नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) नेता शतरूप घोष की एक व्यंग्यात्मक फेसबुक पोस्ट, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधी रात को जारी किए गए सोशल मीडिया वीडियो संदेश के दौरान टेलीप्रॉम्प्टर के इस्तेमाल को लेकर टिप्पणी की थी.
बताया गया है कि पोस्ट प्रकाशित होने के पांच मिनट के भीतर मेटा ने हटा दी.
24 जुलाई को शतरूप घोष को उनके फेसबुक अकाउंट पर मिले संदेश में कहा गया, ‘भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियमों के तहत कानूनी आवश्यकताओं के अनुपालन में लागू की गई एक स्वचालित प्रणाली (ऑटोमेटेड सिस्टम) के जरिए हमने इस सामग्री तक पहुंच सीमित कर दी है.’
घोष ने अपनी पोस्ट में एक लोकप्रिय बांग्ला गीत की पंक्ति का हवाला देते हुए लिखा था, ‘ए तुमि केमोन तुमि चोखेर ताराए आयना धरो?’ जिसका मोटे तौर पर हिंदी अनुवाद है – ‘तुम कौन हो, जो अपनी आंखों में आईना लिए हुए हो?’

यह टिप्पणी कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने वीडियो संदेश को पढ़ने के लिए टेलीप्रॉम्प्टर के इस्तेमाल की ओर इशारा करती थी. उस वीडियो संदेश में मोदी ने कहा था कि ‘पेपर लीक कोई मामूली बात नहीं है’ और उनकी सरकार ने पिछले दो महीनों में पेपर लीक रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं.
आधी रात के बाद जारी किया गया यह वीडियो सेल्फी मोड में रिकॉर्ड किया गया था. कई लोगों का मानना है कि यह ‘जेन ज़ी’ को आकर्षित करने की कोशिश थी, जो शिक्षा प्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का एक अहम हिस्सा हैं और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
हालांकि, अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने यह जिक्र नहीं किया कि दिल्ली और मुंबई में इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने बर्बरता की है.
फेसबुक द्वारा पोस्ट हटाए जाने की सूचना का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए घोष ने फेसबुक पर लिखा, ‘यह देखकर अच्छा लगा कि सरकार कम से कम कुछ मोर्चों पर तो सक्रिय है!’
बाद में द वायर से बातचीत में घोष ने कहा, ‘मोदी के टेलीप्रॉम्प्टर की तस्वीर बाहर न आने देने में जितनी मेहनत की जा रही है, उसका आधा प्रयास भी अगर परीक्षा के पेपर लीक रोकने में किया जाता, तो देश को इतने छात्रों की आत्महत्याएं नहीं देखनी पड़तीं.’
उल्लेखनीय है कि द वायर ने इससे पहले अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि गृह मंत्रालय अब इंटरनेट से समाचार, विश्लेषण, कॉमेडी, व्यंग्य और टिप्पणी जैसी ऑनलाइन सामग्री को सीधे तौर पर हटवा सकता है. गृह मंत्रालय की वर्ष 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी) के तहत 1,11,185 संदिग्ध ऑनलाइन सामग्रियों को ब्लॉक किया गया.
रिपोर्ट के अनुसार, आईटी अधिनियम की धारा 79(1) ऑनलाइन प्लेटफार्म और सोशल मीडिया मध्यस्थों (जैसे एक्स, मेटा और यूट्यूब) को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा प्रदान करती है. लेकिन धारा 79(3)(बी) के तहत अगर सरकारी एजेंसियों द्वारा चिह्नित सामग्री को हटाने में ये प्लेटफार्म विफल रहते हैं, तो उन्हें यह कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं होता.
द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘सहयोग पोर्टल’ शुरू होने के बाद अब केवल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय या इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ही नहीं, बल्कि विभिन्न सरकारी एजेंसियां भी ऑनलाइन सामग्री हटाने के निर्देश जारी कर सकती हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि सहयोग पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्रालय के लिए सामग्री हटाने की प्रक्रिया, यहां तक कि बड़ी संख्या में एक साथ सामग्री हटवाने (बल्क टेकडाउन) की कार्रवाई भी, काफी आसान हो गई है. इससे सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफार्म पर सामग्री को सेंसर करने के लिए मध्यस्थों पर दबाव डालने की प्रक्रिया लगभग ऑटोमेटेड हो गई है.
