नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने मंगलवार (28 जुलाई) को आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी छात्र नेता ओइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश में बिना किसी विधिवत वारंट के पार्टी कार्यालय में घुस आए.
पीटीआई के अनुसार, दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में पुलिस के साथ कुछ देर तक चली तनातनी के बाद पार्टी सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस जिस तरह व्यवहार कर रही है, उससे मैं स्तब्ध और आक्रोशित हूं. आज दिल्ली पुलिस के अधिकारी एक राष्ट्रीय पार्टी माकपा के कार्यालय में जबरन घुस आए. वे छात्र नेता ओइशी घोष को कस्टडी में लेना चाहते थे. वह जंतर-मंतर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं.’
ओइशी घोष स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की दिल्ली राज्य सचिव और संगठन की अखिल भारतीय संयुक्त सचिव हैं. पिछले कुछ महीनों में उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे सहित कई छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया है. बताया गया कि पुलिस शाम करीब साढ़े चार बजे पार्टी कार्यालय पहुंची थी.
‘यह राजनीतिक प्रतिशोध है’
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य पिनराई विजयन ने एक्स पर लिखा, ‘एसएफआई ने हाल ही में नीट परीक्षा घोटाले के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी. उसके तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की ओर साफ इशारा करती है. राज्य की ताकत का इस तरह खुला दुरुपयोग भाजपा नीत केंद्र सरकार की असहमति के प्रति बढ़ती असहिष्णुता को दर्शाता है.’
पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘एसएफआई नेता ओइशी घोष को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस का माकपा मुख्यालय एकेजी भवन में घुसने का प्रयास लोकतांत्रिक मानकों पर एक खतरनाक हमला है.’
उन्होंने एक्स पर जारी बयान में लिखा, ‘जानकारी मिली है कि पिछले कई दिनों से ओइशी घोष का लगातार पीछा किया जा रहा है और उन पर निगरानी रखी जा रही है. यह छात्र नेताओं को डराने-धमकाने का एक खुला अभियान है.’
शाम को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी ओइशी घोष के समर्थन में एक्स पर लिखा, ‘हमारी टीम को परेशान करना बंद करें. अपने वादे का सम्मान करें.’
उन्होंने आगे कहा, ‘अगर ओइशी घोष के साथ कुछ भी हुआ, तो सरकार को ऐसा आंदोलन देखना पड़ेगा जैसा उसने पहले कभी नहीं देखा होगा.’
If anything happens to @aishe_ghosh, the government will see a protest like never before.
Stop harassing our team. Honour your words. https://t.co/bjfwqueVe1
— Ashutosh Ranka (@AshutoshRanka) July 28, 2026
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक्स पर लिखा है कहा, ‘अगर पुलिस द्वारा छात्रों को परेशान किया जाना जारी रहा, तो कॉकरोच जनता पार्टी जल्द ही एक बड़े शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान करेगी. सरकार को छात्रों को निशाना बनाना और उनके खिलाफ अभियान चलाना तुरंत बंद करना चाहिए.’
जॉन ब्रिटास ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
ब्रिटास ने आरोप लगाया कि पुलिस के साथ कई अधिकारी आए थे, जिनमें कम से कम एक अधिकारी सादे कपड़ों में था और निजी वाहन से आया था. उन्होंने कहा कि पुलिस ओइशी घोष की गिरफ्तारी के लिए किसी वारंट का हवाला दे रही थी, लेकिन उसकी कोई प्रति उन्हें नहीं दिखाई गई.
ब्रिटास के मुताबिक, पुलिस का कहना था कि वारंट की जानकारी फोन पर दे दी गई थी, जबकि कानून के अनुसार इसकी विधिवत सूचना व्यक्तिगत रूप से दी जानी चाहिए.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने न तो अपनी स्पष्ट पहचान बताई और न ही उनकी वर्दी पर नाम-पट्टिका लगी हुई थी. ब्रिटास ने कहा कि जब इस पर सवाल उठाया गया तो पुलिसकर्मी घबरा गए और वहां से चले गए.
उन्होंने कहा, ‘सरकार यह संदेश देना चाहती है कि छात्र आंदोलन में शामिल हर व्यक्ति, खासकर उसके नेताओं को उठाया जाएगा.’
माकपा ने भी एक्स पर लिखा, ‘छात्रों की जायज चिंताओं का समाधान करने के बजाय राज्य पुलिस शक्ति का इस्तेमाल कर असहमति की आवाज को डराने, दबाने और अपराध की तरह पेश करने में लगा है.’
ब्रिटास ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि दिल्ली पुलिस बिना ऊपर से आदेश मिले माकपा कार्यालय में दाखिल नहीं हो सकती थी. पूरे देश को पता होना चाहिए कि दिल्ली पुलिस किस तरह व्यवहार कर रही है.’
माकपा द्वारा एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो में ब्रिटास पुलिस अधिकारियों से यह पूछते हुए दिखाई देते हैं कि ‘उन्हें किसी राजनीतिक दल के कार्यालय में इस तरह घुसने की हिम्मत किसने दी?’
Delhi Police forcibly entered the CPI(M) Headquarters, AKG Bhavan, in an attempt to arrest SFI leader @aishe_ghosh.
The illegal attempt was firmly resisted by CPI(M) Rajya Sabha MP @JohnBrittas, who forcefully intervened to stop the police from carrying out this unlawful action. pic.twitter.com/PMr1jgxsmn— CPI (M) (@cpimspeak) July 28, 2026
सुप्रीम कोर्ट के फैसले और बीएनएसएस का उल्लंघन करने का आरोप
बाद में एक्स पर एक अन्य पोस्ट में ब्रिटास ने आरोप लगाया कि ओइशी घोष को गिरफ्तार करने की कोशिश के दौरान दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) फैसले और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) का उल्लंघन किया.
उन्होंने कहा कि 1997 के इस फैसले में स्पष्ट किया गया था कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के पास स्पष्ट और दिखाई देने वाली पहचान तथा नाम-पट्टिका होना अनिवार्य है. बीएनएसएस की धारा 36 भी इसी सिद्धांत को दोहराती है.
