नई दिल्ली: गौहाटी हाईकोर्ट ने सोमवार को एक ऐसे व्यक्ति को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया, जिन्हें ‘विदेशी’ घोषित किया गया था, और कहा कि जमानत पर बाहर रहते हुए उनकी गिरफ्तारी अवैध थी.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट में उनकी अपील लंबित होने, अदालत के आदेश पर जमानत पर बाहर होने तथा जमानत की शर्तों का पालन करने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर हिरासत में रखा गया था.
गोआलपाड़ा निवासी मोजिदा बेगम ने अपने बेटे हसीनूर उर्फ हचिनूर को असम पुलिस द्वारा 25 मई को हिरासत में लिए जाने के बाद गौहाटी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उनकी हिरासत उस राज्यव्यापी अभियान का हिस्सा था, जिसमें विदेशी घोषित किए गए लोगों को हिरासत में लिया जा रहा था और ‘पुश बैक’ रणनीति के तहत बांग्लादेश में ‘वापस भेजा’ जा रहा था.
उल्लेखनीय है कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद भारत की ‘पुश बैक’ रणनीति के तहत संदिग्ध रूप से अवैध प्रवासी सैकड़ों लोगों को पूर्वी सीमा के रास्ते बांग्लादेश भेज दिया गया है. देश भर में पुलिस अवैध प्रवासियों की पहचान करने के लिए अभियान चला रही है.
सोमवार को गौहाटी हाईकोर्ट के जस्टिस कल्याण राय सुराना और मालाश्री नंदी की पीठ ने उनकी हिरासत को अवैध करार दिया और अपने आदेश में कहा कि ‘ऐसी अवैध हिरासत को एक मिनट के लिए भी अनुमति नहीं दी जा सकती.’
पीठ ने राज्य प्रतिवादियों के वकीलों द्वारा अपने मुवक्किलों से निर्देश प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया.
हचिनूर को 2018 में कामरूप मेट्रोपॉलिटन में एक विदेशी न्यायाधिकरण (एफटी) द्वारा विदेशी घोषित किया गया था और 2019 में गोआलपाड़ा जिला जेल में हिरासत में रखा गया था, जिसके बाद उन्होंने 2020 में एफटी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
जून 2021 में, उनके मामले की सुनवाई करते हुए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और जस्टिस अचिंत्य मल्ला बुजोर बरुआ की गौहाटी हाईकोर्ट की पीठ ने निर्देश दिया था कि उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए क्योंकि उन्होंने हिरासत में दो साल पूरे कर लिए थे और सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक सामान्य आदेश जारी किया था कि जिन लोगों ने हिरासत में दो साल पूरे कर लिए हैं उन्हें जमानत पर रिहा किया जा सकता है.
इस आदेश का उल्लेख करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि उसी न्यायालय में पुरानी रिट याचिका अभी भी निपटान के लिए लंबित है.
जमानत पर रिहा होने के बाद हचिनूर को इस साल 25 मई को फिर से हिरासत में लिया गया, जिसके बाद उनके परिवार ने कहा कि उन्हें उनकी रिहाइश के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उसकी मां मोजिदा बेगम द्वारा राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद एफटी मामलों के स्थायी वकील ने अदालत को सूचित किया कि उसे कोकराझार में 7वीं पुलिस बटालियन के तहत एक होल्डिंग सेंटर में रखा जा रहा है.
11 जून को पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता एके सिकदर के वकील ने तर्क दिया था कि हचिनूर हर सप्ताह गोआलपाड़ा पुलिस थाने में उपस्थित होने की अपनी जमानत शर्तों का पालन कर रहा है, तथा वहां उनकी अंतिम उपस्थिति 5, 12 और 19 मई को हुई थी.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने अधिकारियों को शुक्रवार तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया.
एक अलग मामले में हाईकोर्ट ने 13 जून को मोहम्मद बसाक अली नामक व्यक्ति को जमानत दे दी, जिन्हें 23 मई को हिरासत में लिया गया था. उन्होंने 21 दिन हिरासत केंद्र में बिताए थे. बसाक अली के बेटे मोहम्मद सिराज अली ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके पिता के विदेशी होने का संदेह था, लेकिन विदेशी न्यायाधिकरण ने उन्हें जनवरी 2024 में भारतीय नागरिक घोषित कर दिया था.
हाईकोर्ट ने बसाक अली को इस शर्त पर जमानत दे दी कि उसका परिवार 5,000 रुपये का जमानत बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानती पेश करे.
