नई दिल्ली: देहरादून के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका को निलंबित कर दिया गया है. शिक्षा विभाग ने छात्रों से शारीरिक श्रम करवाते हुए एक वीडियो का संज्ञान लिया है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (6 अक्टूबर) को रायपुर ब्लॉक के बंजारावाला स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में आठ छात्रों को फावड़े और गमलों/टोकरियों से बजरी उठाते हुए कथित वीडियो में दिखाया गया है. स्कूल में नामांकित कुछ यूनिफार्म पहने बच्चे अपने सिर पर रेत और मिट्टी ढोते हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि अन्य फावड़े और कुदाल से मिट्टी को गमलो में भरते हुए दिखाई दे रहे हैं.
जिला शिक्षा विभाग ने बच्चों से जबरन काम करवाने की पुष्टि की है और प्रभारी प्रधानाध्यापिका अंजू मनादुली को निलंबित कर दिया है. मनादुली, जो 2009 से स्कूल में कार्यरत थीं, ने जुलाई में कार्यभार संभाला था.
इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं और स्कूल के सभी पांच शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. यह घटना सोमवार को स्कूल के भोजनावकाश के दौरान हुई.
निलंबन पत्र में कहा गया है कि ‘छात्रों से शारीरिक श्रम करवाया जा रहा था. यह विद्यालय के प्रधानाध्यापक की लापरवाही और अनुशासनहीनता को दर्शाता है. सोशल मीडिया और विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी और वीडियो के आधार पर यह पुष्टि हुई है कि छात्रों को रेत और बजरी उठाने के लिए कुदाल, बेलचे और गमले दिए गए थे. यह बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009, उत्तराखंड सरकार, महिला सशक्तिकरण विभाग और बाल विकास अधिसूचना, 2011 की धारा 13 का उल्लंघन है.’
जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के लिए विभाग से एक जांच अधिकारी नियुक्त करने का भी निर्देश दिया है. जांच अधिकारी को संबंधित पक्ष की सुनवाई, निष्पक्ष जांच, सहायक अध्यापक को आरोप पत्र प्रदान करने, विभागीय कार्रवाई पूरी करने और 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है.
उच्च शिक्षा सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि उन्होंने मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून से जांच रिपोर्ट मांगी है.
शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली के अनुसार, इस स्कूल में 309 छात्र हैं और इसकी स्थापना 1949 में हुई थी.
इस बीच, मनादुली ने दावा किया कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी और छात्रों ने खुद ही यह काम करने का बीड़ा उठा लिया.
उन्होंने कहा, ‘हम एक रेन वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक बना रहे थे, और मज़दूर बजरी और श्रम उपकरण वहीं छोड़ गए थे. बच्चों ने मुझसे पूछा कि क्या बजरी को ज़मीन के उस दलदली हिस्से पर डाला जा सकता है जहां बारिश का पानी जमा हो गया था. मैंने उनसे कहा कि हमें मज़दूरों के आने तक इंतज़ार करना होगा, लेकिन उन्होंने बिना किसी को बताए काम शुरू कर दिया. जब तक मुझे पता चला, मुझे निलंबन पत्र थमा दिया गया.’
मनादुली ने बताया कि ये छात्र आईएसबीटी के पास एक झुग्गी बस्ती से हैं.
