गुजरात: पत्रकार महेश लांगा को कथित संवेदनशील दस्तावेज़ लीक करने के आरोप में गिरफ़्तार शख़्स की हिरासत में मौत

गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के क्लर्क निशिध जानी की साबरमती जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई है. वे पत्रकार महेश लांगा से जुड़े कथित दस्तावेज़ लीक मामले में गिरफ़्तार थे. जानी की मौत ने भ्रष्टाचार और जीएसटी घोटाले से जुड़े इस मामले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पत्रकार महेश लांगा. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: पत्रकार महेश लांगा को कथित तौर पर संवेदनशील दस्तावेज़ लीक करने के आरोप में हाल ही में गिरफ्तार किए गए गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के एक क्लर्क की साबरमती जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में मौत हो गई.

निशिध जानी नामक इस व्यक्ति की मौत ने भ्रष्टाचार और जीएसटी घोटाले के आरोपों से जुड़े इस मामले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

साबरमती केंद्रीय कारागार में बंद जानी की सोमवार (29 सितंबर) देर रात रहस्यमय परिस्थितियों में तबियत बिगड़ने के बाद मौत हो गई.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें दो हफ्ते पहले लांगा से कथित तौर पर जुड़े एक संवेदनशील दस्तावेज़ लीक मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह पहले से ही फेफड़ों से संबंधित बीमारी से पीड़ित थे.

गांधीनगर के एसपी रवि तेजा वासमसेट्टी के अनुसार, जेल अधिकारियों ने जानी को अहमदाबाद सिविल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने इलाज के दौरान उन्हें मृत घोषित कर दिया.

जानी की गिरफ़्तारी लांगा के ख़िलाफ़ दर्ज मामले से जुड़ी थी, जब गुजरात मैरीटाइम बोर्ड से जुड़े दस्तावेज़ कथित तौर पर पत्रकार के घर से मिले थे.

लांगा उस समय गुजरात की एक जेल में बंद थे जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत भी आरोप लगाए थे और उनके ख़िलाफ़ अभियोजन शिकायत (आरोप पत्र के समान) दर्ज की थी.

लांगा पिछले साल 9 अक्टूबर से जीएसटी चोरी के एक मामले में जेल में हैं, जो गुजरात पुलिस द्वारा उनके ख़िलाफ़ दर्ज किए गए तीन मामलों में से एक है.

पत्रकारों ने इस बात पर गौर किया था कि एक रिपोर्टर को अपने काम की प्रकृति के कारण संवेदनशील दस्तावेजों का अध्ययन करना पड़ता है.

लांगा की गिरफ्तारी के बाद से कई पत्रकारों ने उनका समर्थन किया. कुछ ने रूसी मूल के हीरों पर प्रतिबंध के गुजरात के हीरा उद्योग पर पड़ने वाले प्रभाव पर उनकी पिछली स्टोरी पर भी ध्यान दिलाया. लांगा पिछले दो दशकों से गुजरात से संबंधित मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते रहे हैं.