नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित उत्तराखंड के हल्द्वानी में पुलिस ने रविवार (30 अगस्त) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एफआआईआर दर्ज की.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी के खिलाफ यह एफआईआर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा एक दिन पहले उस ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान की निंदा किए जाने के बाद दर्ज की गई है, जो इस महीने की शुरुआत में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई जनसभा को संबोधित करने के बाद मंच पर किया गया था.
गांधी ने इस घटना को अपराध बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी.
हल्द्वानी के नगर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कात्याल के मुताबिक, गांधी के खिलाफ एफआईआर हल्द्वानी की जवाहर नगर कॉलोनी निवासी अमित कुमार की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई.
26 वर्षीय कुमार ने अपनी शिकायत में दावा किया कि वह वाल्मीकि समुदाय से हैं और उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय के अन्य सदस्यों के साथ 11 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित ‘स्वच्छता अभियान और धार्मिक अनुष्ठान’ में हिस्सा लिया था. उनका दावा था कि इस आयोजन का किसी व्यक्ति या जाति से कोई संबंध नहीं था.
कुमार ने अपनी शिकायत में कहा, ‘इसके बावजूद राहुल गांधी ने 29 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना किसी सत्यापन के इसे ‘छुआछूत’ से जुड़ा कृत्य और अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराध बताया और उस अनुष्ठान में शामिल लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की.’
उन्होंने कहा कि वह खुद वाल्मीकि समुदाय से हैं, लेकिन उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया गया है जो छुआछूत को बढ़ावा देता है और दलित विरोधी है. कुमार ने आरोप लगाया कि गांधी के आरोपों के बाद विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी और तनाव बढ़ गया है.
कुमार की शिकायत के आधार पर गांधी के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 (धर्म, नस्ल के आधार पर अलग-अलग समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के खिलाफ काम करना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा बीएनएस की धारा 299 (किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करके उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण काम करना) के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
इसके साथ ही एससी/एसटी अधिनियम की धारा 3(1)(Q) भी लगाई गई है. यह धारा किसी सरकारी कर्मचारी को झूठी या बेबुनियाद जानकारी देने से संबंधित है, जिससे वह कर्मचारी अपनी शक्ति का इस्तेमाल करके अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को नुकसान पहुंचाए या परेशान करे.
इससे पहले शनिवार (29 अगस्त) को हल्द्वानी में हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का हवाला देते हुए गांधी ने भाजपा पर छुआछूत का पालन करने का आरोप लगाया था. गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना चाहिए और यह घटना दिखाती है कि भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मानसिकता दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहती.
गांधी ने कहा था, ‘जब हमारे राजस्थान सीएलपी (कांग्रेस विधायक दल) के नेता टीकाराम जूली किसी मंदिर में जाते हैं तो भाजपा नेता शुद्धिकरण अनुष्ठान करते हैं. जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन देश को समर्पित किया है और जो मंत्री भी रहे हैं, हल्द्वानी के रामलीला मैदान में भाषण देने जाते हैं तो वहां शुद्धिकरण किया जाता है. जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी किसी मंदिर में जाते हैं तो वहां भी शुद्धिकरण किया जाता है. यह भाजपा-आरएसएस के लोग करते हैं और भारत के संविधान के अनुसार यह अपराध है.’
‘जातिवादी सोच के खिलाफ लड़ाई पूरी ताकत से जारी रहेगी’
इस बीच, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को भाजपा पर निशाना साधा.
पार्टी ने कहा कि वह लोकतांत्रिक और कानूनी तरीकों से एफआईआर का जवाब देगी और जोर देकर कहा कि इस घटना के पीछे की जातिवादी सोच के खिलाफ लड़ाई पूरी ताकत से जारी रहेगी.
उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने सवाल उठाया कि कथित तौर पर शुद्धिकरण अनुष्ठान करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई, जबकि इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई.
शैलजा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी की जनसभा के बाद ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं, लेकिन उस जातिवादी कृत्य के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी के खिलाफ एफआईआर. यही भाजपा सरकार का न्याय है?’
उन्होंने आरोप लगाया कि शुद्धिकरण अनुष्ठान किए जाने के बाद उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष ने खुले तौर पर इसका बचाव किया था. शैलजा ने कहा, ‘अब श्री राहुल गांधी जी ने दोषियों पर कानून के तहत कार्रवाई की मांग की तो उत्तराखंड की भाजपा सरकार में उलटे उन्हीं पर मुकदमा दर्ज हो गया. यह संयोग नहीं, भाजपा आरएसएस की दलित विरोधी और संविधान विरोधी सोच का बेहद गंभीर उदाहरण है. राहुल गांधी जी ने वही सवाल उठाया जिसे कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी स्वयं संसद में उठा चुके हैं कि ‘शुद्धिकरण’ के इस कृत्य ने उन्हें छुआछूत का एहसास कराया और उनका अपमान किया.’
उल्लेखनीय है कि यह मामला तब सामने आया जब खरगे ने 13 अगस्त को भाजपा पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान कर उनका अपमान करने का आरोप लगाया.
मानसून सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा में खरगे ने कहा था, ‘मैं इसे कभी राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता. मैं कई वर्षों से संसद में हूं. अभी मैं यहां (राज्यसभा में) हूं और इससे पहले लोकसभा में था. मैंने कभी सहानुभूति हासिल करने की कोशिश नहीं की. मैंने कभी यह कहकर मदद या सुरक्षा नहीं मांगी कि मैं अनुसूचित जाति से हूं, मैं दलित हूं.’
उन्होंने कहा था, ‘मेरे अंदर लड़ने की ताकत है. मैं लड़ता भी हूं. हल्द्वानी के रामलीला मैदान में लाखों लोग मौजूद थे. उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया था; मैंने केवल सरकार के मुद्दों को दोहराया था. लेकिन मेरे भाषण के बाद आपने (भारतीय जनता पार्टी से जुड़े लोगों ने) हल्द्वानी में मंच पर शुद्धिकरण अनुष्ठान करके मेरा अपमान करने की कोशिश की. मुझे छुआछूत का एहसास कराया. क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता (राज्यसभा) हूं.’
उस समय नड्डा ने संसद में खरगे की बात का जवाब देते हुए कहा था कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
भाजपा ने किया था बचाव
वहीं, उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने इस ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान का बचाव किया था.
भट्ट ने कहा था, ‘जिन लोगों के पास कोई वास्तविक मुद्दा नहीं होता, वे ही ऐसे मामलों को उठाते हैं जो समाज को नुकसान पहुंचाते और बांटते हैं. खरगे जी की रैली हल्द्वानी में हुई थी. वहां का रामलीला मैदान अपवित्र कर दिया गया. जिस स्थान पर राम मंदिर है, वहां ऐसे नारे लगाए गए जिन्हें नहीं लगाया जाना चाहिए था. वह स्थान प्रदूषित हो गया था और फिर उसका शुद्धिकरण किया गया.’
राज्यसभा सांसद भट्ट ने आगे कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल की ‘पवित्रता’ का सभी को सम्मान करना चाहिए.
