अंडमान और निकोबार प्रशासन ने ‘ग्रीन’ एआई डेटा सेंटर बनाने का प्रस्ताव वापस लिया

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन ने निजी क्षेत्र की कंपनियों और संस्थाओं से ‘ग्रीन एआई या डेटा सेंटर वर्टिकल’ बनाने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मंगवाए थे. अब 'प्रशासनिक कारणों' का हवाला देते हुए इस प्रक्रिया को वापस ले लिया गया है.

ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित गलाथिया राष्ट्रीय उद्यान. (प्रतीकात्मक फोटो साभार: andamantourism.gov.in/VASHALE DEVI)

नई दिल्ली: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह प्रशासन ने अब निजी क्षेत्र से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ‘ग्रीन’ एआई डेटा सेंटर विकसित करने के लिए प्रस्ताव आमंत्रित करने की प्रक्रिया वापस ले ली है. प्रशासन ने इसके लिए ‘प्रशासनिक कारणों’ का हवाला दिया है.

14 अगस्त को जारी एक पत्र में आईटी सचिव का कार्यालय- यही कार्यालय था जिसने 10 अगस्त को डेटा सेंटर के लिए प्रस्ताव आमंत्रित किए थे – ने कहा कि निजी क्षेत्र के नेतृत्व में ग्रीन एआई/डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (Expression of Interest-EOI) को अब ‘प्रशासनिक कारणों से तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाता है.’

हालांकि, पत्र में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये ‘प्रशासनिक कारण’ क्या हैं.

10 अगस्त को जारी नोटिस में द्वीप प्रशासन ने निजी क्षेत्र की कंपनियों और संस्थाओं से अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार या लिटिल अंडमान में सुझाए गए स्थानों पर ‘ग्रीन एआई या डेटा सेंटर वर्टिकल’ बनाने की संभावना का पता लगाने के लिए प्राइवेट सेक्टर की संस्थाओं से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) मंगाए थे.

नोटिस में प्रस्तावित डेटा सेंटर से जुड़ी कई जानकारियां दी गई थीं. इसमें कहा गया था कि परियोजना में हाइपरस्केल और/या एआई-केंद्रित डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड कंप्यूटिंग और संप्रभु डिजिटल बुनियादी ढांचा (sovereign digital infrastructure) शामिल हो सकते हैं.

इसके अलावा इसमें नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित डेटा सेंटर, समुद्री जल आधारित या अन्य नवीन कूलिंग सिस्टम, मीठे पानी के इस्तेमाल के बिना कूलिंग की तकनीकें और अन्य सुविधाएं भी शामिल की जा सकती थीं.

ग्रेट निकोबार द्वीप पर डेटा सेंटर के लिए जिन स्थानों का प्रस्ताव दिया गया था, उनमें कैंपबेल बे सी एरिया, एंडरसन बे सी एरिया, विजय नगर बे सी एरिया और गांधी नगर बे सी एरिया शामिल थे.

ग्रेट निकोबार पहले से ही करीब 92,000 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का केंद्र है. इन परियोजनाओं में ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा, अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट कंटेनर टर्मिनल, बिजली संयंत्र, टाउनशिप और पर्यटन सुविधाएं शामिल हैं. इन परियोजनाओं के तहत द्वीप के लगभग 130.75 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पेड़ों की कटाई भी शामिल है.

विशेषज्ञों और पारिस्थितिकीविदों का अनुमान है कि इससे वर्षावन सहित करीब दस लाख पेड़ काटे जा सकते हैं.

इन परियोजनाओं को कई कारणों से व्यापक विवाद और आलोचना का सामना करना पड़ा है. इनमें प्रमुख रूप से यह सवाल उठाया गया है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इन परियोजनाओं को किस तरह पर्यावरणीय मंजूरियां दीं और परियोजनाओं के खिलाफ स्थानीय लोगों की असहमति को मंजूरी की प्रक्रिया में किस हद तक नजरअंदाज किया गया.

इन मुद्दों से संबंधित दो मामले अभी भी कलकत्ता हाईकोर्ट में विचाराधीन हैं.