नई दिल्ली: महाराष्ट्र में 9,000 से अधिक होम्योपैथिक डॉक्टर, जो ‘सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (सीसीएमपी)’ में प्रशिक्षित हैं, राज्य सरकार द्वारा अचानक उनके पंजीकरण को निलंबित किए जाने के विरोध में 16 जुलाई से आज़ाद मैदान में भूख हड़ताल पर हैं.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, उनके साथ राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों के 90,000 से अधिक होम्योपैथिक डॉक्टर, शिक्षक और छात्र भी शामिल हो रहे हैं. हड़ताल का नेतृत्व महाराष्ट्र यूनाइटेड होम्योपैथिक डॉक्टर्स फ्रंट (एमयूएचडीएफ) कर रहा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और महाराष्ट्र सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (एमएसआरडीए) सहित विभिन्न संगठनों के विरोध के बाद महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) ने होम्योपैथी डॉक्टरों का पंजीकरण वापस लेने का फैसला लिया है.
इन संगठनों ने आधुनिक औषध विज्ञान (सीसीएमपी) में सर्टिफिकेट कोर्स पूरा कर चुके होम्योपैथिक चिकित्सकों को एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में पंजीकरण और अभ्यास करने की अनुमति देने के कदम को जन स्वास्थ्य के लिए जोखिम बताया था.
मालूम हो कि आईएमए ने होम्योपैथ चिकित्सकों को एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में अभ्यास करने की अनुमति देने पर हड़ताल की भी चेतावनी दी थी.
राज्य सरकार द्वारा अपने ही पहले के फैसले को वापस लेने के बाद होम्योपैथी डॉक्टरों ने बुधवार (16 जुलाई) सुबह 11 बजे से 18 जुलाई की रात तक चलने वाली भूख हड़ताल की घोषणा की थी.
विरोध मोर्चे के एक सदस्य जयंत रंजने ने अखबार को बताया, ‘जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, हम इसका विरोध करते रहेंगे. हम बस एमएमसी के तहत पंजीकरण चाहते हैं. होम्योपैथी डॉक्टरों के लिए कोई सरकारी नौकरी नहीं है और हम प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बनना चाहते हैं.’
