ओडिशा: गोतस्करी के शक में दलितों से मारपीट, सिर मुंडवाकर घुटनों पर चलने को मजबूर किया

ओडिशा के गंजम जिले में गोतस्करी के आरोप में भीड़ ने दो दलित व्यक्तियों के सिर जबरन मुंडवा दिए और उन्हें घिसटने पर मजबूर किया, जिसके बाद नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है.

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में दो पुरुषों को घुटनों के बल चलते हुए देखा जा सकता है. (स्क्रीनग्रैब साभार: X/@AmiyaPandav)

नई दिल्ली: ओडिशा के गंजम जिले में गोतस्करी के आरोप में भीड़ ने दो दलित व्यक्तियों के सिर जबरन मुंडवा दिए और उन्हें घुटनों पर चलने को मजबूर किया गया. बताया गया है कि इस कृत्य को लेकर नौ लोगों को हिरासत में लिया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि पीड़ितों ने एक गाय और दो बछड़े खरीदे थे और घर लौट रहे थे, तभी धारकोटे पुलिस सीमा के अंतर्गत खारीगुम्मा गांव में भीड़ ने उन्हें घेर लिया और 30,000 रुपये की मांग की. जब उन्होंने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो भीड़ ने कथित तौर पर उनकी पिटाई की, जबरन उनके सिर मुंडवा दिए, उन्हें घुटनों पर चलने को मजबूर किया और उन्हें नाली का पानी पिलाया.

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कथित तौर पर दो पुरुषों को अपने दांतों के बीच घास दबाए हुए घुटनों के बल चलते हुए देखा जा सकता है, जहां कुछ लोग उनका पीछा कर रहे हैं.

पुलिस ने आगे कहा कि भीड़ ने उनसे 700 रुपये कैश और उनके मोबाइल फोन भी छीन लिए.

इस संबंध में धारकोटे थाने के इंस्पेक्टर चंद्रिका स्वैन ने कहा, ‘पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है. कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी. पीड़ितों का स्थानीय अस्पताल में इलाज कराया गया है.’

विपक्ष ने साधा निशाना

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘भाजपा शासित राज्यों में ऐसी घटनाएं आम होती जा रही हैं, क्योंकि उनकी राजनीति नफरत और भेदभाव पर आधारित है. दलित युवकों को घुटनों के बल चलने, घास खाने और गंदा पानी पीने के लिए मजबूर करना न केवल अमानवीय है, बल्कि मनुवादी सोच की बर्बरता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘दलितों की गरिमा को कुचलने वाली हर घटना बाबा साहब के संविधान पर हमला है. समानता, न्याय और मानवता के खिलाफ एक साजिश है. दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उन्हें कड़ी सजा दी जानी चाहिए. देश संविधान से चलेगा, मनुस्मृति से नहीं.’

वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता निरंजन पटनायक ने कहा, ‘यह लिखते हुए भी मेरा दिल बैठ रहा है. गंजम जिले में दो युवा दलित पुरुषों को अपमानित किया गया और प्रताड़ित किया गया- उनके सिर आधे मुंडे हुए थे, उन्हें 2 किलोमीटर तक घसीटने के लिए मजबूर किया गया, उन्हें घास खाने और सीवेज का पानी पीने के लिए मजबूर किया गया. और किसलिए? सिर्फ़ अपनी बेटी की शादी के लिए गाय खरीदने के लिए. नफ़रत को सामान्य बना दिया गया है. जातिगत हिंसा बढ़ रही है. और ओडिशा में न्याय दूर की कौड़ी लगता है, लगभग अदृश्य. हमारे मुख्यमंत्री इस पर चुप क्यों हैं?’

गौरतलब है कि पिछले कई वर्ष गौरक्षकों द्वारा हिंसा के मामलों में वृद्धि देखी गई है.