नई दिल्ली: देशभर में पेपर लीक और परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर युवाओं का आंदेलन अभी थमा ही है कि गुजरात के जामनगर स्थित आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) के तीसरे साल की परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने का कथित मामला सामने आया है, जिसके बाद विपक्षी दलों ने गुजरात की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की कड़ी आलोचना की है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यूनिवर्सिटी द्वारा प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों की जांच के आदेश दिए जाने के बाद कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि 2014 से 2024 के बीच गुजरात में 34 बार पेपर लीक हुए हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में यूनिवर्सिटी के परीक्षा प्रभारी निदेशक एचपी झाला ने बताया, ‘हमें कथित तौर पर पेपर लीक होने की शिकायत मिली है. आरोप है कि परीक्षा में पूछे गए कुछ सवाल कुछ ग्रुप्स में शेयर किए गए थे और उन्हें ‘महत्वपूर्ण सवाल’ बताया गया था. हम जांच करेंगे कि क्या कोई गड़बड़ी हुई थी और क्या ये आरोप सच हैं.’
यूनिवर्सिटी के छात्रों का आरोप है कि 20 जुलाई को हुई तीसरे साल की बीएएमएस शल्य तंत्र-I परीक्षा के पेपर में 12 में से 11 सवाल उन सवालों से मेल खाते थे जो परीक्षा से पहले वॉट्सऐप पर शेयर किए गए थे और जिन्हें ‘महत्वपूर्ण’ बताया गया था.
कांग्रेस ने इस घटना का हवाला देते हुए भाजपा पर निशाना साधा है. मालूम हो कि भाजपा पहले से ही नीट का पेपर लीक होने को लेकर देशभर के छात्रों के गुस्से का सामना कर रही है. इस मामले में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था.
गुजरात मामले को लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर लिखा, ‘एक और दिन, एक और पेपर लीक – इस बार जामनगर की गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में. यह कोई अकेली घटना नहीं है. 2014 से 2024 के बीच गुजरात में 34 पेपर लीक हो चुके हैं.’
Another day another paper leak – this time in the Gujarat Ayurveda University, Jamnagar.
This is not an exception. Gujarat has witnessed 34 paper leaks between 2014 and 2024. The GPSC Chief Officer’s Paper in 2014, Talati Paper in 2015 and 2016, the TAT -Teacher Paper, Mukhya… pic.twitter.com/QG8VJC3GWa
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 27, 2026
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि गुजरात में लीक हुए अन्य सरकारी परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों में 2014 में जीपीएससी चीफ ऑफिसर का पेपर, 2015 और 2016 में तलाटी का पेपर, 2018 में टीएटी (टीचर) पेपर, मुख्य सेविका पेपर, नायब चिटनिस पेपर और लोक रक्षक दल पेपर, 2019 में नॉन-सेक्रेटेरिएट क्लर्क परीक्षा, 2021 में हेड क्लर्क, डीजीवीसीएल विद्युत सहायक और सब-ऑडिटर परीक्षाएं, 2022 में फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा और 2023 में जूनियर क्लर्क परीक्षा शामिल हैं.
जयराम रमेश ने आगे कहा, ‘यहां तक कि 2024 की कुख्यात उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक भी अहमदाबाद से ही करवाया गया था. भाजपा के शासन में गुजरात ‘भारत में सभी पेपर लीक का केंद्र’ बन गया है. मोदी सरकार की फास्ट-ट्रैक अदालतें इस सिस्टम से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं हैं. यह ध्यान भटकाने की कोशिश है. हमें इस बात पर एक बड़ी और ईमानदार बातचीत की ज़रूरत है कि अपनी परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में सुधार कैसे किया जाए.’
इस संबंध में आम आदमी पार्टी (आप) सांसद संजय सिंह ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि देश भर में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं. इसमें भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिलीभगत है.
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां पेपर लीक होना आम बात बन गई है. उन्होंने दावा किया कि घोटाले में शामिल कंपनियों के तार सत्ता से जुड़े हैं. ये कंपनियां पीएम मोदी और भाजपा के मुख्यमंत्रियों के करीबी हैं. इसी वजह से पेपर लीक करने वाले माफियाओं पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती है.
Blacklisted कंपनियों के मालिकों के प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी से गहरे संबंध ही बार-बार होने वाले Paper Leak की वजह हैं।
— @SanjayAzadSln जी, राज्यसभा सांसद, AAP pic.twitter.com/AAPvxaStOg
— AAP (@AamAadmiParty) July 28, 2026
मालूम हो कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान ही खबर आई थी कि उत्तराखंड के देहरादून स्थित वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने पेपर लीक होने के चलते दो विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं.
एक शिकायत के बाद जांच समिति बनाई गई थी, जिसने जांच में पाया गया कि शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सहायक प्रोफेसर ने परीक्षा से पहले संस्थान के आंतरिक पोर्टल और वॉट्सऐप पर वही प्रश्न छात्रों के साथ साझा किए थे, जो बाद में परीक्षा में पूछे गए.
