नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मणिपुर के लगभग 6.3% और सिक्किम के 11% से अधिक मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से हटा दिए गए हैं. दोनों राज्यों की अंतिम मतदाता सूचियां रविवार (6 सितंबर) को प्रकाशित की गईं.
दोनों राज्यों को मिलाकर यह संख्या 1.86 लाख से अधिक मतदाताओं की है. इनमें मणिपुर के 1,32,456 और सिक्किम के 54,209 मतदाताओं के नाम शामिल हैं. एसआईआर से पहले मणिपुर में 20,93,076 पात्र मतदाता थे, जबकि सिक्किम में 4,71,018 मतदाता थे.
मणिपुर में हटाए गए नाम
मणिपुर की मतदाता सूची में पुरुष मतदाताओं (9,53,350) की तुलना में महिला मतदाताओं (10,06,962) की संख्या अधिक है. राज्य में 308 थर्ड जेंडर मतदाता भी हैं.
5 जुलाई को प्रकाशित प्रारंभिक मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) में 19,34,399 मतदाता थे.
द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि के दौरान दाखिल किए गए कुल 96,985 दावों और आपत्तियों का अंतिम सूची तैयार करने के लिए निपटारा किया गया.
इससे पहले कुकी-जो समुदायों ने आशंका जताई थी कि एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान आदिवासी समुदायों के मतदाताओं के नाम बड़ी संख्या में हटाए जा सकते हैं. यह आशंका इसलिए भी व्यक्त की गई थी क्योंकि 3 मई 2023 को जातीय हिंसा शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं. हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार दोनों ने ऐसी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की थी.
अंतिम मतदाता सूची से हटाए गए नामों में से कितने कुकी-जो समुदायों के मतदाताओं के थे, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय ने कहा, ‘कुल 56,871 मतदाताओं को शामिल किया गया है और प्रारंभिक मतदाता सूची से कुल 30,650 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.’
सीईओ के अनुसार, प्रारंभिक मतदाता सूची से जिन 1,58,677 मतदाताओं के नाम हटाए गए थे, उनमें 72,473 को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके, 43,000 को मृत, 34,740 को अनुपस्थित, 7,394 को दोहरी/डुप्लिकेट प्रविष्टियां और 1,070 को ‘अन्य’ श्रेणी में चिन्हित किया गया था.
सिक्किम की मतदाता सूची में ‘तार्किक गड़बड़ियां’
इस बीच, सिक्किम में जुलाई में जारी प्रारंभिक मतदाता सूची में 4,33,294 मतदाता थे. इनमें से 3,61,159 यानी 83.35% मतदाताओं का मिलान पिछली पात्रता वाली मतदाता सूची या पिछले एसआईआर में उनके खुद व उनके माता-पिता के मतदाता संबंधी विवरण से किया गया.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, बाकी 72,135 मतदाताओं (16.65%) का ऐसा मिलान नहीं हो सका. मिलान किए गए मतदाताओं में चुनाव आयोग ने 52,384 के मामलों में ‘तार्किक विसंगतियां’ (logical discrepancies) पाईं.
गंगटोक स्थित सिक्किम के सीईओ कार्यालय ने कथित तौर पर कहा, ‘कुल 1,24,519 मतदाताओं- जिनमें बिना मिलान वाली और तार्किक विसंगति वाली श्रेणियों के मतदाता शामिल थे- को सुनवाई के लिए उपस्थित होने और अपनी पात्रता साबित करने के नोटिस जारी किए गए. सुनवाई और सत्यापन के बाद 16,485 मतदाता अपात्र पाए गए.’
इसके अलावा, 324 मतदाताओं के नाम फॉर्म 7 के जरिए हटाए गए. इनमें मृत्यु और दिए गए पते से दूसरी जगह चले जाने जैसे आधार शामिल थे. दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या 16,809 रही.
इसके बाद 1,982 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए गए, जिसके परिणामस्वरूप अंतिम सूची में कुल मतदाताओं की संख्या 4,18,467 हो गई.
इनमें 2,12,534 पुरुष मतदाता, 2,05,931 महिला मतदाता और थर्ड जेंडर के दो मतदाता शामिल हैं.
