नवीन पटनायक ने इतिहास की पाठ्यपुस्तक से पाइका विद्रोह को हटाने पर एनसीईआरटी की आलोचना की

एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से ओडिशा के पाइका विद्रोह को हटा दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इस विद्रोह को उड़िया इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए इस क़दम की आलोचना की है.

Chennai: Odisha Chief Minister Naveen Patnaik addresses during the 'Odisha Investors' meet, in Chennai, Wednesday, Sept. 26, 2018. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI9_26_2018_000060B)
नवीन पटनायक. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: ओडिशा में भाजपा के खिलाफ एक और मोर्चा खुल गया है, जो इस बार स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर है. पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ओडिशा के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण पाइका विद्रोह को हटाने के लिए एनसीईआरटी पर निशाना साधा है. उल्लेखनीय है कि  केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा के बड़े नेता माने जाने वाले धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा से ही आते हैं.

नवीन पटनायक ने एक्स पर लिखा है कि उन्हें यह जानकर गहरी चिंता हुई है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने ओडिशा के पाइका विद्रोह को अपनी पाठ्यपुस्तकों से हटा दिया है. पटनायक ने इस विद्रोह को उड़िया इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया है.

उन्होंने कहा, ‘पाइका विद्रोह ओडिशा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ था क्योंकि हमारे बहादुर पाइकाओं ने 1817 में अत्याचारी अंग्रेजों के खिलाफ असाधारण साहस के साथ लड़ाई लड़ी थी. मैंने भारत सरकार से कई बार आग्रह किया था कि इसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम घोषित किया जाए. पाइकाओं ने अद्वितीय वीरता के साथ विदेशी, औपनिवेशिक शासन के अत्याचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी. सिपाही विद्रोह से 40 साल पहले हुए इस महाविद्रोह को एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों से हटाना, उस विद्रोह के 200 साल बाद, हमारे बहादुर पाइकाओं का बहुत बड़ा अपमान है – जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन आंदोलन के अग्रदूत बने.’

पूर्व मुख्यमंत्री ने वर्तमान मुख्यमंत्री के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि ‘पाइका विद्रोह और ओडिशा के साथ न्याय हो.’

एनसीईआरटी की लीपापोती की कोशिश

सोमवार को मीडिया में विद्रोह को बाहर रखने की खबरें चलने के बाद एनसीईआरटी ने अपनी ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर नुकसान की भरपाई की कोशिश की थी, जिसमें कहा गया था कि कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक 𝐄𝐱𝐩𝐥𝐨𝐫𝐢𝐧𝐠 𝐒𝐨𝐜𝐢𝐞𝐭𝐲: 𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚 𝐚𝐧𝐝 𝐁𝐞𝐲𝐨𝐧𝐝 इस पाठ्यपुस्तक का पहला खंड है. दूसरा खंड विकास के अंतिम चरण में है और सितंबर-अक्टूबर 2025 में जारी होने की उम्मीद है. क्षेत्रीय प्रतिरोध आंदोलनों/सशस्त्र विद्रोहों से संबंधित विषय जैसे ओडिशा का पाइका विद्रोह/खुर्दा विद्रोह, कूका विद्रोह पंजाब में सिखों के आंदोलन/विद्रोह आदि पर इस पुस्तक में चर्चा की जाएगी.

इतिहासकारों ने हाल ही में स्कूल पाठ्यपुस्तकों के पुनरावलोकन में एनसीईआरटी द्वारा उठाए गए कई विवादास्पद कदमों पर चिंता व्यक्त की है, जिनमें कुछ छूट जाना सबसे बड़ी चिंता का विषय है.

विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे भाग में मुख्यधारा के आंदोलनों और विद्रोहों को दरकिनार करना, उन्हें दरकिनार करने के समान है और इस बात को लेकर चिंता है कि अतीत की व्यापक भारत कथा को कैसे प्रस्तुत किया जा रहा है, खासकर मिडिल स्कूल के छात्रों के सामने, जिनमें से कई अपने पाठ्यक्रम के बाद इतिहास को स्कूली विषय के रूप में दोबारा नहीं पढ़ते. यही कारण है कि मिडिल स्कूल की पाठ्यपुस्तकें स्थायी महत्व रखती हैं.