भ्रामक विज्ञापन के लिए दृष्टि आईएएस पर 5 लाख का जुर्माना, छात्रों ने किया फैसले का स्वागत

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के नतीजों को लेकर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के अनुसार संस्थान ने विज्ञापन में दावा किया था कि उसके कोचिंग से ‘216+’ उम्मीदवारों का चयन हुआ है, लेकिन उनमें से 162 छात्रों ने केवल संस्थान का मुफ़्त इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम लिया था.

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के नतीजों को लेकर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने के मामले में प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. (फोटो: @drishtiias)

नई दिल्ली: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) 2022 के नतीजों को लेकर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान दृष्टि आईएएस पर 5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. इस कदम का अभ्यर्थियों ने स्वागत किया है. अभ्यर्थियों ने कहा है कि दृष्टि आईएएस जैसे संस्थानों को भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित करने से बचना चाहिए क्योंकि यह विद्यार्थियों को, ख़ासकर छोटे शहरों से आने वाले हिंदी क्षेत्र के विद्यार्थियों को भ्रमित करते हैं.  

प्राधिकरण के अनुसार, दृष्टि आईएएस ने विज्ञापन जारी कर दावा किया था कि उसके कोचिंग से पढ़े ‘216+’ उम्मीदवारों का चयन हुआ है. साथ ही सफल उम्मीदवारों के नाम व तस्वीरें प्रकाशित की थीं. 

सीसीपीए ने एक बयान में कहा कि ‘जांच में पाया गया कि इस दावे में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई थी. विशेष रूप से यह कि उम्मीदवारों ने संस्थान के कौन-से कोर्स किए थे और कितनी अवधि के लिए किए थे.’ 

प्राधिकरण का कहना है कि अधिकांश उम्मीदवारों ने केवल उनका मुफ़्त इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी) लिया था. ‘कुल 216 उम्मीदवारों में से 162 (करीब 75%) ने केवल संस्थान का मुफ़्त इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम को किया था, जबकि केवल 54 उम्मीदवार ही आईजीपी के साथ अन्य सशुल्क कोर्स में नामांकित थे.’

सीसीपीए ने कहा कि इस तरह की जानकारी छिपाने से छात्रों और अभिभावकों को यह भ्रम हुआ कि यूपीएससी परीक्षा के सभी चरणों में उम्मीदवारों की सफलता में दृष्टि आईएएस की गहरी भूमिका रही.

प्राधिकरण ने इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(28) के तहत भ्रामक विज्ञापन माना.

यह दृष्टि आईएएस पर इस तरह की दूसरी कार्रवाई है. पिछले साल सितंबर में भी प्राधिकरण ने संस्थान पर 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था, जब उसने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ‘150+ चयन’ का दावा किया था. जांच में पाया गया था कि अधिकांश उम्मीदवार केवल निशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम से जुड़े थे.

प्राधिकरण ने कहा कि बार-बार ऐसा करने से यह स्पष्ट है कि संस्थान ने उपभोक्ता संरक्षण मानकों की अनदेखी की है. 

सीसीपीए के अनुसार, अब तक देशभर के 54 कोचिंग संस्थानों को भ्रामक विज्ञापनों और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं. इनमें से 26 संस्थानों पर कुल 90 लाख रुपए से अधिक के जुर्माने लगाए जा चुके हैं. 

प्राधिकरण ने सभी कोचिंग संस्थानों को सलाह दी है कि वे अपने विज्ञापनों में पारदर्शिता रखें और केवल तथ्यों पर आधारित दावे करें, ताकि छात्र निष्पक्ष और सूचित निर्णय ले सकें.

दृष्टि आईएएस की दलीलों को किया खारिज 

सीसीपीए ने दृष्टि के भ्रामक विज्ञापन का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह आदेश पारित किया है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान दृष्टि आईएएस ने यह दलील दी कि:

  • विज्ञापन को स्वेच्छा से हटा लिया गया था.
  • इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम (आईजीपी) तैयारी का एक वैध और महत्वपूर्ण चरण है, जो कुल 2025 अंकों में से 275 अंक का हिस्सा रखता है.
  • जब ये विज्ञापन प्रकाशित किए गए उस समय ऐसे विज्ञापनों को नियंत्रित करने के लिए कोई दिशा-निर्देश मौजूद नहीं थे.
  • अन्य कोचिंग संस्थानों के खिलाफ दिए गए समान सीसीपीए आदेशों को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रीड्रेसल कमीशन ने स्थगित कर दिया था.
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सीसीपीए के अधिकार को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई हैं.
  • हमने (दृष्टि आईएएस) यूपीएससी सीएसई 2023 के नतीजों से शुरू करते हुए अपने बाद के विज्ञापनों में सफल उम्मीदवारों द्वारा लिए गए विशेष कोर्सों की जानकारी देना शुरू कर दिया है.

सीसीपीए ने संस्थान की इन दलीलों को खारिज कर दिया और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 20 और 21 के तहत उनपर जुर्माना लगाया और आदेश की प्राप्ति के 15 दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया.

दृष्टि का बयान  

दृष्टि आईएस ने सीओओ विकास तिवारी के नाम से प्रेस रिलीज़ जारी कर इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है. प्रेस रिलीज़ में कहा गया है, ‘सीसीपीए द्वारा 2021 और 2022 की सिविल सेवा परीक्षा के परिणामों के संबंध में लगभग सभी संस्थाओं को नोटिस दिया गया था जिनमें हमारी संस्था भी शामिल थी. उस समय तक सीसीपीए की ओर से विज्ञापनों के संबंध में स्पष्ट निर्देश उपलब्ध नहीं थे, इसलिये यह गलती हुई. अब ऐसे निर्देश जारी हो चुके हैं. साल 2023 से हम उनका पूरी तरह पालन कर रहे हैं जिसका उल्लेख सीसीपीए के इस निर्णय में किया भी गया है. हम सीसीपीए की सक्रियता के लिये आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि नए नियम पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे. हम आगे भी इन नियमों के पालन के लिये प्रतिबद्ध रहेंगे.’

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और दृष्टि आईएएस के आईजीपी में शामिल रहने वाले विजेंद्र चौहान ने द वायर हिंदी से कहा, ‘इस पर फिलहाल मेरी कोई राय नहीं है. इस पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं होगा क्योंकि मैं दृष्टि आईएएस के इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल रहा हूं. मुझे इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, जहां मैं अपने विषय के विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुआ करता था.’ 

दृष्टि आईएएस ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि विज्ञापनों के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं जिसका संस्थान अनुपालन करेगी. लेकिन संस्थान ने इस बात का जिक्र नहीं किया कि उसके द्वारा प्रकाशित भ्रामक विज्ञापनों का छात्रों और अभिवावकों पर क्या प्रभाव पड़ा. विज्ञापनों को देख कर तमाम छात्रों ने संस्थान का कोर्स लिया होगा, जिन्होंने मोटी फ़ीस दी होगी. क्या उनके प्रति संस्थान की कोई जवाबदेही नहीं है?

दृष्टि आईएएस के संस्थापक और इसके सबसे प्रमुख नाम विकास दिव्यकीर्ति इस मसले पर अभी तक चुप हैं. द वायर हिंदी ने उनसे संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन इस संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि सीओओ विकास तिवारी द्वारा जारी प्रेस रिलीज ही उनका एकमात्र बयान है. 

छात्रों की प्रतिक्रिया 

कानपुर के राघव (बदला हुआ नाम) करोल बाग में रह कर यूपीएससी की तैयारी करते हैं. द वायर हिंदी से बात करते हुए उन्होंने दृष्टि आईएएस पर हुई इस कार्रवाई को सही ठहराया है. 

वह कहते हैं, ‘ज्यादातर बच्चे छोटे शहर या कस्बों के होते हैं. वह ब्रांड वैल्यू देख कर संस्थान का चुनाव करते हैं. और ब्रांड वैल्यू उस संस्थान का ज्यादा होता है जहां के ज्यादा छात्रों का चयन होता है.’ 

राघव ने ऐसे विज्ञापनों को भ्रामक बताते हुए कहा, ‘कोचिंग संस्थानों को अपने विज्ञापनों में यह साफ साफ लिखना चाहिए कि चयनित अभ्यर्थियों में से किसने संस्थान का पूरा कोर्स लिया था, या किसने बस टेस्ट सीरीज ली थी या फिर कौन सिर्फ़ निशुल्क इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल हुआ था. यह न बताना भ्रामक है और छात्रों को अंधेरे में रखना है.’

उन्होंने सीसीपीए के इस कदम का स्वागत किया है और कहा है कि ऐसा करने वाले अन्य संस्थानों के ख़िलाफ़ भी उचित कार्रवाई होनी चाहिए.

रांची के अनिकेत ने भी दृष्टि आईएएस पर लगे इस जुर्माने को सही ठहराया है. वह कहते हैं, ‘पारदर्शिता तो होनी ही चाहिए. नहीं तो यह भी हो सकता है कि किसी ने अगर किसी संस्थान का सिर्फ़ फ्री टेस्ट सीरीज लिया हो या फिर उनके फ्री स्टडी मटेरियल को देखा हो तो उनका भी नाम ये लोग अपने विज्ञापन में डाल दे सकते हैं, या क्या पता.. डालते भी होंगे. क्यूंकि सभी का डेटा तो उनके पास होता ही है. अगर आप उनकी वेबसाइट पर फ्री टेस्ट सीरीज या फ्री स्टडी मटेरियल को देखते हैं तो इसके लिए आपको लॉग इन करना होता है, जिससे आपकी सारी जानकारी उनके पास सेव हो जाती है.’