परिसीमन विधेयक: मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, विशेष सत्र बुलाने का विरोध

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक को फिर से जबरन थोपने की कोशिश न करें. उन्होंने यह पत्र संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान के बाद लिखा है, जिसमें उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में इस संभावना से इनकार नहीं किया था कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है.

अमेरिकी टैरिफ़ के संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा है. (फोटो साभार: ट्विटर/@INCRajasthan)

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार (27 अगस्त) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि केंद्र सरकार को परिसीमन विधेयक को फिर से ‘जबरन पारित’ कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, जैसा कि उसने अप्रैल में विशेष सत्र बुलाकर करने का प्रयास किया था.

खरगे ने मोदी को यह पत्र केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के एक दिन पहले दिए गए उस बयान के बाद लिखा है, जिसमें उन्होंने टेलीविजन चैनल इंडिया टुडे को दिए साक्षात्कार में इस संभावना से इनकार नहीं किया था कि संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है.

खरगे ने कहा कि रिजिजू की बातों से शायद यह पता चलता है कि मानसून सत्र के पहले ही खत्म हो जाने के बावजूद उसे अभी तक औपचारिक रूप से समाप्त क्यों नहीं किया गया है.

 

कांग्रेस अध्यक्ष ने इससे पहले 16 जुलाई को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने परिसीमन को लेकर सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने और किसी भी विशेष सत्र से पहले सभी राजनीतिक दलों को इन प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय देने का आग्रह किया था.

खरगे ने अपने इस पत्र में लिखा, ‘केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री द्वारा दिए गए संकेत के अनुसार आगे बढ़ने से पहले मैं आपसे अपने पहले किए गए अनुरोध को दोहराना चाहता हूं कि आप परिसीमन से संबंधित जो भी प्रस्ताव आपके मन में हैं, उन पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं. सभी राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को ऐसे प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दें.’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह ऐसा मुद्दा है जिसका देश के लिए बहुत व्यापक महत्व है. कृपया 16 और 17 अप्रैल, 2026 को जिस तरह आपने ऐसा करने का प्रयास किया था, उसी तरह दोबारा इसे जबरन थोपने की कोशिश न करें.’

17 अप्रैल को मोदी सरकार 12 वर्षों में पहली बार संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने में विफल रही थी. एकजुट विपक्ष ने उस प्रस्तावित कानून को रोक दिया था, जिसका मकसद महिलाओं के आरक्षण को ‘लागू’ करने के लिए लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना था.

गुरुवार को लिखे अपने पत्र में खरगे ने कहा कि बुधवार को टेलीविजन साक्षात्कार में रिजिजू की परिसीमन संबंधी टिप्पणियां ‘शायद खुद मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने में हो रही देरी को स्पष्ट करती हैं.’

खरगे ने कहा कि परिसीमन को लेकर कांग्रेस का रुख स्पष्ट है पार्टी का मानना है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रहनी चाहिए. इसके साथ ही लोकसभा में राज्यों के लिए मौजूदा सीटों का अनुपात भी जारी रहना चाहिए. वहीं, महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण की व्यवस्था 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू की जानी चाहिए.

इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), शिवसेना (यूबीटी) और आम आदमी पार्टी (आप) में हुए दलबदल की एक श्रृंखला के बाद ऐसी अटकलें थीं कि सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश करने का प्रयास कर सकती है. हालांकि, मानसून सत्र में सरकार उस समय दबाव में दिखाई दी, जब विपक्ष ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगते हुए दबाव बढ़ाया.

सत्र के अंत तक सरकार अपने विवादित विधेयकों में से कोई भी विधेयक सदन में नहीं ला सकी. वहीं, लगातार बढ़ते सार्वजनिक दबाव के बीच पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दोनों ही पूरे सत्र के दौरान अनुपस्थित रहे.