इंदौर: परीक्षा के दौरान बिजली कटने के कारण हाईकोर्ट ने नीट-यूजी के नतीजों पर लगाई अंतरिम रोक

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 4 मई को आयोजित हुई नीट की परीक्षा के दौरान इंदौर के परीक्षा केंद्र पर बिजली गुल हो गई थी, जिससे उन्हें मोमबत्ती और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में पेपर देना पड़ा. याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक नतीजों पर अंतरिम रोक लगा दी है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: इंदौर के परीक्षार्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नीट-यूजी परीक्षा के परिणाम घोषित करने पर अंतरिम रोक लगा दी है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि 4 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा के दौरान बिजली गुल हो गई थी, जिससे उन्हें मोमबत्ती और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में पेपर देना पड़ा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने गुरुवार (15 मई) को दिए आदेश में कहा, ‘चूंकि परीक्षा के दौरान याचिकाकर्ता को उपयुक्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं और बिजली की आपूर्ति बाधित रही, इसलिए अगली सुनवाई तक नीट-यूजी परीक्षा-2025 का परिणाम घोषित न किया जाए.’

याचिकाकर्ताओं ने दोबारा परीक्षा कराने या निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है.

अदालत ने इस मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी और इंदौर स्थित गवर्नमेंट न्यू लॉ कॉलेज को नोटिस जारी किया है.

इस परीक्षा के ज़रिए देशभर में मेडिकल की अंडरग्रेजुएट सीटों में प्रवेश होता है और हाईकोर्ट के इस आदेश का असर देश के 21 लाख से ज़्यादा परीक्षार्थियों पर पड़ सकता है.

एक छात्रा की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि न्यू लॉ कॉलेज द्वारा संचालित परीक्षा केंद्र पर बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी. 

याचिका में कहा गया, ‘प्रशासनिक लापरवाही और बिजली बैकअप की कमी के कारण करीब 1 से 2 घंटे तक बिजली बाधित रही. इस दौरान याचिकाकर्ता समेत वहां मौजूद सभी छात्रों को मोमबत्ती और इमरजेंसी लाइट की रोशनी में परीक्षा देनी पड़ी.’

याचिकाकर्ताओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही, मनमानी और भेदभावपूर्ण आचरण करार दिया है. उनका तर्क है कि मौसम विभाग की ओर से क्षेत्र में आंधी-तूफान की चेतावनी जारी होने के बावजूद परीक्षा कराई गई, जिससे छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया.

याचिका में यह भी कहा गया कि ‘परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रा और उसका परिवार महीनों से मेहनत कर रहा था, लेकिन बिजली गुल रहने और केंद्र पर अव्यवस्था के चलते छात्रा तनाव में आ गई और अवसाद में चली गई.’

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 4 मई को इस परीक्षा केंद्र पर परीक्षा आयोजित की गई, जबकि भारतीय मौसम विभाग द्वारा पहले ही क्षेत्र में भारी आंधी-तूफान को लेकर चेतावनी जारी की गई थी. इसके बावजूद परीक्षा कराना न सिर्फ लापरवाही थी बल्कि इससे परीक्षार्थियों का पूरा करियर दांव पर लगा दिया गया.

पीटीआई से बात करते हुए याचिकाकर्ता के वकील मृदुल भटनागर ने कहा, ‘इंदौर में जिन केंद्रों पर नीट-यूजी की परीक्षा कराई गई थी, वहां न तो जनरेटर थे और न ही कोई वैकल्पिक बिजली व्यवस्था थी, जबकि मौसम विभाग ने पहले ही 4 मई को तूफान की चेतावनी जारी कर दी थी.’ 

उन्होंने बताया कि जब मौसम ने अचानक करवट ली, तो शहर के कई परीक्षा केंद्रों पर 1 से 2 घंटे तक बिजली नहीं रही, जिससे तीन घंटे की परीक्षा के दौरान छात्रों का प्रदर्शन प्रभावित हुआ. भटनागर का कहना है कि कुछ केंद्रों पर परीक्षा मोमबत्ती की रोशनी में करानी पड़ी.