नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (11 अगस्त) को गढ़चिरौली के एक सरकारी सहायता प्राप्त आवासीय स्कूल का लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने का आदेश दिया. इस स्कूल में सांप के काटने से तीन छात्राओं की मौत हो गई थी.
यह घटना सोमवार रात को धनोरा तालुका के जपतलाई गांव में स्थित आदिवासी आवासीय स्कूल हॉस्टल में हुई. हॉस्टल में जमीन पर सो रही नाबालिग लड़कियों को एक जहरीले सांप ने काट लिया. इनमें से 8, 12 और 14 साल की तीन छात्राओं की मौत हो गई.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आश्रम शाला में घटना के समय 65 छात्राएं मौजूद थीं. सांप ने उनमें से छह छात्राओं को काट लिया. इनमें से दो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरी छात्रा ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया. चौथी छात्रा की हालत गंभीर है और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है.
सबसे नजदीकी अस्पताल 10 किलोमीटर दूर है. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बारिश के कारण पहले से खराब सड़क की स्थिति और बिगड़ गई थी, जिससे अस्पताल पहुंचने में देरी हुई.
सांप के काटने वाली छात्राओं में शामिल 12 वर्षीय दीपिका मडावी को एयरलिफ्ट कर नागपुर ले जाया गया. उसे अब सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) के बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा कक्ष (पीआईसीयू) में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, उसकी हालत स्थिर है.
घायल छात्राओं के साथ उसी हॉल में सो रही 15 अन्य छात्राएं भी सदमे में हैं और उन्हें निगरानी में रखा गया है. सांप की पहचान कॉमन क्रेट के रूप में हुई, जिसे पकड़कर मार दिया गया.
अनिल सहारे, जो 26 साल से जपतलाई स्कूल से जुड़े हैं और गणित और मराठी पढ़ाते हैं, मानते हैं कि जब यह घटना हुई, तो कोई वॉर्डन मौजूद नहीं था. सहारे ने कहा, ‘हमने उस सुबह ‘विश्व आदिवासी दिवस’ मनाया था. उसके बाद चूंकि रविवार था, इसलिए टीचिंग स्टाफ घर चला गया. मेरा घर स्कूल से लगभग 2 किलोमीटर दूर है.’
अतिरिक्त आदिवासी आयुक्त आयुषी सिंह ने अख़बार को बताया कि एक टीम ने स्कूल का दौरा किया और सुरक्षा व बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई खामियों की पहचान की है. प्रिंसिपल और पुरुष एवं महिला वॉर्डन को नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा प्रबंधन के प्रतिनिधि को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
सिंह ने कहा, ‘हमने आदिवासी विकास विभाग के स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई भी शुरू कर दी है. इन आश्रम स्कूलों के तीसरे पक्ष से ऑडिट के अलावा विदर्भ क्षेत्र के सभी सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों का सत्यापन किया जाएगा.’
उठाया गया था बिस्तरों की कमी का मुद्दा
गढ़चिरौली के कलेक्टर अविश्यंत पांडा ने कहा, ‘यह एक सरकारी सहायता प्राप्त निजी आश्रम स्कूल है, जिसे एक ट्रस्ट चलाता है. उन्होंने निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया और रात में खिड़की खुली रखी थी. माना जा रहा है कि सांप इसी खिड़की से अंदर आया. जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.’
सरकार ने मृत छात्राओं के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री राहत कोष से भी इतनी ही राशि देने की बात कही गई है.
यह स्कूल 1992 में शुरू हुआ था और वर्तमान में यहां 233 विद्यार्थी पंजीकृत हैं. बताया गया है कि यहां बच्चे जमीन पर बिछी चटाइयों पर सोते थे. अखबार के अनुसार, एक शिक्षक ने बताया कि वे प्रिंसिपल के सामने बिस्तरों की कमी का मुद्दा लगातार उठा रहे थे. उन्होंने कहा, ‘हमें बताया गया था कि छात्रों को पोल उत्सव (सितंबर) के बाद बिस्तर मिल जाएंगे.’
गढ़चिरौली के आदिवासी बहुल जपतलाई गांव में स्थित इस स्कूल में हुई मौतों के बाद व्यापक आक्रोश है. विपक्ष ने महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों की स्थिति पर सवाल उठाए हैं. वहीं, महायुति सरकार ने राज्य के 500 से अधिक ‘आश्रम’ या आदिवासी आवासीय स्कूलों के तीसरे पक्ष से ऑडिट कराने की घोषणा की है.
यह स्कूल एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है, जिसके सचिव स्थानीय कांग्रेस नेता विश्वजीत मारोतराव कोवासे हैं. सोमवार दोपहर जब गढ़चिरौली के पूर्व और वर्तमान विधायक क्रमशः अशोक नेते और मिलिंद नोरोटे आश्रम स्कूल पहुंचे, तो गांववालों ने उन्हें घेर लिया और न्याय की मांग की.
