नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के वकील केजी राघवन ने मंगलवार (1 जुलाई) को कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा कि भारत में अब हर ‘ऐरे-गैरे’ सरकारी अधिकारी को ऑनलाइन कंटेंट हटाने का आदेश देने का अधिकार मिल गया है.
राघवन की यह टिप्पणी अदालत में उस समय आई जब उन्होंने बताया कि हाल ही में रेलवे विभाग ने एक्स को एक वीडियो हटाने का नोटिस भेजा था, जिसमें एक कार को रेलवे ट्रैक पर चलाते हुए दिखाया गया था. उन्होंने कहा कि यह एक समाचार सामग्री थी, लेकिन सरकार ने इसे गैरकानूनी माना.
राघवन ने कहा, ‘यह ख़तरा है माय लॉर्ड, जो अब हो रहा है. अगर हर ऐरे-गैरे अधिकारी को यह अधिकार मिल जाए.’
सरकार और अदालत ने जताई आपत्ति
राघवन की इस टिप्पणी पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तुरंत आपत्ति जताई और कहा, ‘अधिकारी ऐरे-गैरे नहीं हैं. वे वैधानिक पदाधिकारी हैं. कोई भी सोशल मीडिया कंपनी पूरी तरह बिना नियंत्रण के काम करने की उम्मीद नहीं कर सकती.’
इस मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने भी राघवन की भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा, ‘ये भारत सरकार के अधिकारी हैं. मैं इस टिप्पणी पर आपत्ति जताता हूं. वे अधिकारी हैं, ऐरे-गैरे नहीं.’
डिजिटल मीडिया संगठनों ने उठाई चिंता और एक्स ने अदालत के समक्ष रखी मांगें
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल मीडिया संगठनों के एक समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील आदित्य संधी ने कहा, ‘हम कंटेंट क्रिएटर्स हैं, और किसी भी हटाने के आदेश का असर सीधे हम पर पड़ता है.’
एक्स ने अदालत का रुख इस मांग के साथ किया था कि वह घोषणा करे कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) किसी अधिकारी को जानकारी हटाने का आदेश देने का अधिकार नहीं देती. कंपनी का कहना है कि ऐसे आदेश सिर्फ आईटी एक्ट की धारा 69A और उसके तहत बनाए गए नियमों का पालन करने के बाद ही जारी किए जा सकते हैं.
एक्स ने यह भी मांग की है कि भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को निर्देश दिए जाएं कि वे सिर्फ धारा 69A के तहत और उसके नियमों के अनुसार ही सूचना हटाने से संबंधित आदेश जारी करें, और जब तक ऐसा न किया जाए, तब तक एक्स के खिलाफ कोई सख्त या पूर्वाग्रह से भरी कार्रवाई न की जाए.
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को तय की है और याचिकाकर्ता को अनुमति दी है कि वह अपनी याचिका में संशोधन कर भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को पक्षकार बनाए.
