नई दिल्ली: ओडिशा के बारगढ़ जिले में सोमवार को 13 वर्षीय एक लड़की ने कथित तौर पर खुद को आग लगाने के कुछ ही घंटों बाद दम तोड़ दिया. इसके साथ ही राज्य में एक महीने के भीतर यह चौथी ऐसी घटना है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि जिले के पैकमल ब्लॉक की आठवीं कक्षा की छात्रा अपनी मां से मिलने और रक्षाबंधन मनाने के लिए सप्ताहांत में अपने मामा के घर गई थी.
बारगढ़ के पुलिस अधीक्षक अभिलाष जी. ने बताया, ‘सोमवार सुबह करीब 7:30 बजे वह घर के पास एक खेत में गई और अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर खुद को आग लगा ली. कुछ ग्रामीणों ने उसे देखा और आग बुझाई, लेकिन इससे पहले वह गंभीर रूप से झुलस चुकी थी. उसे बुर्ला के वीमसर (VIMSAR) मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई.’
अखबार के अनुसार, घटना के पीछे का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं है और मामले की जांच जारी है. पुलिस ने बताया कि लड़की के पिता प्रवासी मज़दूर हैं, जबकि उसकी मां अपने माता-पिता के घर पर रह रही है.
विपक्ष ने भाजपा सरकार की आलोचना की
केंद्रपाड़ा में हुई इस मौत की तीखी आलोचना हुई और सभी दलों के नेता शोक संतप्त परिवार से मिलने पहुंचे. नवीन पटनायक ने भाजपा सरकार की आलोचना की.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजद) सुप्रीमो नवीन पटनायक ने मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर आत्मदाह से हुई मौतों की बढ़ती संख्या को लेकर ‘घोर उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता’ का आरोप लगाया है.
पटनायक ने बुधवार को कहा, ‘भाजपा सरकार के कदम उठाने से पहले और कितनी माताओं को अपनी बेटियों की अस्थियां थामनी पड़ेंगी? यह सरकार की ओर से घोर उपेक्षा है.’
एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘यह जानकर दुख होता है कि एक महीने के भीतर तीन युवतियों ने बिल्कुल एक जैसी परिस्थितियों में अपनी जान गंवा दी है. इन मासूम जिंदगियों को निगलने वाली हर घातक आग ओडिशा में एक परेशान करने वाले पैटर्न की ओर इशारा करती है. हमारी धरती की तीन बेटियां दिनदहाड़े मर गईं क्योंकि उदासीन प्रशासन हर मोड़ पर उनकी चीखें सुनने को तैयार नहीं था. राज्य भर में लगभग हर रोज़ महिलाओं के खिलाफ ऐसे कई जघन्य अपराध सामने आ रहे हैं. राज्य की भाजपा सरकार के जागने से पहले और कितनी चिताएं जलेंगी?’
पटनायक ने इन घटनाओं को ओडिशा में महिलाओं के लिए असुरक्षा के व्यापक माहौल से भी जोड़ा.
इससे पहले 22 जुलाई को एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जाजपुर में बलात्कार, जगतसिंहपुर और मलकानगिरी में सामूहिक बलात्कार और पुरी में यौन उत्पीड़न की खबरों का हवाला देते हुए इन्हें राज्य में व्याप्त ‘महिलाओं के खिलाफ अपराधों की चिंताजनक लहर’ का हिस्सा बताया.
बीजद नेता ने पुलिस की जवाबदेही कमज़ोर करने के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप को ज़िम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ‘यौन हमलों में यह वृद्धि कानून प्रवर्तन में चिंताजनक गिरावट को दर्शाती है. जब पुलिस के विभिन्न पदों पर हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव होता है, तो जवाबदेही कमज़ोर हो जाती है, और इसकी सबसे पहले कीमत महिलाओं और लड़कियों को चुकानी पड़ती है.’
मालूम हो कि ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में 6 जुलाई सुबह एक 20 वर्षीय स्नातक अंतिम वर्ष की छात्रा अपने घर के अंदर गंभीर रूप से जलने के बाद मृत पाई गई थी. पुलिस ने बताया था कि कॉलेज छात्रा ने अपने बॉयफ्रेंड द्वारा ब्लैकमेल किए जाने के कारण कथित तौर पर खुद को आग लगा ली थी.
इसके बाद 19 जुलाई को एक 15 वर्षीय लड़की को तीन अज्ञात युवकों ने उस समय आग लगा दी जब वह पुरी जिले में एक दोस्त के घर जा रही थी.
पुलिस ने बताया कि लड़की अपनी दोस्त को किताब देने वहां जा रही थी. जब वह रास्ते में थी, तभी तीन अज्ञात युवक मोटरसाइकिल पर आए और उसके चेहरे पर रुमाल रखकर उसे बेहोश कर दिया. फिर, वे उसे पास के एक नदी किनारे ले गए और लड़की पर पेट्रोल डालकर उसे आग लगाने की कोशिश की.
उसे एक ग्रामीण ने बचाया, और पिपली सीएचसी ले गए. बाद में उसकी हालत बिगड़ने पर उसे एम्स भुवनेश्वर ले जाया गया. एम्स के अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता लगभग 70 प्रतिशत तक जल गई थी और उसके निचले हिस्से पर सबसे ज़्यादा चोटें आई थीं. इलाज के दौरान 2 अगस्त को उसकी मौत हो गई.
इससे पहले बीते 12 जुलाई को ओडिशा के बालासोर के फकीर मोहन ऑटोनोमस महाविद्यालय की 20 वर्षीय छात्रा ने एक प्रोफेसर द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई न होने के बाद आत्मदाह का प्रयास किया था, वह 90 प्रतिशत जल चुकी थी और 14 जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
छात्रा द्वारा आत्महत्या का प्रयास करने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने बालासोर कॉलेज के शिक्षा विभाग के सहायक प्रोफेसर समीर कुमार साहू को गिरफ्तार कर लिया.
छात्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि साहू उससे ‘यौन संबंध’ की मांग रहा था और धमकी दे रहा था कि अगर उसने ऐसा नहीं किया तो वह उसका शैक्षणिक करियर बर्बाद कर देगा. हालांकि आंतरिक शिकायत समिति ने उसे सात दिनों के भीतर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ. उसने स्थानीय पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई.
मामले में कार्रवाई न करने पर उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज के प्रिंसिपल को भी निलंबित कर दिया.
