दिल्ली में अवामी लीग से जुड़े वक्ताओं वाला एफसीसी का कार्यक्रम पुलिस हस्तक्षेप के बाद रद्द

दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब में यूरोप-एशिया संबंधों पर आयोजित होने वाला सेमिनार आखिरी समय में रद्द कर दिया गया. आयोजकों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ऐसा हुआ. हालांकि, पुलिस ने हस्तक्षेप से इनकार किया है. कार्यक्रम में अवामी लीग से जुड़े सलीम महमूद समेत कई वक्ता शामिल होने वाले थे.

रद्द किए गए कार्यक्रम का निमंत्रण. (फोटो: फेसबुक/mahmud.315)

नई दिल्ली: दक्षिण एशिया के विदेशी संवाददाताओं के क्लब (फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (एफसीसी)) में शनिवार (29 अगस्त) को यूरोप-एशिया संबंधों पर आयोजित होने वाला एक सेमिनार आखिरी समय में रद्द कर दिया गया. इस कार्यक्रम में अवामी लीग से जुड़े वक्ता शामिल होने वाले थे. दिल्ली पुलिस के हस्तक्षेप और आयोजकों से कार्यक्रम आगे न बढ़ाने को कहने के बाद इसे रद्द किया गया. पुलिस ने कार्यक्रम को लेकर ‘कुछ विवादों’ का हवाला दिया.

‘यूरोप एंड एशिया: फ्रॉम डायलॉग टू अ पार्टनरशिप एंड प्रॉस्पेरिटी’ शीर्षक वाला यह कार्यक्रम शनिवार शाम आयोजित होना था. इसका आयोजन एफसीसी ने बेल्जियम स्थित हैंड इन हैंड फाउंडेशन और अन्य सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर किया था.

शनिवार शाम जारी एक बयान में आयोजकों ने कहा कि दिल्ली पुलिस के ‘अस्पष्ट हस्तक्षेप’ के कारण क्लब ‘निर्धारित कार्यक्रम आयोजित करने में असमर्थ रहा.’ बयान में कहा गया, ‘आयोजकों को इस फैसले की जानकारी ऐन वक्त पर दी गई. यह फैसला आयोजकों और एफसीसी साउथ एशिया के नियंत्रण से बाहर था.’

कार्यक्रम में शामिल होने वाले वक्ताओं में बांग्लादेश में भारत की पूर्व राजदूत वीना सीकरी, ढाका में जर्मनी के पूर्व राजदूत पीटर फारेनहोल्ट्ज़ और बांग्लादेशी-अमेरिकी वैज्ञानिक तथा 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के पूर्व योद्धा नूरान नबी शामिल थे. वक्ताओं की सूची में चेक राजनेता और यूरोपीय संसद के सदस्य ओंद्रेज़ दोस्ताल भी शामिल थे, जिन्होंने शुक्रवार को विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज से मुलाकात की थी.

इनके अलावा वक्ताओं में सलीम महमूद का नाम भी था. वह बांग्लादेश अवामी लीग के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी और चांदपुर-1 से जनवरी 2024 से अगस्त 2024 तक जातीय संसद के सदस्य रहे हैं. अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिर गई थी.

एफसीसी के अध्यक्ष वाएल अव्वाद और हैंड इन हैंड फाउंडेशन की ओर से संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा गया, ‘आयोजक यूरोप-एशिया संबंधों, शांति, समृद्धि, सतत विकास, मानवाधिकारों और रचनात्मक अंतरराष्ट्रीय संवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमें उम्मीद है कि भविष्य में उचित समय पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसकी आगे की जानकारी उचित समय पर साझा की जाएगी.’

हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है.

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने द प्रिंट से कहा कि एफसीसी को पैनल चर्चा आयोजित करने के लिए पुलिस की अनुमति लेने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘हमने उनके किसी भी कार्यक्रम में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है.’

हालांकि, द वायर के पास मौजूद एक दस्तावेज़ से पता चलता है कि तिलक मार्ग थाने ने एफसीसी को बताया था कि कार्यक्रम आयोजित करने की ‘अनुमति नहीं’ है.

29 अगस्त को लिखे गए एफसीसी के पत्र में तिलक मार्ग थाने के थाना प्रभारी (एसएचओ) को बताया गया था कि क्लब, हैंड इन हैंड फाउंडेशन के साथ मिलकर शाम 6 बजे से रात 8 बजे तक एक ‘सेमिनार-सह-प्रेस कॉन्फ्रेंस’ आयोजित कर रहा है. पत्र में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती का अनुरोध किया गया था.

यह पत्र हाथ से लिखी गई एक टिप्पणी के साथ वापस कर दिया गया. इसमें लिखा था:

टिप्पणी के साथ वापस किया जा रहा है कि मिली जानकारी के अनुसार, कुछ विवादों के कारण इस कार्यक्रम की अनुमति नहीं है.

पत्र पर तिलक मार्ग थाने की मुहर लगी हुई थी और ऐसा प्रतीत होता है कि उस पर थाना प्रभारी (एसएचओ) के हस्ताक्षर हैं.

यह हस्तक्षेप असामान्य है, क्योंकि इस सेमिनार को बांग्लादेश पर केंद्रित कार्यक्रम के तौर पर आयोजित नहीं किया गया था. एफसीसी के पदाधिकारियों ने भी कहा है कि उन्हें याद नहीं है कि पुलिस ने इतने कम समय के नोटिस पर किसी कार्यक्रम को रोकने के लिए कभी हस्तक्षेप किया हो.

हैंड इन हैंड फाउंडेशन के महासचिव ए.एफ.एम. गोलाम जिलानी भी इस कार्यक्रम में वक्ता के तौर पर शामिल होने वाले थे, लेकिन उनका वीज़ा जारी नहीं होने के कारण वे भारत की यात्रा नहीं कर सके.

शनिवार रात द वायर से बात करते हुए जिलानी ने कहा कि उनका वीज़ा अभी प्रक्रिया में है और उन्हें इसमें कुछ भी असामान्य नहीं लगता. उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह एक प्रक्रिया है. मैं भारतीय प्रक्रिया का बहुत सम्मान करता हूं और उसकी कद्र करता हूं. इसलिए, मुझे लगता है कि वीज़ा जारी करने से पहले उनकी जांच करने का अधिकार है.’

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि एफसीसी के कार्यक्रम को क्यों रोका गया. उन्होंने कहा, ‘अगर आप पुलिस अधिकारियों से पूछेंगे, तो वे सही जवाब देंगे. हमारे पास इसके अलावा कोई और जानकारी नहीं है.’

जिलानी ने इस सुझाव को भी खारिज कर दिया कि कार्यक्रम रद्द किए जाने का संबंध बांग्लादेश से हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘यह बांग्लादेश या भारत का मुद्दा नहीं है. यह यूरोप-एशिया संबंधों से जुड़ा है.’

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका संगठन अवामी लीग के साथ जुड़ा हुआ है, तो उन्होंने इससे स्पष्ट रूप से इनकार किया. उन्होंने कहा, ‘नहीं, नहीं. यह गलत धारणा है. इसलिए, इसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है.’ उन्होंने अपने संगठन के बारे में कहा कि यह ‘न तो राजनीतिक संगठन है और न ही किसी राजनीतिक दल से संबद्ध है. लेकिन हम मानवाधिकार, सतत विकास और शिक्षा के लिए काम करते हैं.’

हालांकि, ऐसे दस्तावेज़ मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि इस फाउंडेशन ने अवामी लीग के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए हैं.

साउथ एशिया डेमोक्रेटिक फोरम की 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संसद में रोहिंग्या संकट पर आयोजित एक सम्मेलन का संयुक्त रूप से आयोजन सोशलिस्ट्स एंड डेमोक्रेट्स ग्रुप, बेल्जियम अवामी लीग और हैंड इन हैंड फाउंडेशन ने किया था. रिपोर्ट में जिलानी को फाउंडेशन के प्रतिनिधि के तौर पर बताया गया था.

इस साल जुलाई में अवामी लीग की यूरोपीय इकाई ने बताया कि दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक बदलाव, मानवाधिकार और भू-राजनीति पर यूरोपीय संसद में एक सेमिनार आयोजित किया गया था. इसका आयोजन हैंड इन हैंड फाउंडेशन की पहल पर हुआ था और इसमें यूरोपीय अवामी लीग के अध्यक्ष, महासचिव और अन्य प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जिलानी ने फाउंडेशन के महासचिव के तौर पर इस कार्यक्रम में भाग लिया था.

पुलिस का यह हस्तक्षेप उस घटना के चार सप्ताह से भी कम समय बाद हुआ है, जब एफसीसी ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मेजबानी की थी. अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद यह उनकी पहली मीडिया बातचीत थी.

5 अगस्त को हसीना ने भारत से ऑडियो लिंक के जरिए एफसीसी में पत्रकारों से बात की थी. यह उनके सत्ता से हटाए जाने की दूसरी बरसी के मौके पर आयोजित किया गया था.

इस कार्यक्रम के बाद ढाका ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि वह इस बात से ‘बेहद नाराज़’ है कि हसीना को भारतीय राजधानी में मीडिया से बातचीत के लिए मंच दिया गया. नई दिल्ली ने कहा कि यह कार्यक्रम निजी तौर पर आयोजित किया गया था और भारत सरकार ने ‘विधिवत गठित सरकार’ को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री की टिप्पणियों का समर्थन नहीं किया था.

इस घटना से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की तैयारियां भी जटिल हो गईं.

इसके बाद ढाका ने कहा कि नई दिल्ली में हसीना के कार्यक्रम से रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा के लिए माहौल ‘खराब हो गया’ है और ‘इस यात्रा के लिए अनुकूल माहौल बनाया जाना जरूरी है.’