देहरादून: स्कूल में विभिन्न सुविधाओं के लिए दृष्टिबाधित छात्रों ने हफ़्तेभर किया विरोध प्रदर्शन, मानी गईं मांगें

बीते साल देहरादून के जिस राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपना जन्मदिन मनाया था, उसी संस्थान के दृष्टिबाधित छात्र-छात्राएं अच्छी शिक्षा, पर्याप्त शिक्षक और किताबों जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर हफ़्तेभर से प्रदर्शन कर रहे थे. सोमवार को प्रशासन के कुछ मांगे पूरी करने और कुछ को मानने के आश्वासन के बाद विद्यार्थियों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया.

राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के छात्र प्रदर्शन करते हुए. (फोटो साभार: स्क्रीनग्रैब/ एक्स/@robinsinghchauh)

नई दिल्ली: देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी) के मॉडल स्कूल में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों ने सोमवार (10 अगस्त) को अपना सप्ताहभर लंबा प्रदर्शन खत्म कर दिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन की ओर से कई मांगें मानने और अन्य मांगों पर कार्रवाई के लिए समयसीमा तय किए जाने के बाद छात्रों ने आंदोलन वापस ले लिया है.

उल्लेखनीय है कि छात्रों का प्रदर्शन 3 अगस्त को शुरू हुआ था. बाद में छात्रों ने संस्थान के प्रशासनिक ब्लॉक में तालाबंदी कर दी, जिसके बाद आंदोलन तेज हो गया. छात्रों ने चेतावनी दी थी कि अगर सोमवार तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे.

छात्रों की प्रमुख मांगों में स्नातक के बाद मिलने वाली मेरिट आधारित छात्रवृत्ति को दोबारा शुरू करना शामिल था.

छात्रों ने कहा कि छात्रवृत्ति में बदलाव और संस्थान की छात्रवृत्ति तथा नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल के माध्यम से मिलने वाली सहायता में से किसी एक को चुनने की शर्त के कारण कुछ छात्र आर्थिक सहायता से वंचित हो गए हैं.

कक्षा 12 के एक छात्र ने अखबार को बताया कि सोमवार को छात्रों की निदेशक के साथ बैठक हुई. इस बैठक में उन्हें छात्रवृत्ति समेत लगभग सभी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया. निदेशक ने लिखित आश्वासन देने पर भी सहमति जताई.

छात्र ने कहा कि सभी लिखित आश्वासन की समीक्षा करने के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे और फिलहाल प्रदर्शन वापस ले लिया गया है.

बता दें कि देहरादून के राजपुर रोड पर स्थित यह संस्थान भारत सरकार के सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के अधीन काम करने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय संस्थान है. भारत सकार के दिव्यांग व्यक्ति अधिकार अधिनियम (आरपीडब्लूडी एक्ट) के तहत इन छात्रों को शिक्षा, थेरेपी, और सरकारी योजनाओं के विशेष आरक्षण और वित्तीय सहायता का अधिकार है.

गौरतलब है कि बीते साल 20 जून को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसी स्कूल में अपना जन्मदिन मनाया था, जहां वे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों से शुभकामना गीत सुनकर भावुक हो गई थीं.

मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन

हालिया प्रदर्शन को लेकर कक्षा 11 के एक अन्य छात्र ने बताया कि प्रशासन ने कई मांगों के लिए स्पष्ट समयसीमा भी तय की है. उन्होंने कहा कि कक्षा 11 और 12 के छात्रों को नवंबर तक, जबकि कक्षा 9 और 10 के छात्रों को जनवरी तक लैपटॉप दिए जाएंगे.

छात्र के मुताबिक, एक नए ब्रेल शिक्षक की नियुक्ति इसी सप्ताह होगी. इसके अलावा फुटबॉल ग्राउंड बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है और इसका काम 15 दिनों के भीतर शुरू होने की उम्मीद है.

इस संबंध में रविवार को कार्यभार संभालने वाले संस्थान के अंतरिम निदेशक विनोद कैन ने कहा कि छात्रों की ज्यादातर मांगें स्वीकार कर ली गई हैं.

उन्होंने बताया कि कुछ मांगें ऐसी हैं, जिन्हें संस्थान के स्तर पर मंजूरी नहीं दी जा सकती और जिनके लिए मंत्रालय के हस्तक्षेप की जरूरत है. इनमें स्थायी निदेशक की नियुक्ति और ऑडिटोरियम के निर्माण में तेजी लाने जैसी मांगें शामिल हैं. इन मांगों को दर्ज कर सामाजिक न्याय विभाग को भेज दिया गया है.

किताबों, हॉस्टल और शिक्षकों की मांग

बताया गया है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अधिक सपोर्ट स्टाफ, बेहतर शैक्षणिक और हॉस्टल सुविधाओं तथा स्थायी निदेशक की नियुक्ति की मांग भी उठाई थी. साथ ही विद्यार्थियों ने अंग्रेजी माध्यम की पाठ्यपुस्तकों की कमी, हॉस्टल मेस और स्कूल कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता तथा यूनिफॉर्म और जूते उपलब्ध कराने में देरी को लेकर भी चिंता जताई थी.

इसके अलावा छात्रों ने मोबिलिटी इंस्ट्रक्टर, महिला शारीरिक प्रशिक्षण (पीटी) प्रशिक्षक और अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की मांग की थी. उन्होंने स्थायी बॉयज हॉस्टल वार्डन, बेहतर सीसीटीवी कैमरे और सीनियर सेकेंडरी स्तर पर नए विषय शुरू करने की भी मांग रखी है.

छात्रों के मुताबिक, प्रशासन की ओर से मिले आश्वासनों के बाद फिलहाल प्रदर्शन खत्म कर दिया गया है, लेकिन वे मांगों पर होने वाली कार्रवाई की निगरानी करेंगे.