नई दिल्ली: 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद शुरू हुआ आंदोलन अब और व्यापक हो गया है. केंद्र सरकार के साथ बातचीत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शुक्रवार (24 जुलाई) को कहा कि अगर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अगले एक-दो दिनों के भीतर पद नहीं छोड़ते हैं, तो वह एक और देशव्यापी आंदोलन का आह्वान करेंगे.
इसके साथ ही सीजेपी ने कहा कि आरएएफ और दिल्ली पुलिस को माफ़ी मांगनी होगी.
The Brutality Of 20th July By RAF & Delhi Police, Will Not Be Let Go Off By Us!
Every single officer will be held responsible, every officer who attacked protesters, and molested females will be held accountable.
We will put FIR on everyone responsible, these Gundas will not be… pic.twitter.com/SvnSOh8IGK
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 24, 2026
इससे पहले सीजेपी का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्र सरकार के साथ बातचीत के लिए जंतर-मंतर से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब गया था.
सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा, ‘हमने सरकार से साफ कहा है कि इस मामले में अब ज्यादा इंतजार नहीं किया जा सकता. अगर अगले एक-दो दिनों में धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से नहीं हटते, तो देशभर में एक और आंदोलन का आह्वान किया जाएगा. यह 20 जुलाई के प्रदर्शन से भी बड़ा होगा और पूरे देश में आयोजित किया जाएगा. हमने सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि देशभर के लोग केवल धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते हैं. इससे कम कुछ भी हमें स्वीकार नहीं होगा.’
रांका ने कहा, ‘नीट पेपर लीक की वजह से जिन बच्चों की जान गई, उसकी जिम्मेदारी किसकी है? इसका जवाब हम जानते हैं. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा या उन्हें पद से हटाया जाना किसी भी कीमत पर समझौते का विषय नहीं है. जब तक ऐसा नहीं होता, जंतर-मंतर का यह प्रदर्शन और देशभर में चल रहे इसके समर्थन में आंदोलन जारी रहेंगे. हमने सरकार से कहा कि शिक्षा सुधार को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन पूरे देश की एक ही मांग है कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें.’
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने सीजेपी को शनिवार (25 जुलाई) दोपहर 3:30 बजे फिर से बातचीत के लिए बुलाया है.
सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें लिखित रूप में रखी हैं.
उन्होंने कहा, ‘हमारी पहली और सबसे अहम मांग है- ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें.’ इस पर कोई समझौता नहीं होगा. उन्हें या तो इस्तीफा देना होगा या मंत्रिमंडल से हटाया जाना होगा. दूसरी मांग है कि नीट पेपर लीक के कारण जिन लोगों की जान गई, उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए. तीसरी मांग है कि आंदोलन से जुड़े सभी एफआईआर वापस लिए जाएं और भविष्य में भी किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करने की गारंटी दी जाए.’
दास ने कहा कि इन तीन मांगों के अलावा सीजेपी का पांच सूत्रीय एजेंडा भी है, जिस पर वह सरकार से चर्चा करना चाहती है, लेकिन पहले इन तीनों मांगों को पूरा किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार ने दूसरी और तीसरी मांग पर सहमति जताई है.
इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुटे हुए हैं, जहां सीजेपी के सदस्य शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं. प्रदर्शन के मद्देनज़र प्रशासन ने मध्य दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए हैं, कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बार बार निलंबित की जा रही हैं और कई प्रवेश मार्गों पर भी रोक लगा दी गई है.
शुक्रवार को सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार ने उनकी चिंताओं को सुना है और विभिन्न पहलुओं से इन मुद्दों पर चर्चा की गई.
नड्डा ने कहा, ‘हमने उनकी मांगें सुनी हैं और उन्हें बताया है कि सरकार इस पर विचार करने के बाद जवाब देगी.’
वहीं, पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है.
उधर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष संसद में किसी भी चर्चा के लिए तैयार नहीं होगा.
