नॉर्थ ईस्ट डायरी: मिज़ोरम के मुख्यमंत्री समेत 9 उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ दर्ज हैं आपराधिक मामले

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मिज़ोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर और असम के प्रमुख समाचार.

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इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मिज़ोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, मणिपुर और असम के प्रमुख समाचार.

Lathanhawla Photo Sangeeta Ji The Wire
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालथन हावला (फोटो: संगीता बरुआ पिशारोती/द वायर)

आइजोल: मिज़ोरम में विधानसभा चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री लालथन हावला समेत 9 उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं. दो सिविल सोसाइटी संगठनों की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है.

मिज़ोरम इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के मुताबिक मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जोरामथंगा के खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज हैं. ये जानकारी उम्मीदवारों के चुनाव आयोग में दिए गए हलफनामे पर आधारित है.

आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अन्य प्रत्याशियों में निर्दलीय उम्मीदवार वी. मालस्वमत्लुआंगा, भाजपा के वी ज़हाव्मा चॉन्गथु, लालदुहपुई, एमएनएफ के रसिक मोहन चकमा और आर लालथंगलिआना और कांग्रेस के जेम्स थांगमिंगमाविआ हैं.

विधानसभा चुनाव में उतरे कुल 9 उम्मीदवार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं.जिनमें से 4 उम्मीदवारों के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं.

कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट राज्य की सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं जबकि मिज़ोरम में खाता खोलने की उम्मीद लगाए बैठी भाजपा 39 सीटों पर मैदान में है. राज्य में 28 नवंबर को मतदान होना है.

मामित जिले में मतदान करेंगे त्रिपुरा में रहने वाले ब्रू

उत्तरी त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे ब्रू समुदाय के मतदाता मिज़ोरम विधानसभा चुनाव के दौरान राज्य के मामित जिले स्थित कन्हमूं गांव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. निर्वाचन आयोग (ईसी) ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.

मिज़ोरम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) आशीष कुंद्रा ने कहा कि ईसी ने बुधवार को इस संबंध में फैसला किया. खेल के एक मैदान में उनके लिये 15 मतदान केंद्र बनाये गये हैं. छह मतदान केंद्र स्टेडियम के अंदर हैं.

सीईओ ने कहा कि छह अधिकारियों को वहां तैनात किया गया है. उन्होंने बताया कि सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट और बूथ स्तर के अधिकारी शुक्रवार सुबह तक मतदान परिसर में पहुंच जायेंगे. उन्होंने बताया कि इलाके में कड़े सुरक्षा इंतजाम किये गये हैं.

सीईओ ने कहा कि गांव के नेताओं और नागरिक समाज ने संकल्प व्यक्त किया कि मतदान केंद्रों पर ब्रू समुदाय के लोगों का स्वागत भोजन और पेय पदार्थों से किया जायेगा.

निर्वाचन अधिकारियों ने कहा कि उत्तरी त्रिपुरा में छह राहत शिविरों में कुल 12,037 ब्रू मतदाता रह रहे हैं. 1997 में जातीय संघर्ष के बाद ब्रू समुदाय के लोग मिज़ोरम से पलायन कर गये थे.

ज्ञात हो कि बीते दिनों 11,232 ब्रू मतदाताओं के लिए मतदान का स्थान तय किया जाना सबसे विवादास्पद विषय बन गया था. इस मुद्दे को लेकर चुनाव से दो हफ्ते से भी कम समय पहले मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) एसबी शशांक को पद से हटाया गया था.

शशांक ने त्रिपुरा के राहत शिविरों में ब्रू मतदाताओं के लिए कथित तौर पर मतदान की व्यवस्था की थी. सीईओ कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘चुनाव आयोग ने हमे सूचना दी है कि ब्रू के लिए मिज़ोरम क्षेत्र मामित के अंदर कन्हमूं गांव में मतदान कराये जाने का अवश्य प्रबंध किया जाए. हमने इसके लिए अपनी तैयारियां शुरू कर दी है.’

गौरतलब है कि कन्हमूं मिज़ोरम और त्रिपुरा के बीच सीमा पर स्थित एक गांव है.

भाजपा का घोषणा पत्र, मिजो भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ा जाएगा

भाजपा ने मंगलवार को मिज़ोरम विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र अपना घोषणापत्र जारी किया और वादा किया कि प्रदेश की राजकीय भाषा मिजो को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाएगा.

पार्टी ने सरकार बनने पर एक रुपये प्रति किलोग्राम चावल, प्रत्येक बेघर परिवार को मकान और तीन साल के भीतर यातायात की समस्या से मुक्त आइजोल देने का तथा अगले छह महीने में हर मौसम में इस्तेमाल वाली गड्ढे मुक्त सड़कें देने का वादा किया.

भाजपा महासचिव राम माधव ने यहां आइजोल में घोषणापत्र जारी किया. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को इसे जारी करना था लेकिन वह आ नहीं सके.

भाजपा ने मिज़ोरम में अगले पांच साल में 50 हजार नौकरियां सृजित करने, दो मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, तीन इंजीनियरिंग कॉलेज का निर्माण करने और कई नर्सिंग प्रशिक्षण संस्थान शुरू करने का भी वादा किया है.

इससे पहले 16 नवंबर को चुनाव प्रचार के लिए सिआहा पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य में सड़कों की मरम्मत, जनजातीय परिषदों को ज्यादा शक्ति देने का वादा किया था.

Rajnath Singh In Mizoram Twitter BJP
सिआहा (मिज़ोरम) में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (फोटो साभार: ट्विटर/@BJP4Mizoram)

राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कांग्रेस सरकार पर मिज़ोरम के विकास के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अगर सत्ता में आती है तो वह छह महीने के भीतर राज्य के सड़कों के बुनियादी ढांचे का उन्नयन कर देगी.

चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन में पूर्वोत्तर राज्य की सड़कों की हालत बद से बदतर हो गई है.

सिंह ने कहा, भाजपा अगर सत्ता में आती है तो वह राजमार्गों का निर्माण करेगी और छह महीने के भीतर सड़कों की मरम्मत करेगी. कांग्रेस के एक दशक के शासन के बाद भी राज्य में शायद देश की सड़कों का सबसे खराब बुनियादी ढांचा है.

उन्होंने इसपर भी बल दिया कि केंद्र सुनिश्चित करेगा कि संविधान की छठी अनुसूची का पारित हो जिससे मिज़ोरम के स्वायत्तशासी जिला परिषदों को अधिक शक्ति मिलेगा.

छठी अनुसूची के तहत संविधान पूर्वोत्तर के चार राज्यों – असम, मिज़ोरम, मेघालय और त्रिपुरा – के जनजातीय इलाकों के प्रशासन का विशेष प्रावधान करता है.

चुनाव के दिन ब्रू लोगों के लिए न की जाए परिवहन की व्यवस्था: मिज़ोरम सिविल सोसाइटी

मिज़ोरम में सिविल सोसाइटी और छात्र निकायों के प्रमुख संगठन ‘एनजीओ कोआर्डिशन कमेटी’ ने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया है कि वे 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान उन ब्रू मतदाताओं के लिए परिवहन की व्यवस्था नहीं करें, जो त्रिपुरा के राहत शिविरों में रह रहे हैं.

कमेटी के अध्यक्ष वनलालरूआटा ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए कहा कि नागरिक संगठनों ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से यह अपील भी की थी कि वह उत्तरी त्रिपुरा जिले के छह राहत शिविरों में रह रहे करीब 11 हजार ब्रू लोगों से वोट नहीं मांगें.

नागरिक संगठनों ने हालांकि मिज़ोरम के अंदर चुनाव प्रचार करने पर आपत्ति नहीं जतायी.

उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि राहत शिविरों में चुनाव प्रचार किए जाएं क्योंकि वहां रह रहे लोगों ने केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा बार बार प्रयास किए जाने के बाद भी मिज़ोरम लौटने से इनकार कर दिया. नागरिक संगठनों ने भी उनसे लौटने की कई बार अपील की.

उन्होंने कहा कि इसके अलावा किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार द्वारा मतदाताओं के लिए परिवहन की व्यवस्था करना चुनाव कानूनों के भी खिलाफ है.

चुनाव के मैदान में हैं केवल 15 महिला उम्मीदवार

विधानसभा चुनाव में 200 से अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें महिला उम्मीदवारों की संख्या केवल 15 है. मतदाताओं के लिहाज से देखा जाए तो प्रदेश में पुरुषों के मुकाबले महिला मतदाता अधिक हैं.

प्रदेश से कभी भी कोई सीट नहीं जीतने वाली भाजपा ने सबसे अधिक छह महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जेवी लूना ने बताया कि मिजो महिलाएं पारंपरिक रूप से राजनीति में अधिक रुचि नहीं लेती हैं. लेकिन अब वे सामाजिक गतिविधियों में भाग ले रही हैं और उसने सभी राजनीतिक दलों को महिला उम्मीदवारों को चुनाव में उतारने का ज्ञापन दिया था.

भाजपा के बाद ईसाई मत प्रचारक राजनीतिक दल जोरम थार का स्थान है जिसने पांच महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं, निवर्तमान सरकार में मंत्री वनलालावम्पुई चावंगथु चुनाव मैदान में कांग्रेस के टिकट से उम्मीदवार हैं.

जोरम पीपुल्स मूवमेंट ने दो महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है. राकांपा ने केवल एक महिला को टिकट दिया है. एमएनएफ की तरफ से कोई महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है.

त्रिपुरा: अगले सत्र से राज्य में लागू होगा सीबीएसई पाठ्यक्रम

फोटो साभार: ट्विटर
फोटो साभार: ट्विटर

अगरतला: त्रिपुरा सरकार ‘राज्यस्तरीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद’ के पाठ्यक्रम के स्थान पर अगले शिक्षण सत्र से राज्य में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की पाठ्यपुस्तकें और सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करेगी .

राज्य के शिक्षा मंत्री रतन लाल नाथ ने विधानसभा में बताया कि एनसीईआरटी का एक दल नए पाठ्यक्रम के बारे में शिक्षकों को तीन माह का प्रशिक्षण देने के लिए तीन दिसंबर को यहां पहुंचेगा.

नाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा, ‘हम अगले शैक्षणिक वर्ष से एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें और सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करेंगे, क्योंकि देश में छात्रों का जो मानक है उसकी तुलना में हमारे राज्य के छात्र काफी पीछे हैं. हम चाहते हैं कि वे अन्य राज्यों के छात्रों की तरह ही प्रतिस्पर्धी बनें.’

सत्ता में आने के तुरंत बाद ही भाजपा-आईपीएफटी सरकार ने स्कूलों में पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए एक विशेष पैनल का गठन किया था. विशेष पैनल ने ही त्रिपुरा के स्कूलों  में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने का सुझाव दिया था.

सिक्किम: मुख्यमंत्री ने कहा, इस साल 17 हज़ार युवाओं को सरकारी नौकरी मिलेगी

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग. (फोटो साभार: फेसबुक/Pawan Chamling)
सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग. (फोटो साभार: फेसबुक/Pawan Chamling)

गंगटोक: सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने शुक्रवार को घोषणा की कि राज्य सरकार ‘एक परिवार एक नौकरी’ योजना के पहले चरण के तहत इस साल 17 हजार युवाओं को नौकरी देगी.

चामलिंग ने यहां सरामसा गार्डन में राज्य स्तरीय पंचायत और जैविक खेती करने वाले किसानों के सम्मेलन में घोषणा करते हुए कहा कि केवल स्वाभाविक लोगों को लाभ मिलेगा और जनप्रतिनिधि पूरी जांच के बाद युवाओं के नाम सौंपेंगे.

चामलिंग ने 14 नवंबर को इस कल्याणकारी योजना का विचार रखा था ताकि इस राज्य की जनता की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित हो.

उन्होंने कहा था कि नीतिगत फैसला दिसंबर तक पूरी तरह से अमल में आएगा और दो जनवरी 2019 से लाभार्थियों के पहले समूह को नौकरी मिलेगी.

उन्होंने सभा में आश्वासन दिया कि सभी अस्थायी श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाएगा.

त्रिपुरा: मुख्यमंत्री ने कहा, गिद्ध देखने राज्य में आएं पर्यटक 

बिप्लब कुमार देब. (फोटो साभार: ट्विटर)
बिप्लब कुमार देब. (फोटो साभार: ट्विटर)

अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने गुरुवार को पर्यटकों से आग्रह किया कि वे दुर्लभ हो चले गिद्धों को देखने के लिए प्रदेश में आयें.

देब और केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री केजे अल्फोंस ने यहां आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मेले का उद्घाटन किया और इस क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया.

देब ने यहां आये टूर ऑपरेटरों से कहा कि विश्व में गिद्धों की संख्या कम होती जा रही है लेकिन वे यहां पर्याप्त संख्या में पाये जाते है.

उन्होंने ऑपरेटरों से कहा कि यहां ऐसी जगहें विकसित हो सकती हैं जहां पर्यटक गिद्ध देखने आ सकें। उन्होंने राज्य सरकार के सहयोग का भी आश्वासन दिया.

अल्फोंस ने इस अवसर पर त्रिपुरा को ‘ईश्वर का बैकुंठ’ करार देते हुये पूर्वोत्तर भारत में लोगों से निवेश की अपील की.

असम: यूनिसेफ ने राज्य की गायिका नाहिद आफरीन को यूथ एडवोकेट नियुक किया

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यूनिसेफ के अधिकारियों के साथ नाहिद आफरीन (फोटो साभार: फेसबुक/officialnahidafrin)

गुवाहाटी: असम की मशहूर गायिका नाहिद आफरीन को पूर्वोत्तर में बाल अधिकारों की लड़ाई के लिए यूनिसेफ की ओर से युवा पक्षकार (यूथ एडवोकेट) नियुक्त किया गया है.

यूनिसेफ समाज में बदलाव लाने के लिए आवाज उठाने वालों को युवा पक्षकार नियुक्त करता है. यूनिसेफ की भारत में प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने गुरुवार को गुवाहाटी में हुए एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी.

हक ने कहा, ‘यूनिसेफ का मानना है कि युवा पीढ़ी की आवाज का ज्यादा असर होता है क्योंकि उनके पास मुद्दों पर अपने विचारों से प्रेरित करने की अनोखी शक्ति होती है.’

इस मौके पर नाहिद ने कहा, ‘यूनिसेफ की युवा पक्षकार बनकर काफी सम्मानित महसूस कर रही हूं. उम्मीद है कि मैं ज्यादा से ज्यादा बच्चों को उनके सपने साकार करने के लिए बढा़वा दे पाउंगी.’

नाहिद ने अपने प्रशंसकों से बाल अधिकारों का समर्थन करने और बच्चों के खिलाफ हिंसा से लड़ने की अपील की.

नाहिद ने 2016 में आई फिल्म ‘अकीरा’ से गायकी का सफर शुरू किया था. 2018 में असम फिल्म फेस्टिवल में उन्हें सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के सम्मान से नवाजा गया था.

सिक्किम: राज्य में पांच फीसदी वन क्षेत्र बढ़ा

गंगटोक: सिक्किम में 1993 के बाद से वन क्षेत्र में चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. राज्य के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

उन्होंने यहां आयोजित एक संगोष्ठी में कहा कि 1993 में राज्य में वन क्षेत्र 43.95 प्रतिशत था, जो 2017 में बढ़कर 47.62 प्रतिशत हो गया है. उन्होंने इसका श्रेय राज्य में जैव विविधता संरक्षण के लिए उठाये गए कदमों को दिया.

यह अंतराष्ट्रीय संगोष्ठी पूर्वी हिमालयी क्षेत्र के लिए ‘इंटरनेशलन सिम्पोजियम ऑन एवरग्रीन ओक फॉरेस्ट’ विषय पर आयोजित की गई थी.

चामलिंग ने कहा कि वह लगातार इस बात पर ध्यान केंद्रिंत कर रहे हैं कि राज्य में वन क्षेत्र को बढ़ाया जाये. सिक्किम में बहुत अधिक जैव विविधता पाई जाती है.

असम: उल्फा-आई में युवाओं के शामिल होने में कुछ भी नया नहीं, अगर कोई पत्रकार शामिल होता तो नई सूचना होती: हिमंता बिस्वा शर्मा 

हिमंता बिस्व शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक/Himanta Biswa Sarma)
हिमंता बिस्व शर्मा. (फोटो साभार: फेसबुक/Himanta Biswa Sarma)

गुवाहाटी: असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने बुधवार को कहा कि राज्य के युवाओं के प्रतिबंधित उल्फा-इंडिपेंडेंट संगठन में शामिल होने में कुछ भी नया नहीं है.

उन्होंने संगठन के ‘कमांडर इन चीफ’ परेश बरुआ के भतीजे के इसमें शामिल होने की खबरों को तवज्जो नहीं दी.

शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के इस बयान के लिए उन पर निशाना साधा कि असम के कई युवा राज्य में मौजूदा भाजपा सरकार के शासनकाल में उल्फा-आई में शामिल हुए हैं.

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के शासन में संगठन का सदस्य होने की वजह से गिरफ्तार किये गये लोग क्या फर्जी थे.

भाजपा की एक बैठक से इतर शर्मा ने कहा, ‘उल्फा-आई में युवाओं के शामिल होने में कोई नई बात नहीं है. हर साल 150 से 200 युवा संगठन में शामिल होते हैं. अगर कोई पत्रकार उग्रवादी संगठन में शामिल होता है तो इसे नई सूचना माना जा सकता है.’

पत्रकारों ने उनसे राज्यों के युवाओं के संगठन में शामिल होने के मुद्दे पर सवाल पूछा था.

बरुआ के भतीजे मुन्ना के संगठन में शामिल होने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, ‘उल्फा-आई के प्रमुख परेश बरुआ के भतीजे के संगठन में शामिल होने में कोई चौंकाने वाली बात नहीं है. अगर वह (मुन्ना) उल्फा-आई में शामिल नहीं होगा तो कौन होगा? क्या यह कोई खबर है?’

गोगोई के बयान पर निशाना साधते हुए शर्मा ने कहा, ‘क्या उनके 15 साल के शासनकाल में कोई उल्फा-आई नहीं था? क्या उनके शासन में गिरफ्तार किये गये उल्फा-आई के सदस्य फर्जी उग्रवादी थे? अगर वे फर्जी थे, तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए.’

भाजपा और क्षेत्रीय दलों के नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (नेडा) के संयोजक शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ‘कांग्रेस की तरह, बूढ़े हो गये परेश बरुआ ने भी उनके मिशन को आगे ले जाने के लिहाज से उत्तराधिकारी के तौर पर अपने ही खून को चुना.’

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं भाजपा में हूं, इसलिए मेरे भाई का भाजपा में शामिल होना खबर नहीं है. आप उल्फा-आई के प्रवक्ता की तरह बात क्यों कर रहे हैं?’

मणिपुर: मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेने वाले मंत्रियों से मांगा इस्तीफा

इंफाल: यहां एक सरकारी कार्यक्रम में मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति कम होने से नाराज मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने उनसे इस्तीफा मांगा.

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार मंगलवार को मणिपुर राइफल्स के परिसर में ‘कौमी एकता सप्ताह’ पर आयोजित एक समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया.

उन्होंने कहा कि अगर ईमानदारी और समर्पण से जनता के कल्याण के लिए अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर सकते तो मंत्रियों और अधिकारियों को इस्तीफा दे देना चाहिए.

विज्ञप्ति में कहा गया कि राज्य सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में कुछ ही मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

असम: 3.5 लाख लोगों ने किया एनआरसी में नाम शामिल कराने का आवेदन

Assam NRC

गुवाहाटी: राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे से बाहर किए गए 40 लाख लोगों में से करीब 3. 5 लाख लोगों ने दावा किया है कि वे भारतीय नागरिक हैं.

उच्चतम न्यायालय की निगरानी वाली इस कवायद में दावों और आपत्तियों को लिए जाने पर यह बात सामने आई है. सूत्रों ने 18 नवंबर को यह जानकारी दी.

दावे और आपत्तियां लेने का कार्य दो महीने पहले 25 सितंबर को शुरू हुआ था.

अधिकारियों को 100 से भी कम ऐसे आवेदन मिले हैं जिनमें एनआरसी में संदिग्ध अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल होने को चुनौती दी गई है.

अब तक करीब 3. 5 लाख लोगों ने एनआरसी में अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन जमा किया है और उन्होंने उन्हें प्रासंगिक दस्तावेज भी सौंपे हैं.

इस अवधि के दौरान कम संख्या में दावे और आपत्तियां प्राप्त होने को लेकर नई दिल्ली में 17 नवंबर को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. इसमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा, खुफिया ब्यूरो के निदेशक राजीव जैन सहित अन्य शामिल थे.

रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट लागू करने पर सहमत पूर्वोत्तर के राज्य

नई दिल्ली: संसद द्वारा रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट (रेरा) बनाए जाने के करीब दो साल बाद पूर्वोत्तर के छह राज्य आखिरकार इस कानून को लागू करने पर सहमत हो गए हैं, जिससे इन राज्यों में घर खरीदारों के हितों के संरक्षण का रास्ता साफ हो गया है.

अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिज़ोरम, नगालैंड और सिक्किम भूमि और दूसरे मुद्दों की वजह से रेरा को अधिसूचित करने में विफल रहे थे.

केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों (एचयूए) के मंत्रालय के एक दल ने 26 अक्टूबर को पूर्वोत्तर राज्यों का दौरा करने के साथ ही उनके प्रतिनिधियों के साथ एक कार्यशाला की. दल ने कानून को अधिसूचित करने की राह में रोड़ा बन रहे मुद्दों पर भी चर्चा की.

एचयूए सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया, ‘पूर्वोत्तर राज्य रेरा को लागू करने पर सहमत हो गए है. हम उन्हें रेरा के नियमों को अधिसूचित करने में मदद कर रहे हैं.’

सूत्रों ने कहा कि इन राज्यों के प्रतिनिधियों के रेरा को लागू करने को लेकर कुछ मुद्दे थे, लेकिन मंत्रालय के अधिकारियों ने पिछले महीने हुई कार्यशाला में उनके सभी संदेहों को दूर कर दिया.

असम: बोडो क्षेत्रों के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाने का केंद्र सरकार ने कोई वादा नहीं किया- वार्ताकार

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अलग बोडो राज्य के लिए एबीएसयू लम्बे समय से मांग करता आ रहा है (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने असम के बोडो प्रभुत्व वाले इलाकों के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाने का कोई वादा किसी भी समूह से नहीं किया है. असम में सक्रिय उग्रवादी समूहों से बातचीत करने के लिए केंद्र के वार्ताकार एबी माथुर ने बीते रविवार को यह जानकारी दी.

उनका यह बयान असम में इस तरह के किसी कदम के गैर खिलाफ कुछ बोडो संगठनों के जोरदार विरोध के बाद आया है.

उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा को बताया, ‘यह पूरी तरह से गलत है. किसी तरह का कोई वादा किसी से नहीं किया गया है.’

जब माथुर से पूछा गया था कि क्या केंद्र सरकार ने असम में ‘बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र जिलों’ (बीटीएडी) में कोई संघ शासित प्रदेश बनाने का कोई वादा किया है, तब माथुर ने कहा कि हाल ही में अखिल बोडो छात्र संघ (एबीएसयू) के किसी भी प्रतिनिधिमंडल के साथ उनकी कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई.

उन्होंने कहा, ‘एबीएसयू के दो-तीन नेता मुझसे चार दिन पहले मिलने आये थे. यह औपचारिक बैठक नहीं थी. मैंने उनसे कोई वादा नहीं किया. केंद्र शासित प्रदेश के बारे में सभी खबरें बिल्कुल गलत हैं.’

इस बीच, असम पुलिस के महानिदेशक (विशेष शाखा) पल्लव भट्टाचार्य ने कहा कि बीटीएडी के लिए केंद्र शासित प्रदेश के बारे में सभी अटकलें पूरी तरह गलत थीं.

उन्होंने बताया, ‘बीटीएडी के लिए केंद्र शासित प्रदेश के गठन पर किसी भी समूह को कोई वादा करने का कोई सवाल नहीं है.’ असम में कई संगठनों ने ऐसे कयासों के बाद राज्य में बंद का आह्वान किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)