बेटे की राह देखती दुनिया से चली गई मां, 2006 बम धमाके केस में बरी हुए साजिद अंसारी की कहानी

मुंबई ट्रेन धमाके मामले में हाल ही बरी हुए साजिद अंसारी का कहना है कि पुलिस ने उन्हें फंसाने का प्रयास किया क्योंकि वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है. 'पुलिस ने मेरे घर से कुछ इलेक्ट्रिकल पदार्थ बरामद कर यह दिखाने का प्रयास किया कि मैं बम और विस्फोटक बनाने में माहिर हूं.'

उन्नीस साल की क़ैद के बाद बाहर निकले साजिद का कहना है कि 'मुझे इसीलिए निशाना बनाया गया क्योंकि मैं मुस्लिम हूं और सरकार की मंशा मुसलमानों के संबंध में साफ़ है.' (फोटो: अरेंजमेंट/इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रवर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 जुलाई को मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में 12 आरोपियों को बरी किया, जिनमें से 5 को मृत्यु-दंड और 7 को उम्रकैद की सज़ा सुनाई जा चुकी थी. लेकिन अब उच्च न्यायालय ने उन सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि महाराष्ट्र एटीएस इन सभी आरोपियों का जुर्म साबित करने में असमर्थ रही.

ज्ञात हो कि 11 जुलाई 2006 को मुंबई के विभिन्न स्थानों पर लोकल ट्रेन में एक साथ बम धमाके हुए. इसके आरोप में यह 12 लोग पिछले 19 सालों से जेल की सलाखों के पीछे थे. 2015 में एक स्पेशल कोर्ट ने इन 12 लोगों के खिलाफ आरोप सिद्ध कर दिए और इन्हें मुजरिम ठहराया गया. जबकि वाहिद शेख नामक आरोपी को यह कहते हुए रिहा कर दिया गया कि कोर्ट को उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिल पाए.

2015 के मकोका अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में इन सभी 12 आरोपियों की रिहाई के लिए याचिका दायर की गई, जिसे सुनते हुए बीते 21 जुलाई को जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस श्याम चांडक की विशेष बेंच ने फैसला सुनाते हुए 12 आरोपियों को बरी कर दिया.

इनमें से एक हैं मीरा रोड के निवासी 48 वर्षीय साजिद अंसारी, जिन्हें 2006 में गिरफ्तार किया गया था. द वायर हिंदी के साथ बात करते हुए साजिद ने बताया, ‘मैं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं, और इसलिए एटीएस ने मुझे आरोपी बनाया और मेरी गिरफ्तारी हुई.’

साजिद आगे कहते हैं कि वे पिछले साढ़े 18 सालों से जेल की सलाखों के पीछे थे, इस दौरान उनकी मां और दो बहन दुनिया से चली गईं. जब साजिद की गिरफ्तारी हुई तो उनकी पत्नी गर्भवती थीं, ऐसे समय में जब उनकी बीवी और उनके बच्चों को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी तब उन्हें जेल भेज दिया गया. साजिद के जेल जाने के 3 महीने बाद उनकी बीवी ने एक बच्ची को जन्म दिया.

साजिद का कहना है कि वे साढ़े 18 साल तक अपनी बेटी से नहीं मिल पाए. उनके अनुसार, इस लंबे अरसे में उन्हें सिर्फ़ दो बार जेल से बाहर आने का मौका मिला लेकिन चंद घंटों के लिए. एक बार अपनी मां के निधन पर और दूसरी दफा अपनी बहन के जनाजे में शामिल होने के लिए.

साजिद के जेल जाने के 3 महीने बाद उनकी बीवी ने एक बच्ची को जन्म दिया. साजिद बताते हैं कि वे साढ़े 18 साल तक अपनी बेटी से नहीं मिल पाए. (फोटो: अरेंजमेंट)

इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत ज्यादा प्रभावित रही. साजिद ने बताया, ‘मेरे दो भाई हैं. दोनों भाइयों ने उनके परिवार की देखरेख की, लेकिन एक समय ऐसा आया कि सिर्फ एक भाई ही कमाने वाले थे और दूसरे भाई पूरी तरह से मेरे केस में लगे हुए थे.’

‘जब मैं जेल में था तो मेरे परिवार की देखरेख का बोझ पूरी तरह से मेरे भाइयों पर पड़ गया था,’ उन्होंने बताया.

साजिद का कहना है कि उनके खिलाफ पुलिस को किसी भी प्रकार के सबूत नहीं मिल पाए. साजिद ने इस पूरे केस को फर्जी बताया और कहा कि पुलिस ने उन्हें फंसाने का प्रयास किया क्योंकि वे एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है. ‘पुलिस ने मेरे घर से कुछ इलेक्ट्रिकल पदार्थ बरामद कर यह दिखाने का प्रयास किया कि मैं बम और विस्फोटक बनाने में माहिर हूं,’ उन्होंने कहा.

साजिद के अनुसार कोर्ट ने न्याय पर आधारित फैसला दिया है.

महाराष्ट्र सरकार सभी बरी हुए आरोपियों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गई है. लेकिन साजिद ने कहा कि उन्हें भारत की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है जिस तरह से हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत दी इस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय भी न्याय और तथ्यों पर आधारित फैसला देगा.

साजिद ने जेल में रहते हुए कानून की पढ़ाई शुरू की और अब वह वकालत के अंतिम वर्ष के छात्र हैं. साजिद ने पुलिस की कार्रवाई और सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन आए दिन इस तरह के बेकसूर और मासूम लोगों को निशाना बनाता है इसके पीछे कारण यही है कि प्रशासन खुद उन लोगों को छुपाना चाहता है जो असल मुजरिम है.

‘मुझे इसीलिए निशाना बनाया गया क्योंकि मैं मुस्लिम हूं और सरकार की मंशा मुसलमानों के संबंध में साफ़ है. हमें जेल में या फिर पूछताछ के दौरान विभिन्न प्रकार की मुस्लिम और इस्लाम विरोधी गालियों से पुकारा जाता था टॉर्चर किया जाता था, लेकिन मुझे भारत की न्यायपालिका से हमेशा उम्मीद रही है और अभी मेरा भरोसा कायम है,’ उन्होंने कहा.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)