मंदसौर गोलीकांड: राज्य सरकार ने निलंबित कलेक्टर और एसपी को किया बहाल

मध्य प्रदेश के मंदसौर में पिछले साल छह जून को पुलिस फायरिंग में पांच किसान मारे गए थे. पिछले दिनों पेश न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को क्लीनचिट दी थी.

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पिपलियामंडी में हिंसा के बाद का एक दृश्य. (फोटो: पीटीआई)

मध्य प्रदेश के मंदसौर में पिछले साल छह जून को पुलिस फायरिंग में पांच किसान मारे गए थे. पिछले दिनों पेश न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों को क्लीनचिट दी थी.

पिपलियामंडी में हिंसा के बाद का एक दृश्य. (फोटो: पीटीआई)
मंदसौर की पिपलियामंडी में हिंसा के बाद का एक दृश्य. (फोटो: पीटीआई)

मंदसौर: मध्य प्रदेश के मंदसौर में बीते वर्ष 6 जून को किसान आंदोलन के दौरान हुए गोलीकांड के मामले में निलंबित किए गए तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अक्षीक्षक को राज्य सरकार से बहाली की अनुमति मिल गई है.

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, गोलीकांड के बाद निलंबित किए गए तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक ओपी त्रिपाठी और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक साई कृष्ण थोटा शुक्रवार को राज्य सरकार द्वारा बहाल कर दिए गए हैं.

पुलिस अफसरों को पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना दी गई है, जबकि कलेक्टर को मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया है.

पत्रिका के मुताबिक, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बहाली की फाइल को मंजूरी दी है.

हालांकि, राज्य के विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बहाली पर सवाल उठाए हैं. पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा है कि जब आयोग की रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर पेश नहीं हुई है तो अफसरों की बहाली कैसे कर दी गई?

उन्होंने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री जनता को बताएं कि क्यों की गई बहाली?’

गौरतलब है कि मंदसौर में 6 जून 2017 को किसान आंदोलन के दौरान पुलिस की फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी. जिसके बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए तत्कालीन कलेक्टर, एसपी और सीएसपी को निलंबित कर दिया था.

गोलीकांड की जांच के लिए सेवानिवृत्त जज जेके जैन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया गया था.

जेके जैन आयोग ने पिछले दिनों अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है. रिपोर्ट में आयोग ने संबंधित अधिकारियों को सीधे दोषी न मानते हुए मामले में क्लीनचिट दी है.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि गोली चलाना परिस्थितियों के मुताबिक आवश्यक  और न्यायसंगत था.

गौरतलब है कि पिछले दिनों मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस रिपोर्ट को पटल पर रखा जाना था, जिस पर चर्चा होनी थी. लेकिन, दो दिन में ही खत्म कर दिए गए सत्र में यह संभव नहीं हो सका.