गाज़ा के अस्पताल पर इज़रायली हमले में पांच पत्रकारों सहित कम से कम 20 लोगों की मौत

दक्षिणी गाज़ा के नासिर अस्पताल पर सोमवार को इज़रायली मिसाइलों के हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पांच पत्रकार भी शामिल हैं. इसी महीने हुए एक हमले में गाज़ा में ही कई मीडियाकर्मी मारे गए थे, जिनमें से पांच अल जज़ीरा के लिए काम करते थे. उस समय इज़रायल ने दावा किया था कि वे हमास से जुड़े थे.

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इस तस्वीर में एक व्यक्ति खून से सना कैमरा दिखा रहा है जिसे 33 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार मरियम दग्गा उस समय अपने साथ लिए हुए थीं जब दक्षिणी ग़ाज़ा पट्टी के खान यूनिस स्थित नासिर अस्पताल पर हुए इज़रायली हमले में उनकी मौत हो गई. (फोटो: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, सोमवार (25 अगस्त) को दक्षिणी गाजा के नासिर अस्पताल पर इजरायली मिसाइलों के हमले में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, जिनमें पांच पत्रकार भी शामिल हैं.

गाजा सरकार के मीडिया कार्यालय ने अल जज़ीरा को बताया कि हमले के समय पत्रकार अस्पताल में ड्यूटी पर थे.

एसोसिएटेड प्रेस ने बताया कि पहला हमला अस्पताल की सबसे ऊपरी मंजिल पर हुआ, जिसका इस्तेमाल अक्सर लाइव कवरेज के लिए किया जाता है. कुछ मिनट बाद दूसरा हमला तब हुआ जब चिकित्सा कर्मचारी और पत्रकार घायलों की मदद के लिए दौड़े.

रॉयटर्स ने कहा कि एजेंसी के साथ अनुबंधित एक कैमरामैन हुसाम अल-मसरी की छत के ठीक नीचे ऊपरी मंजिल पर लाइव प्रसारण स्थल के पास मौत हो गई. अल-मसरी रॉयटर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लाइव फ़ीड का संचालन कर रहे थे और गाज़ा के अंदर की घटनाओं को दिखाने के लिए दुनिया भर के समाचार आउटलेट्स के साथ साझा करते थे. उनकी मौत के बाद फ़ीड अचानक बंद कर दी गई है.

रॉयटर्स की तस्वीरों के अनुसार, शोक संतप्त लोग सोमवार को खान यूनिस से उनके पार्थिव शरीर को ले गए.

एजेंसी ने बताया कि स्वतंत्र पत्रकार मोआज़ अबू ताहा, जो कभी-कभार रॉयटर्स के लिए लेख लिखते थे, भी मृतकों में शामिल हैं. रॉयटर्स ने बताया कि उसके फ़ोटोग्राफ़र हातेम खालिद घायल हो गए हैं और उनका इलाज चल रहा है.

अल जज़ीरा ने अपने फोटो पत्रकार मोहम्मद सलामा की मौत की पुष्टि की और बताया कि उन्होंने मिडिल ईस्ट आई में भी योगदान दिया था. उन्होंने बताया कि गाजा के मीडिया कार्यालय के मुताबिक अन्य पीड़ितों में 33 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार मरियम अबू दग्गा , जिन्होंने एसोसिएटेड प्रेस और इंडिपेंडेंट अरेबिक के लिए काम किया था, और मिडिल ईस्ट आई और कुद्स फीड नेटवर्क से जुड़े अहमद अबू अज़ीज़ शामिल हैं.

एपी ने कहा कि अबू दग्गा की फोटोग्राफी ने गाजा के मानवीय संकट को प्रभावशाली ढंग से दर्ज किया है. हाल ही में वह नासेर में थीं और कुपोषित बच्चों को बचाने के लिए अस्पताल के संघर्ष पर रिपोर्टिंग कर रही थीं.

समाचार एजेंसी के अनुसार, दग्गा अक्सर नासेर में ही रहती थीं, और हाल ही में उन्होंने बच्चों को भुखमरी से बचाने के लिए अस्पताल के संघर्ष पर रिपोर्टिंग की थी, जिसमें कई दर्दनाक तस्वीरें भी शामिल हैं.

वह अक्सर गाज़ा में अपने जीवन को दर्शाते हुए फ़ेसबुक पर छोटी-छोटी, गंभीर पोस्ट शेयर करती थीं. रविवार को अपने आखिरी पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘जब आप अपनी सबसे बेशकीमती चीज़ को मिट्टी में दफ़्न होते हुए देखते हैं, तभी आपको एहसास होता है कि ज़िंदगी कितनी छोटी है.’ उनके पीछे एक 12 साल का बेटा है, जिसे पहले ही गाज़ा से निकाला जा चुका है.

समाचार संगठनों ने हमले की निंदा की

इसके बाद कई समाचार संगठनों ने शोक और निंदा व्यक्त की. रॉयटर्स ने कहा कि वह अल-मसरी की मौत से ‘हतप्रभ’ है और खालिद के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की मांग की है. एजेंसी के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम तत्काल और जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और गाजा और इजरायल के अधिकारियों से हातेम के लिए तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद करने का अनुरोध किया है.’

अल जज़ीरा ने इस हमले की निंदा करते हुए इसे पत्रकारों पर जानबूझकर किया गया हमला बताया. संस्था ने एक बयान में कहा, ‘गाज़ा में हमारे शहीद पत्रकारों का खून अभी सूखा भी नहीं था कि इजरायली सेना ने अल जज़ीरा के कैमरामैन मोहम्मद सलामा और तीन अन्य फ़ोटो पत्रकारों पर एक और हमला कर दिया.’

इजरायली डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता नदाव शोशानी ने एक्स पर इस बात की पुष्टि की है कि हमला किया गया था. इजरायली सेना ने कहा कि हमला अस्पताल परिसर के अंदर हमास लड़ाकों को निशाना बनाकर किया गया था, चीफ ऑफ स्टाफ हर्ज़ी हालेवी ने जांच के आदेश दिए हैं और नागरिकों के हताहत होने पर खेद व्यक्त किया है. साथ ही ज़ोर देकर कहा है कि पत्रकारों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया.

बता दें कि सोमवार का हमला इसी महीने हुआ दूसरा ऐसा हमला है जिसमें मीडियाकर्मी हताहत हुए हैं. इससे पहले हुए हमले में गाजा में ही कई मीडियाकर्मी मारे गए थे, जिनमें से कुछ अल जज़ीरा के लिए काम करते थे. उस समय इजरायल ने दावा किया था कि वे हमास से जुड़े थे.

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक इजरायली सेना द्वारा 200 से ज़्यादा पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है.

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह गाजा के नासिर अस्पताल पर इजरायली हमलों से ‘खुश नहीं’ हैं. ट्रंप ने कहा, ‘मैं इससे खुश नहीं हूं… हमें इस भयावह स्थिति को खत्म करना होगा.’ उन्होंने जोड़ा कि गाजा में आतंकवादी समूहों द्वारा जिन बीस इजरायली लोगों को बंधक बनाए जाने की आशंका है, उनमें से एक या दो ‘चले’ गए हैं.

फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉ ने हमलों को ‘असहनीय’ बताया और इस बात पर ज़ोर दिया कि नागरिकों और पत्रकारों की हर हाल में सुरक्षा की जानी चाहिए.

मैक्रॉ ने आगे कहा, ‘मीडिया को संघर्ष की वास्तविकता को उजागर करने के लिए स्वतंत्र रूप से अपना मिशन पूरा करने में सक्षम होना चाहिए. मानवीय सहायता वापस आनी चाहिए. हम इजरायल से अंतरराष्ट्रीय क़ानून का सम्मान करने का आह्वान करते हैं.’

अक्टूबर में हुए आतंकवादी हमलों के दौरान बंधक बनाए गए 50 इजरायली अभी भी गाज़ा में हैं, और इजरायल ने पहले अनुमान लगाया था कि उनमें से 20 अभी भी जीवित हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शमदासानी ने कहा कि इन हत्याओं से ‘दुनिया को स्तब्ध होना चाहिए – स्तब्ध होकर चुप रहने के लिए नहीं, बल्कि कार्रवाई करने के लिए, जवाबदेही और न्याय की मांग करने के लिए.’ उन्होंने ज़ोर देकर कहा, ‘पत्रकार निशाना नहीं हैं, अस्पताल निशाना नहीं हैं.’

फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के प्रमुख फिलिप लाज़ारिनी ने कहा कि ये हमले ‘अकाल के बीच चुपचाप मर रहे बच्चों के बारे में रिपोर्ट करने वाली आखिरी बची हुई आवाज़ों को खामोश कर रहे हैं.’

लाज़ारिनी ने एक्स पर यह लिखते हुए कि ‘यह कोई नया चलन नहीं बन सकता,’ जोड़ा कि दुनिया की उदासीनता और निष्क्रियता चौंकाने वाली है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ट्रेडोस एडहेनॉम घेब्रेयेसस ने भी हमले की निंदा करते हुए एक्स पर कहा, ‘इस बात को इससे ज़्यादा ज़ोर से नहीं कहा जा सकता- स्वास्थ्य सेवाओं पर हमले बंद करो. यह युद्धविराम का समय है!’

विदेशी प्रेस एसोसिएशन (एफपीए) ने ‘इजरायली रक्षा बलों और प्रधानमंत्री कार्यालय से तत्काल स्पष्टीकरण’ मांगा है. समूह ने आगे कहा कि इजरायल को ‘पत्रकारों को निशाना बनाने की अपनी घृणित प्रथा को हमेशा के लिए बंद करना होगा.’

अंतरराष्ट्रीय मीडिया निगरानी संस्था, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने कहा कि इजरायल को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.

सीपीजे की क्षेत्रीय निदेशक सारा कुदाह ने कहा, ‘इजरायल ने सोमवार सुबह नासिर अस्पताल में कम से कम पांच पत्रकारों की हत्या कर दी. इजरायल द्वारा सबकी नज़रों के सामने गाज़ा में पत्रकारों की हत्याएं जारी हैं, दुनिया बस यह सब होता हुआ देख रह रही है और हाल के इतिहास में प्रेस पर हुए सबसे भयावह हमलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है. ये हत्याएं अब बंद होनी चाहिए. अपराधियों को अब बेख़ौफ़ होकर ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए.’