उत्तर प्रदेश: प्रश्नपत्र में आरएसएस से जुड़े सवालों पर विवाद, प्रोफेसर पर आजीवन प्रतिबंध

चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने मेरठ कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. सीमा पवार को परीक्षा कार्यों से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया है. एबीवीपी ने उनके द्वारा तैयार एक प्रश्नपत्र में आरएसएस को लेकर पूछे गए सवालों पर आपत्ति जताई थी और उन्हें 'राष्ट्र-विरोधी मानसिकता' वाला बताया था.

मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को ज्ञापन सौंपते एबीवीपी सदस्य. (फोटो: अरेंजमेंट)

नई दिल्ली: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) ने मेरठ कॉलेज की राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर डॉ. सीमा पवार को सभी परीक्षाओं और मूल्यांकन कार्यों से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. यह कदम तब उठाया गया जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उनके द्वारा तैयार किए गए दो सवालों पर आपत्ति जताई.

एबीवीपी ने प्रोफेसर पंवार पर ‘राष्ट्र-विरोधी विचारधारा’ रखने का आरोप लगाया और विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. इसके बाद सरकारी विश्वविद्यालय सीसीएसयू ने प्रोफेसर को आजीवन परीक्षाओं से प्रतिबंधित करने का फैसला लिया.

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने 5 अप्रैल को द वायर को बताया, ‘उन्हें हमेशा के लिए प्रश्नपत्र बनाने से प्रतिबंधित कर दिया गया है.’

विवाद क्यों हुआ?

यह विवाद 2 अप्रैल को आयोजित एमए राजनीति विज्ञान के अंतिम वर्ष के एक प्रश्नपत्र से जुड़ा है. एबीवीपी ने दो सवालों पर आपत्ति जताई, जिनमें से एक में आरएसएस को ‘परमाणु समूह’ (समाज से अलग-थलग संगठन) की श्रेणी में रखा गया था.

सवाल 87: निम्न में से किसे परमाणु समूह नहीं माना जाता है?

विकल्प: (A) दल खालसा, (B) नक्सली समूह, (C) जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, (D) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.

सवाल 93: सुमेल कीजिए—

A. पिछड़ा वर्ग राजनीति का उदय

B. दलित राजनीति का उदय

C. धार्मिक और जातिगत पहचान की राजनीति का उदय

D. क्षेत्रीय पहचान की राजनीति का उदय

विकल्प:

1. शिवसेना
2. आरएसएस
3. बीएसपी
4. मंडल आयोग

सही उत्तर: A=4, B=3, C=2, D=1

एबीवीपी ने आरोप लगाया कि इस सवाल में आरएसएस को धार्मिक और जातीय राजनीति के उदय से जोड़ा गया है, जो गलत है.

एबीवीपी का विरोध और विश्वविद्यालय का फैसला

एबीवीपी ने कहा कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से समानता और राष्ट्रीय एकता के आधार पर एक गैर-राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन रहा है.’ संगठन ने प्रोफेसर पर ‘राष्ट्रविरोधी मानसिकता’ रखने का आरोप लगाया और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.

एबीवीपी के मेरठ विंग द्वारा साझा किए गए ज्ञापन में कहा गया, ‘प्रश्नपत्र में आरएसएस को जिस तरह जोड़ा गया है, वह इस बात का संकेत देता है कि प्रश्न बनाने वाले परीक्षक की राष्ट्रविरोधी विचारधारा है. इससे छात्रों के मन में संघ की गलत छवि बनाने की कोशिश की गई है, जो राष्ट्रीय हित के खिलाफ है.’

संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को धमकी दी कि यदि प्रोफेसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे.

प्रोफेसर ने मांगी माफी

रजिस्ट्रार वर्मा के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा गठित एक टीम ने पाया कि छात्रों द्वारा ‘आपत्तिजनक’ बताए गए सवाल वास्तव में ‘विवादित’ थे. इसके बाद, प्रोफेसर सीमा पवार से स्पष्टीकरण मांगा गया, और उन्होंने लिखित रूप से माफी मांगी.

वर्मा ने कहा, ‘उन्होंने खेद व्यक्त किया और बताया कि यह उनकी मंशा नहीं थी. उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में इस विषय पर एक अध्याय था, इसलिए उन्होंने यह सवाल रखा.’

वर्मा ने आगे बताया, ‘इसके बाद विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर के खिलाफ कोई और कार्रवाई नहीं की.उन्होंने अपनी गलती मान ली और माफी मांग ली. इससे ज्यादा वह और क्या कर सकती थीं?’

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