असम ट्रिब्यूनल ने बंगाल के एक और व्यक्ति को भारतीय नागरिकता साबित करने को कहा

असम के फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल्स ने पश्चिम बंगाल के कूच बिहार निवासी निशिकांत दास से भारतीय नागरिक होने का प्रमाण देने को कहा है. गत जनवरी कूच बिहार के ही एक अन्य व्यक्ति उत्तम कुमार ब्रजबासी को इसी तरह का नोटिस दिया था. इस हफ़्ते की शुरुआत में फलकटा की अंजलि सील नाम की एक महिला को भी ऐसा ही नोटिस मिला था.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: 26 वर्ष पहले मजदूरी के लिए यात्रा के दौरान असम पुलिस द्वारा अवैध बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिए गए कूच बिहार (पश्चिम बंगाल) निवासी निशिकांत दास से अब असम के विदेशी न्यायाधिकरण ने भारतीय नागरिक होने का प्रमाण देने को कहा है.

दास और अन्य लोगों द्वारा यह खुलासा ऐसे समय में किया गया है जब विपक्षी पार्टियां बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कड़ा विरोध कर रही हैं, जिसमें चुनाव आयोग का दावा है कि उसने पहले ही 65 लाख नामों को हटा दिया है.

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, 75 वर्षीय दास उत्तर बंगाल के तीसरे बंगाली हिंदू हैं जिन्हें विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा नोटिस दिया गया है.

दास ने टीवी चैनलों को बताया, ‘मैंने न्यायाधिकरण के समक्ष ज़मीन के मालिकाना हक, अपना मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज़ दिखाए. न्यायाधिकरण ने उन्हें अस्वीकार कर दिया.’

उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण ने उनसे ऐसे दस्तावेज़ दिखाने को कहा जो साबित करें कि उनके दिवंगत पिता, देबेंद्र, भारत में मतदाता थे.

दास को असमिया भाषा में भेजे गए एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने 25 मार्च, 1971 के बाद अवैध रूप से असम में प्रवेश किया था.

दास ने कहा, ‘कई साल पहले मैं मज़दूरी करने के लिए गुवाहाटी गया था. उस समय भी मुझे बांग्लादेशी होने के संदेह में असम पुलिस ने हिरासत में लिया था. मेरे सभी दस्तावेज़ दिखाने के बाद मुझे रिहा कर दिया गया. छह महीने और गुवाहाटी में रहने के बाद मैं अपने घर लौट आया. तब से मैं गुवाहाटी नहीं गया.’

दास ने कहा कि उन्होंने अपने दिवंगत पिता के वास्तविक भारतीय मतदाता होने की पुष्टि करने वाले दस्तावेज़ हासिल कर लिए हैं, लेकिन उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने इन्हें न्यायाधिकरण के समक्ष प्रस्तुत नहीं करने का फैसला किया है.

कूच बिहार के एक अन्य निवासी, उत्तम कुमार ब्रजबासी, बंगाल में रहने वाले उन पहले बंगालियों में शामिल हैं जिन्हें इस साल जनवरी में असम के विदेशी न्यायाधिकरण ने तलब किया था. ब्रजबासी ने दावा किया था कि उन्होंने कभी कूच बिहार से बाहर कदम नहीं रखा.

उस समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने असम में हिमंता बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की थी. तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना को मतदाता सूची के प्रस्तावित स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (एसआईआर) और पश्चिम बंगाल में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की कथित कोशिश से जोड़ा था. उनका दावा था कि यह 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले बंगालियों को परेशान करने की एक चाल है.

अखबार के अनुसार, इस हफ़्ते की शुरुआत में फलकटा की अंजलि सील नाम की एक महिला को भी ऐसा ही नोटिस मिला था.