नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने 22 जुलाई को गाज़ियाबाद के कविनगर में किराए के बंगले में चल रही वेस्ट आर्कटिका की ‘फेक एम्बेसी’ का भंडाफोड़ किया. 45 वर्षीय मुख्य आरोपी हर्ष वर्धन जैन खुद को कई काल्पनिक ‘माइक्रोनेशंस’ का राजदूत बताता था.
एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार जैन 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इस मामले में कविनगर थाने में धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज रखने व हवालाधंधे समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. अब एसटीएफ सम्भावित सहयोगियों व नेटवर्क की गहन जांच कर रही है.
जाहिर है, यह केवल एक सनसनीखेज मामला नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि कैसे ग्लैमर, राजनयिक प्रतीक और भरोसे का दुरुपयोग कर विश्वव्यापी नेटवर्क तैयार करके धोखाधड़ी की जा सकती है.
कैसे फूटा भांडा?
एफआईआर के मुताबिक, ‘पुलिस को पिछले कई दिनों से अलग-अलग स्रोतों से सूचना मिल रही थी कि गाज़ियाबाद के कविनगर इलाके में कुछ लोग गैरकानूनी तरीके से अलग-अलग देशों के झंडे लगा रहे हैं और उन्हें गाड़ियों पर भी पेंट कर रहे हैं.’
‘इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों से संपर्क किया गया. उन्हें बताया गया कि विदेश मंत्रालय की अनुमति के बिना कोई भी दूतावास नहीं चलाया जा सकता और यह भारत की संप्रभुता के खिलाफ है. जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई, जिनके निर्देश पर कार्रवाई की गई.’
कैसे काम कर रहा था फर्जी दूतावास?
उत्तर प्रदेश पुलिस के अनुसार, हर्षवर्धन जैन को 2012 में सेबोर्गा (इटली के लिगुरिया क्षेत्र का एक गांव, जिसने खुद को प्रिंसिपैलिटी घोषित किया है.) द्वारा कथित तौर पर सलाहकार नियुक्त किया गया था. वहीं 2016 में उसे वेस्टआर्कटिका द्वारा ‘मानद कौंसल’ का दर्जा भी दिया गया.
जैन ने गाज़ियाबाद के एक पॉश इलाके में स्थित अपने दफ़्तर को नकली दूतावास में बदल दिया था. बंगले के दरवाजे पर एक सुनहरी नेमप्लेट थी, जिस पर लिखा था: ‘हिज़ एक्सीलेंसी हर्षवर्धन जैन, रॉयल काउंसलियर, प्रिंसिपैटो दी सेबोर्गा.’
उस जगह किसी असली राजनयिक मिशन जैसा दिखाने के लिए बंगले के बाहर जैन ने उन माइक्रो-नेशनों के झंडे लगाए थे जिनका वह कथित तौर पर प्रतिनिधित्व करता था. उसने चार लग्ज़री गाड़ियों पर अवैध रूप से डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स लगाकर इस्तेमाल किया था.
पुलिस ने जब इस फर्जी दूतावास पर छापा मारा, तो वहां से 44.7 लाख रुपये नकद के अलावा विदेशी मुद्रा भी बरामद हुई, जिसमें €17,000 (यूरो), $14,000 (अमेरिकी डॉलर), 14,000 दिरहम (यूएई), £5,200 (ब्रिटिश पाउंड) और एक टर्किश लीरा (तुर्की) शामिल है.
इसके अलावा पुलिस को चार लग्ज़री कारें (जिनमें ऑडी और मर्सिडीज शामिल हैं), 18 फर्जी वीआईपी डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स, 12 फर्जी पासपोर्ट, दो पैन कार्ड, 34 देशों की नकली मुहरें, 12 महंगी घड़ियां, एक लैपटॉप, एक मोबाइल फोन, दो फ़ेक प्रेस कार्ड और विदेश मंत्रालय के फर्जी मुहर वाले दस्तावेजों के साथ-साथ कई ऐसे कागजात मिले हैं, जिनके शेल कंपनियों से तार जुड़ रहे हैं.
एसटीएफ के अनुसार, इस झूठे तामझाम के जरिए जैन ने व्यापारियों से धोखाधड़ी की, उन्हें विदेशों में नौकरियों और व्यापारिक संपर्कों का झांसा दिया, और शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क के ज़रिए पैसे की हेराफेरी की.
क्यों चलाया जा रहा था फर्जी दूतावास?
कई समाचार रिपोर्ट्स के अनुसार, जैन ने स्थानीय लोगों और कारोबारियों को कई देशों के राजदूत होने का धोखा देकर नौकरी, विदेशी व्यापार और ‘स्पेशल कनेक्शन’ का वादा किया. उसने अपने स्टाफ में स्थानीय लोगों को नियुक्त किया और इन्हें ‘राजनयिक मिशन’ का हिस्सा बताकर पूरी साजिश रची.
उसने उन लोगों को निशाना बनाया जो विदेश में नौकरी पाने का सपना देख रहे थे या जो कंपनियां विदेशी सौदों की तलाश में थीं. जैन ने उन्हें उन्हीं देशों के वीज़ा देने का वादा किया जो उसने खुद गढ़े थे.
एसटीएफ की प्राथमिक जांच में स्पष्ट हुआ कि यह केवल फर्जी कूटनीतिक पहचान का मामला नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक हवाला नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग की बड़ी योजना थी.
एसटीएफ को शक है कि शेल कंपनियों के जरिये पैसे इधर-उधर किए गए, और चिटफंड जैसी स्किमों में निवेश कराने का झांसा दिया गया. विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूले गए.
फेक पासपोर्ट्स और डिप्लोमेटिक कारों की वजह से इंटरनेशनल रूट्स और सरकार से संबंधों का हवाला देकर विदेशी यात्रा, कस्टम क्लीयरेंस और स्मगलिंग जैसे अवैध कामों को अंजाम दिए जाने की भी आशंका है.
एसएसपी घुले सुशील चंद्रभान ने बताया है कि कई कंपनियां अभी भी एक्टिव हैं, जिनके बैंकिंग ट्रांजेक्शन्स और इंटरनैशनल कनेक्शंस की जांच जारी है. सभी बैंक खातों, विदेशी व्यापार लेनदेन, और रियल एस्टेट डील्स को खंगाला जा रहा है.
यह भी संदेह है कि जैन या उसके नेटवर्क में शामिल किसी व्यक्ति के पास अंतरराष्ट्रीय जालसाजों से लिंक्स हो सकते हैं. पुलिस ने आम जनता को आगाह किया है कि कोई भी व्यक्ति विदेशी नौकरी, कारोबार या विशेष कूटनीतिक सहायता के नाम पर भारी रकम मांगे तो सतर्क रहें.
जैन का अतीत: विवाद और अपराध
हर्षवर्धन जैन एक अमीर कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखता है और उसने विदेश में पढ़ाई की है. उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स के अनुसार, वह अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क का हिस्सा रहा है और विदेशी कंपनियों के नाम पर वित्तीय धोखाधड़ी करता था. इससे पहले 2012 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे अवैध रूप से सैटेलाइट फोन रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था.
द हिंदू ने एसटीएफ के एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि जैन ने गाज़ियाबाद के एक निजी कॉलेज से बैचलर ऑफ बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है और लंदन से मास्टर्स इन बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की डिग्री हासिल की है.
उसके पिता जेडी जैन एक उद्योगपति हैं और गाज़ियाबाद में रोलिंग मिल के मालिक हैं. उसके परिवार की राजस्थान में ‘जे.डी. मार्बल्स’ नाम की संगमरमर की खदानें भी हैं, जो पहले लंदन को संगमरमर निर्यात करती थीं.
साल 2000 में हर्षवर्धन जैन का संपर्क विवादित आध्यात्मिक गुरु चंद्रास्वामी से हुआ था.
एसटीएफ अधिकारी ने बताया, ‘चंद्रास्वामी ने ही जैन की मुलाकात सऊदी हथियार डीलर अदनान खशोगी और भारत में जन्मे तुर्की नागरिक अहसान अली सैयद से करवाई थी. जैन ने सैयद के साथ मिलकर यूके में दर्जनभर से ज़्यादा ब्रोकरेज कंपनियां बनाई थीं. 2006 में वह दुबई के उम्म-अल-कुवैन में अपने एक कज़िन के जरिए जाकर बस गया.’
‘विदेश यात्राओं के दौरान उसने हैदराबाद के शफीक और दुबई के इब्राहिम अली-बिन-शार्मा के साथ मिलकर कई कंपनियां बनाई, जो दिखावे के लिए विदेशों में नौकरियों और व्यापार सौदों की पेशकश करती थीं. दरअसल, ये कंपनियां वित्तीय धोखाधड़ी और संभवतः अवैध हथियार सौदों के लिए बनाई गई थीं.’ अधिकारी ने कहा.
हर्षवर्धन जैन 2011 में भारत लौट आया और 2012 में गाज़ियाबाद पुलिस ने उसे सैटेलाइट फोन रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था. उसके खिलाफ कविनगर थाना में टेलीग्राफ बायर्स अनलॉफुल पॉज़ेशन एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था.
