प्रेस की स्वतंत्रता में गिरावट पर सरकार ने कहा- विदेशी संगठनों से मान्यता की ज़रूरत नहीं

भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट और पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसा और धमकी के मामलों के बारे में संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि 'भारत में एक जीवंत प्रेस और मीडिया इको सिस्टम है, जिसे विदेशी संगठनों से मान्यता की आवश्यकता नहीं है.'

(फोटो साभार: Flickr/CC BY 2.0)

नई दिल्ली: भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में गिरावट और पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और धमकी के मामलों को लेकर संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा है कि ‘भारत में एक जीवंत प्रेस और मीडिया इकोसिस्टम है, जिसे विदेशी संगठनों से मान्यता की आवश्यकता नहीं है.’

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज कुमार झा ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री से इस संबंध में सवाल पूछा था.

मनोज झा ने सवाल किया था कि क्या सरकार ने भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग में आई गिरावट और पत्रकारों के खिलाफ बढ़ती धमकियों, कानूनी प्रताड़ना और हिंसा की घटनाओं की समीक्षा की है? और क्या प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी संस्थाओं को राजनीतिक दखल से बचाने और मज़बूत करने के लिए कोई कदम उठाए गए हैं?

इसके अलावा मनोज झा ने ये भी पूछा था कि क्या यह सुनिश्चित करने के लिए कोई उपाय किए जा रहे हैं कि पत्रकार सरकार या राजनीतिक प्रभाव से भय या दबाव मुक्त होकर अपना काम कर सकें.

हालांकि, मनोज झा के सवालोंं के जवाब स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए और अपनी प्रतिक्रिया में सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा, ‘भारत में एक जीवंत और सक्रिय मीडिया व्यवस्था है, जिसे विदेशी संगठनों से मान्यता लेने की ज़रूरत नहीं है.’

भारत की प्रेस रैंकिंग में गिरावट का आकलन करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में मनोज झा के प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देने के बजाय सूचना एवं प्रसारण और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने अपने उत्तर में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनी ढांचे और भारत में प्रकाशनों की संख्या का विवरण दिया.

इसके आगे सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि भारत में 1.54 लाख से अधिक प्रिंट प्रकाशन, 900 से अधिक निजी सैटेलाइट चैनल और डिजिटल मीडिया पर कई प्रकाशक हैं, जिनमें ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म, समाचार पत्रों की ई-प्रतिकृति, डिजिटल समाचार पत्र, समाचार वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर समाचार चैनल आदि शामिल हैं.

उत्तर में यह भी कहा गया कि संविधान का अनुच्छेद 19 (1) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है और प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया जैसे निकाय पहले से ही अस्तित्व में हैं, जिसका नेतृत्व सर्वोच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करते हैं और यह प्रेस की स्वतंत्रता में कटौती, पत्रकारों पर शारीरिक हमले/आक्रमण आदि से संबंधित प्रेस के सदस्यों द्वारा दायर शिकायतों पर निर्णय लेता है.

सरकार के जवाब में यह भी कहा गया है कि प्रेस परिषद (जांच प्रक्रिया) विनियम, 1979 के विनियम 13 के तहत, पीसीआई को प्रेस की स्वतंत्रता और उसके उच्च मानकों की सुरक्षा से संबंधित ज्वलंत मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेने का भी अधिकार है.

इसके आगे बताया गया है कि इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में प्रेस की स्वतंत्रता केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और आईटी नियम, 2021 के तहत एक स्व-नियामक तंत्र के माध्यम से भी सुनिश्चित की जाती है. शिकायतों के समाधान के लिए एक तीन-स्तरीय स्व-नियामक व्यवस्था (सेल्फ रेगुलेटरी सिस्टम) मौजूद है, जिसमें पहला स्तर प्रसारक/प्रकाशक स्तर पर है और उसके बाद दूसरे स्तर पर स्व-नियामक निकाय हैं.

इस संबंध में बाद में आरजेडी सांसद झा ने सोसल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैंने हाल ही में राज्यसभा में यह सवाल पूछा था और इसका ‘जवाब’ यहां देखा जा सकता है.

उन्होंने आगे कहा, ‘मेरी सरकार जो कहती है और जो करती है, उसके बीच मीलों का फासला है.’