नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत की विदेश यात्रा से पहले अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) के सदस्यों ने कहा है कि अमेरिकी अधिकारियों को संघ के नेताओं से मुलाकात नहीं करनी चाहिए. उन्होंने एक बार फिर आयोग के इस रुख को दोहराया कि वाशिंगटन को संघ के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए.
इस साल की शुरुआत में यूएससीआईआरएफ ने धार्मिक स्वतंत्रता के ‘गंभीर उल्लंघनों के प्रति उनकी जवाबदेही और उन्हें बर्दाश्त न करने’ के आरोप में आरएसएस को निशाना बनाते हुए प्रतिबंध और यात्रा प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.
आयोग ने लगातार सातवीं बार अमेरिकी सरकार से भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश’ (Country of Particular Concern) घोषित करने की भी अपील की थी. इस श्रेणी में उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और अन्य देश शामिल हैं.
भारत सरकार यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट्स को बार-बार ‘पक्षपाती और राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताते हुए खारिज करती रही है.
यूएससीआईआरएफ अमेरिकी सरकार की विधायी शाखा से जुड़ी एक स्वतंत्र और द्विदलीय एजेंसी है, जो विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी करती है और वाशिंगटन को नीतिगत सिफारिशें देती है. वर्तमान में इसकी अध्यक्षता पल्मोनोलॉजिस्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता आसिफ महमूद कर रहे हैं.
महमूद ने बुधवार रात (19 अगस्त) जारी एक बयान में कहा कि भागवत ऐसे समय अमेरिका का दौरा करने वाले हैं, जब आरएसएस के सहयोगी संगठनों ने ‘धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और मुस्लिम शामिल हैं, पर हमले किए हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबंध संघ से है.
महमूद ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य हैं. यह एक भारतीय छत्र संगठन है, जिसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों, जिनमें ईसाई और मुस्लिम भी शामिल हैं, पर हमले किए हैं. अब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका आने की योजना बना रहे हैं.’
Cmmr @Gene_Mills: “RSS leaders, even when affiliated with the Indian gov’t, should not be honored with high-level meetings or diplomatic courtesies. Instead, the USG should focus on imposing sanctions on RSS members found responsible for FoRB violations.” https://t.co/q5XuXTKsgF
— USCIRF (@USCIRF) August 19, 2026
यूएससीआईआरएफ के आयुक्त जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों को आरएसएस नेताओं को, भले ही उनका संबंध भारत सरकार से हो, उच्चस्तरीय बैठकों और राजनयिक शिष्टाचार के जरिए सम्मान नहीं देना चाहिए. इसके बजाय उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को ‘धार्मिक स्वतंत्रता और आस्था (FoRB—Freedom of Religion and Belief) के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार पाए गए आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देना चाहिए.’
इससे एक दिन पहले यूएससीआईआरएफ की पूर्व अध्यक्ष नादिन मेन्ज़ा ने भी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाए जाने के विचार का समर्थन किया था. उन्होंने भागवत से अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान आयोग के आयुक्तों से मुलाकात करने का आग्रह किया, ताकि वे ‘उनके द्वारा दर्ज किए गए तथ्यों को सीधे सुनें और समर्थकों से घिरे किसी मंच से जवाब देने के बजाय उसी कमरे में उसका जवाब दें.’
19 अगस्त को ‘प्रोविडेंस’ पत्रिका में लिखते हुए उन्होंने संघ को ‘ऐसा संगठन बताया, जिसका आचरण धार्मिक उत्पीड़न के उस स्तर तक पहुंच जाता है जिस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.’
तीन महीने पहले आयोग ने वॉशिंगटन डीसी में ‘भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की बिगड़ती स्थिति’ पर एक सुनवाई की थी. आयोग के अनुसार, इसमें गवाहों ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों को संभव बनाने वाली कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक संरचनाओं की जांच की. इनमें धर्मांतरण विरोधी कानूनों, नागरिकता संबंधी कानूनों और धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ लक्षित हिंसा का इस्तेमाल भी शामिल था.
मार्च में आयोग ने 2025 की अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की थी और आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की सिफारिश की थी. आयोग ने इन संगठनों को ‘धार्मिक स्वतंत्रता के गंभीर उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार’ बताया था.
इससे चार महीने पहले आयोग ने कहा था कि आरएसएस और भाजपा के बीच बीच ‘आपसी जुड़ाव’ की वजह से ‘कई भेदभावपूर्ण कानून बने और लागू हुए हैं, जिनमें नागरिकता, धर्म-परिवर्तन विरोधी और गो-हत्या विरोधी कानून शामिल हैं.’
तब भारत ने यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि यह संगठन लगातार देश की ‘गलत और चुनिंदा’ तस्वीर पेश करता है, जो ‘संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव’ पर आधारित होती है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि वास्तव में यूएससीआईआरएफ को अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हो रही तोड़फोड़ और हमलों, भारत को चुनिंदा रूप से निशाना बनाने तथा अमेरिका में भारतीय समुदाय के सदस्यों के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने पर ध्यान देना चाहिए.
भागवत की 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा प्रस्तावित है. उनकी यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब संघ अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है. भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एएचईएडी) द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ में हिस्सा लेने वाले हैं.
