कुलगाम: दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में एक करवे के बीच में बने एक मंजिला मकान से एक हल्की कराह निकल रही है. अंदर एक मंद रोशनी वाले कमरे के कोने में कुछ शोक संतप्त महिलाएं अपने बेटे की मौत पर शोक मना रही मीमा बानो से धैर्य और ईश्वर पर भरोसा रखने की बात कह रही हैं.
मीमा बाने शनिवार (15 मार्च) को हाथ जोड़कर कहती हैं, ‘वह निर्दोष था. उन्होंने एक निर्दोष व्यक्ति को मार डाला और उसे उसके अंतिम पलों में कष्ट दिया. लेकिन उन्हें अब हम पर दया करनी चाहिए और अल्लाह के लिए मेरे शौकत को रिहा कर देना चाहिए. उन्हें मेरे दूसरे बेटे को वापस कर देना चाहिए.’
मालूम हो कि मीमा बानो के बेटे शौकत अहमद बजाद और उनके भाई रियाज अहमद बजाद अपने दूर के रिश्तेदार मुख्तार अहमद अवान, निवासी परतापोरा गांव के साथ 13 फरवरी को कुलगाम के मीर बाजार में एक शादी में शामिल होने गए थे, जब तीनों लापता हो गए.
अब लापता होने के एक महीने बाद रियाज का शव कथित यातना के निशानों के साथ गुरुवार (13 मार्च) को कुलगाम जिले में विशाव नदी के तट पर रहस्यमय परिस्थितियों में पाया गया, जिससे अन्य दो लोगों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं.

रविवार (16 मार्च) को दूसरे पीड़ित शौकत का शव भी माह अश्मुजी के पास विशाव से बरामद किया गया, जिससे मामले का रहस्य और गहरा गया. दोनों भाई गुज्जरों की खानाबदोश जनजाति से ताल्लुक रखते हैं और चंदियन-पजान गांव से सटे ईंट भट्टों पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते थे.
डॉ. अजिया मंजूर भट, जिन्होंने जिला अस्पताल कुलगाम में रियाज के शव की जांच की, जहां उनका पोस्टमार्टम किया गया, ने कहा कि पीड़ित का शरीर ‘सड़ने की उन्नत अवस्था’ में था.
वहीं, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज अनंतनाग में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. भट ने कहा, ‘मुझे शव की जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ के तौर पर बुलाया गया था. जहां तक मेरा मानना है, यह हत्या जैसा नहीं लगता. यह आत्महत्या जैसा लगता है. निष्कर्ष डूबने से पहले (मृत्यु से पहले) डूबने के अनुरूप हैं.’
अधिकारियों के अनुसार, मृतक की अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं हुई है.

हालांकि, दोनों मृतक भाइयों के पिता मोहम्मद सादिक, जो अपनी आजीविका के लिए बकरियों और भेड़ों का एक छोटा झुंड पालते हैं, ने आरोप लगाया कि शव पर यातना के निशान थे.
सादिक ने आश्चर्य जताते हुए पूछा, ‘ऐसा लग रहा था जैसे उसके सिर पर उबलता पानी डाला गया था. उसका चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था. उसके पेट पर छाले थे और गर्दन के आसपास चोट के निशान थे. अगर उसने आत्महत्या की है, तो उसका शव नदी के किनारे कैसे पहुंचा.’
पिछले सप्ताह रियाज का शव बरामद होने वाली जगह का दौरा करने वाले प्रमुख आदिवासी कार्यकर्ता तालिब हुसैन ने कहा कि कश्मीर में लंबे समय से सूखे के बीच नदी में कम पानी का बहाव और उसका उथला पानी रियाज की मौत का कारण नहीं बन सकता.
हुसैन ने कहा, ‘पानी मुश्किल से घुटनों तक पहुंचता है और जिस जगह रियाज का शव मिला है, वहां से नदी को आसानी से पार किया जा सकता है. अगर हम यह भी मान लें कि रियाज ने आत्महत्या की है, तो उसका शव नदी के किनारे कैसे पहुंचा?’
ज्ञात हो कि हुसैन प्रभावित परिवार के लिए न्याय की मांग करने के लिए गांव में डेरा डाले हुए हैं. चंदियन-पजन गुज्जरों के करीब 30 घरों का एक समूह है, जो बेहद गरीबी में रहते हैं. राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से बमुश्किल 500 मीटर की दूरी पर होने के बावजूद, गांव में कोई सड़क नहीं है.

इस बीच शनिवार (15 मार्च) को जब द वायर ने दौरा किया, तो गांव तक जाने वाला कच्चा रास्ता पानी से भरा हुआ था. गांव में कोई चिकित्सा सुविधा नहीं है और ज़्यादातर घर टिन की चादरों से बने हैं, जिन्हें लकड़ी के फ्रेम पर कीलों से बांधा गया है और बारिश और बर्फ़ से बचाने के लिए परिधि के चारों ओर मिट्टी की परतें चढ़ाई गई हैं. रियाज़ पहले व्यक्ति थे, जिनका शव इस नए बसे गांव में दफ़न किया गया. इस घटना ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है.
मृतकों के परिवार को संदेह है कि अवान, जो तीसरा लापता व्यक्ति है, के पैतृक गांव प्रतापोरा का एक आदिवासी व्यक्ति इसके पीछे शामिल हो सकता है.
द वायर से बात करते हुए, सादिक ने कहा कि अवन के चाचा कुछ वित्तीय विवाद में शामिल थे और स्थानीय व्यक्ति (नाम गुप्त रखा गया है), जो कथित तौर पर सुरक्षा बलों के लिए मुखबिर के रूप में काम करता है, ने अवन से कहा था कि कुलगाम जिला पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उसे बुलाया है.
सादिक ने दावा किया, ‘अवन ने उस दिन शौकत को बुलाया और बाद में उसे और रियाज़ को अपने साथ ले गया.’
परिवार के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (कुपवाड़ा) साहिल सारंगल ने कहा कि वे मामले की जांच कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘इस पहलू की भी जांच की जा रही है. यह एक पुराना मामला है, लेकिन हम मामले को सभी पहलुओं से देख रहे हैं.’
आदिवासी कार्यकर्ता हुसैन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश द्वारा मौतों की न्यायिक जांच का आदेश दिया जाना चाहिए और सरकार को सादिक के एकमात्र बचे बेटे को मुआवजा और नौकरी देनी चाहिए, जो तीनों में सबसे छोटा है.
अपने जीर्ण-शीर्ण घर में, मीमा बानो अपने आस-पास की महिलाओं की बातें सुनने से इनकार कर रही हैं, और बेसुध होकर रो रही हैं. कमरे के कोने से, एक छोटी लड़की अपनी गोद में एक बच्चे के साथ खड़ी हुई, कमरे में दो कदम चली और रिपोर्टर के सामने बैठ गई.
रियाज़ की पत्नी नजमा बानो ने कहती हैं, ‘मुझे सरकार से कुछ नहीं चाहिए. मैं सिर्फ़ अपने पति के लिए न्याय चाहती हूं. अगर उनकी हत्या हुई है, तो उनके अपराधियों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें सज़ा मिलनी चाहिए. मैं बस यही चाहती हूं.’
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