारित किया था कि परिसीमन पर लगी रोक को 25 वर्ष और बढ़ाया जाए.’

शिवा ने कहा कि यह भ्रम पैदा करने की कोई आवश्यकता नहीं है कि डीएमके बिना अपना रुख जाने सरकार का समर्थन कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘मैं अटकलों पर कोई जवाब नहीं दे सकता. विधेयक आने दीजिए, तब हम अपना स्पष्ट रुख बताएंगे.’

परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग

राज्यसभा में टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने रविवार को अलग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की.

उन्होंने लिखा, ‘माननीय प्रधानमंत्री, आपकी सरकार कृषि कानूनों जैसी जल्दबाजी में बनाई गई विधायी प्रक्रिया दोहराने से पहले – जिन्हें बाद में वापस लेना पड़ा था – मैं आपसे आग्रह करता हूं कि जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाएं.’

इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं.

वहीं, सर्वदलीय बैठक के बाद किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकार ने विपक्ष द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों पर ध्यान दिया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सदन में सदस्यों को केवल नारेबाजी के बजाय चर्चा में भाग लेना चाहिए.

रिजिजू ने कहा, ‘हमने सभी से देशहित में मिलकर काम करने की अपील की. रक्षा मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर भारत पर भी पड़ेगा, इसलिए सभी राजनीतिक दलों को देश के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कई राजनीतिक दलों ने अपने विचार रखे. हमने उन्हें सुना और उन पर ध्यान दिया. लोकतंत्र में हर दल को अपनी बात रखने का अधिकार है. कई सुझाव दिए गए और हमने उन्हें भी नोट किया है. हमने विपक्ष से सरकार के विधायी कार्यों में सहयोग करने और विधेयकों को पारित कराने में मदद की अपील की है. अगर दल मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय केवल नारेबाजी करेंगे तो इससे राजनीतिक नुकसान होगा और कोई फायदा नहीं होता.’