बिट्स पिलानी के गोवा कैंपस में एक और छात्र की संदिग्ध मृत्यु, आत्महत्या का अंदेशा

गोवा स्थित बिट्स पिलानी कैंपस में एक और छात्र की संदिग्ध आत्महत्या का मामला सामने आया है. बीते पांच महीनों में यह तीसरी घटना है. मृतक ड्यूल डिग्री का छात्र था. पिछली बार की तरह इस बार भी परीक्षाओं के दौरान यह घटना हुई और कोई सुसाइड नोट नहीं मिला.

बिट्स पिलानी. (फोटो: विकिमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बिट्स), पिलानी के गोवा स्थित कैंपस में एक और छात्र की संदिग्ध आत्महत्या का मामला सामने आया है. गुरुवार (1 मई) की सुबह एक 20 वर्षीय छात्र का शव उनके हॉस्टल के कमरे में मिला. बीते पांच महीने में यह तीसरी ऐसी घटना है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, ताजा घटना को लेकर पुलिस को संदेह है कि यह आत्महत्या का मामला है. उन्होंने अस्वाभाविक मृत्यु का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

पुलिस के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10:15 बजे सामने आई. लखनऊ निवासी छात्र बिट्स पिलानी से ड्यूल डिग्री प्रोग्राम के तहत इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे. इस समय कॉलेज में परीक्षाएं चल रही हैं.

गौरतलब है कि पिछली घटना पांच मार्च को हुई थी, तब भी एक 20 वर्षीय छात्र की जान गई थी और तब भी कैंपस में परीक्षाएं ही चल रही थीं. इसके पहले दिसंबर 2024 में भी एक 20 वर्षीय छात्र की जान गई थी और तब भी कैंपस में परीक्षाएं ही चल रही थीं.

इस बार भी नहीं मिला सुसाइड नोट

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘छात्र के हॉस्टल का दरवाजा अंदर से बंद था. जब काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला तो कुछ छात्रों ने कॉलेज प्रशासन को सूचना दी. इसके बाद दरवाजा खोला गया. शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला लगता है. कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है.

पिछली घटना के बाद भी लगभग इसी तरह की जानकारी सामने आई थी. तब बिट्स पिलानी (गोवा) के पीआरओ अर्जुन सी. हलारांकर ने द वायर हिंदी को बताया था, ‘यह घटना तब सामने आई जब उनके साथी छात्रों ने बताया कि अथर्व देसाई अपने कमरे का दरवाजा नहीं खोल रहे हैं. यह सुबह करीब 8:30 बजे की बात है. संस्थान छात्र की मृत्यु के कारणों को जानने के लिए पुलिस जांच का इंतजार कर रहा है.’ इस मामले में भी कोई सुसाइड नोट नहीं मिला था.

दिसंबर 2024 की घटना के बाद पुलिस ने लगभग इसी तरह की जानकारी दी थी. पुलिस ने कहा था, ‘छात्र की मंगलवार (10 दिसंबर) को परीक्षा थी, लेकिन वह उसमें शामिल नहीं हुआ. शाम को जब कुछ छात्र उसे ढूंढने गए, तो उसका हॉस्टल का कमरा अंदर से बंद मिला. इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी. एक पुलिस टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया. कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ.’ 

कॉलेज प्रशासन का क्या कहना है?

द वायर हिंदी ने हालिया घटना पर टिप्पणी और विस्तृत जानकारी के लिए कॉलेज पीआरओ अर्जुन सी. हलारांकर से संपर्क किया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया. उन्हें सवाल ईमेल कर दिया गया है, उनका जवाब आने पर ख़बर में जोड़ दिया जाएगा.

पिछली घटना के बाद हलारांकर ने बताया था कि मामले की जांच के लिए संस्थान ने एक जांच समिति भी गठित की है. हमने उनसे उस जांच समिति की रिपोर्ट साझा करने को भी कहा है.

मार्च की घटना के बाद द वायर हिंदी ने पूछा था कि क्या छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य शैक्षणिक दबाव की वजह से प्रभावित हो रहा है, तब पीआरओ ने कहा था, ‘बिट्स पिलानी में हम एक रिलेटिव ग्रेडिंग सिस्टम अपनाते हैं, जिसमें कोई भी छात्र फेल नहीं होता. छात्रों को अगले सेमेस्टर के लिए कोर्स रजिस्टर करने के लिए न्यूनतम सीजीपीए की जरूरत नहीं होती. उन्हें अपने कोर्स चुनने और अपनी पढ़ाई की गति तय करने की पूरी स्वतंत्रता होती है, ताकि वे अपनी सुविधा के अनुसार ग्रेजुएशन पूरा कर सकें. संस्थान पाठ्यक्रम में बदलाव करने पर विचार कर रहा है ताकि छात्रों के लिए पढ़ाई का माहौल और भी तनावमुक्त बनाया जा सके.’

बिट्स पिलानी मेंआत्महत्याका सिलसिला 

बिट्स पिलानी के अलगअलग कैंपस के विद्यार्थियों के आत्महत्या का सिलसिला लंबे समय से चल रहा है. दिसंबर 2024 की घटना से पहले मार्च 2024 में इसके झुंझुनूं कैंपस में पीएचडी सेकंड ईयर की छात्रा ने हॉस्टल में अपने कमरे में दुपट्टे से फंदा लगा आत्महत्या कर ली थीजनवरी 2018 में हैदराबाद कैंपस के उन्नीस वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र टी वरुण ने अपने घर में आत्महत्या कर ली थी.

फरवरी 2018 में हैदराबाद कैंपस के एक छात्र राघव शांताराम (21 वर्ष) ने हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी. इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के छात्र थे.

सितंबर 2017 में गोवा कैंपस के छात्र चमला नरसिम्हा रेड्डी (21 वर्ष) ने होस्टल में आत्महत्या कर ली थी. रेड्डी कंप्यूटर साइंस के चौथे वर्ष के छात्र थे और हैदराबाद से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित संगारेड्डी गांव के रहने वाले थे.

मई 2012 में बिट्स पिलानी हैदराबाद के एक पीएचडी छात्र थिम्मप्पा मंजुशेट्टी (30 वर्ष) ने कैंपस की एक इमारत की छत से कूदकर आत्महत्या कर ली थी.

विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अनुसंधान के क्षेत्र में अव्वल रहने वाला बिट्स पिलानी जेईई के जरिए एडमिशन नहीं देता, बल्कि खुद की परीक्षा (BITSAT) आयोजित करता है. इस संस्थान में प्रवेश के बाद युवाओं का भविष्य सुरक्षित माना जाता है. लेकिन इसके बावजूद ये युवा अपनी जान ले रहे हैं.