उत्तर प्रदेश: सरकार ने ‘शहर से बाहर’ विवाह पंजीकरण करने के नियम कड़े किए

यूपी में विवाह पंजीकरण को लेकर नियमों में बदलाव के बाद अब विवाहित जोड़े का किसी शहर में विवाह पंजीकरण तभी होगा, जब दुल्हन, दूल्हा या उनके माता-पिता में से कोई भी उस शहर का 'सामान्य रूप से' निवासी हो. इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश के बाद कई अन्य नियम बदले गए हैं.

(प्रतीकात्मक तस्वीर साभार: पिक्साबे)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विवाह पंजीकरण को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है. अब शादी करने वाले जोड़े का किसी शहर में विवाह पंजीकरण तभी होगा, जब दुल्हन, दूल्हा या उनके माता-पिता में से कोई भी उस शहर का ‘सामान्य रूप से’ निवासी हो.

रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा भी कई अन्य नियम इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद बदले गए हैं, जिसके लिए योगी सरकार ने शासन आदेश जारी कर दिया है.

अब तक विवाह पंजीकरण नियम के तहत शादीशुदा जोड़ा कहीं भी अपना विवाह पंजीकृत करवा सकता था. इसके लिए उन्हें या उनके परिवार का उस जगह का निवासी होना अनिवार्य नहीं था.

उल्लेखनीय है कि 12 मई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस बारे में स्वतः संज्ञान लिया था, जिसमें अदालत ने कहा था कि दलालों का एक संगठित गिरोह है, जो जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी विवाह पंजीकृत करवाता है. इसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को छह महीने के भीतर उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 में संशोधन करने का निर्देश दिया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, जस्टिस विनोद दिवाकर ने विवाह पंजीकरण का कार्य सौंपे गए सभी उप पंजीयकों को 14 अक्टूबर, 2024 को जारी निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया.

इन निर्देशों में वर-वधू का आधार-आधारित वेरिफिकेशन, दोनों पक्षों और दो गवाहों का बायोमेट्रिक डेटा और फोटो, तथा डिजीलॉकर, सीबीएसई, यूपी बोर्ड, सीआईएससीई सीआरएस, पासपोर्ट, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक पोर्टलों के माध्यम से आयु सत्यापन की बात कही गई है.

हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को अब यह भी निर्देश दिया गया है कि अपंजीकृत रेंट एग्रीमेंट को निवास के प्रमाण के रूप में नहीं माना जाएगा. इसके अलावा विवाह को संपन्न कराने वाले व्यक्ति को विवाह पंजीकृत होने के समय उपस्थित होना होगा और एक शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा.

रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि अदालत का आदेश गाजियाबाद के बाहर के लोगों द्वारा शहर में अपनी शादी पंजीकृत कराने और अपने परिवारों से सुरक्षा के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने से उत्पन्न ‘न्यायालय संबंधी मुद्दों’ के संबंध में दिया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि गाजियाबाद ‘भागे हुए जोड़ों की शादियों के लिए एक पसंदीदा जगह के रूप में उभरा है.’

रिपोर्ट में सहायक महानिरीक्षक (एआईजी, स्टांप) पुष्पेंद्र कुमार के हवाले से कहा गया है, ‘उच्च न्यायालय के निर्देश नियमों में संशोधन होने तक अंतरिम निर्देश हैं. न्यायालय ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को छह महीने के भीतर स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के महानिरीक्षक के साथ समन्वय करके उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 में संशोधन करने का भी आदेश दिया है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘राज्य सरकार ने हमें नियमों में संशोधन होने तक उच्च न्यायालय के अंतरिम निर्देशों का तत्काल प्रभाव से पालन करने का आदेश दिया है. निर्देशों के मुख्य घटकों में से एक में कहा गया है कि किसी विशेष शहर में विवाह का पंजीकरण तभी होगा जब दुल्हन या दूल्हा या उनके माता-पिता आम तौर पर उसी शहर के निवासी हों.’

वकील अनुभव सिंह का कहना है कि इसका उद्देश्य स्पष्ट रूप से अंतरजातीय और अंतर-समुदाय विवाह को खत्म करना है.

गौरतलब है कि पहले से ही उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून, जिसे 2020 में भारतीय जनता पार्टी सरकार द्वारा ‘लव जिहाद’ के हौवे के खिलाफ लाया गया था, ने अंतर-धार्मिक जोड़ों के लिए विवाह को पंजीकृत कराना मुश्किल बना दिया है.