नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के मैदानगढ़ी इलाके में स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (एसएयू) की एक स्नातक छात्रा ने आरोप लगाया है कि रविवार (12 अक्टूबर) को चार लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने की कोशिश की.
हालांकि, पुलिस ने इस मामले में एफआईआर मंगलवार को दर्ज की है.
छात्रा के अनुसार, चार लोगों ने कथित तौर पर रविवार को उनका यौन उत्पीड़न किया, जिसमें विश्वविद्यालय कैंपस के गेट पर तैनात एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल थे.
इस दौरान एफआईआर दर्ज होने में देरी के कारण परिसर में व्यापक आंदोलन देखने को मिला, जहां विद्यार्थी हॉस्टल वार्डन और कुछ अन्य विश्वविद्यालय कर्मचारियों को निलंबित करने की मांग कर रहे हैं.
मैदानगढ़ी थाने में दर्ज एफआईआर में छात्रा ने कथित घटना का विस्तृत विवरण दिया है.
कई अपत्तिजनक ईमेल मिले
छात्रा के मुताबिक, घटना से कुछ दिन पहले उन्हें एक अपरिचित आईडी से एक ईमेल मिला था. इसमें उनसे देर रात परिसर स्थित गेस्ट हाउस के पास आने के लिए कहा गया था. इसके अगले दिन उन्हें उसी आईडी से एक और ईमेल मिला, जिसमें भेजने वाले ने कथित तौर पर इस बार अश्लील इमोजी और संदेश भी भेजे थे.
छात्रा ने बताया कि इस घटना ने उन्हें डरा दिया और तनाव में डाल दिया, जिसके बाद उन्होंने इस बारे में अपने कुछ करीबी दोस्तों से बात की.
एफआईआर में छात्रा के हवाले से कहा गया है, ‘मैंने कुछ दोस्तों को एक अनजान ईमेल आईडी से मिल रहे ईमेल के बारे में बताया. उनमें से कुछ रात करीब 11:27 बजे उस जगह पर गए जहां ईमेल भेजने वाले ने मुझे आने के लिए कहा था. उस समय वहां कोई मौजूद नहीं था.’
चूंकि छात्रा उस जगह पर नहीं गईं, इसलिए उन्हें अगले दिन एक और ईमेल मिला, और इस बार उसमें उनके ईमेल की डिस्प्ले पिक्चर का एक मॉर्फ्ड वर्ज़न था.
इस बारे में उन्होंने बताया, ‘भेजने वाले ने मुझे नग्न दिखाने के लिए मेरी तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की थी. ईमेल में भेजने वाले ने दावा किया था कि अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी, तो यह छेड़छाड़ की गई तस्वीर सभी छात्रों को भेज दी जाएगी.’
उन्होंने आगे बताया कि इस ईमेल ने उन्हें इतना सदमे में डाल दिया कि वे सुन्न पड़ गईं. बाद में उन्होंने किसी तरह हिम्मत जुटाई और परिसर के व्यस्त हिस्से की ओर चल पड़ीं.
एफआईआर में उनके हवाले से लिखा है, ‘एक समय मैं दीक्षांत समारोह केंद्र की ओर मुड़ी. यह जगह निर्माणाधीन है, और शाम तक निर्माण कार्य रुक जाता है.’
उनहोंने कहा कि गेट पर एक सिक्योरिटी गार्ड ने उनसे पूछा कि वह उस समय वहां क्या कर रही हैं. इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैं डाइनिंग हॉल जा रही हूं.’ छात्रा ने दावा किया कि गार्ड ने किसी को फोन किया था और एक ‘अधेड़ उम्र का आदमी’ वहां आया. वे दोनों की बातचीत नहीं सुन पा रही थीं. इतने में कुछ ही देर में दो और आदमी दौड़ते हुए वहां आ गए.
छात्रा ने बताया कि तब तक वह सीढ़ियों पर बैठ चुकी थी.
छात्रा की आपबीती
एफआईआर में छात्रा ने कहा है, ‘एक आदमी ने मुझसे पूछा कि मैं वहां से क्यों नहीं जा रही और सीढ़ियों पर क्यों बैठी हूं. जैसे ही मैं जाने के लिए उठी, उनमें से एक ने मेरे कंधे पकड़ लिए और बाकी ने मुझ पर हमला कर दिया.’
महिला ने आगे हमले और उसे ज़मीन पर कैसे गिराया गया, इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने कहा, ‘उनमें से एक ने मेरी जीभ के नीचे एक गोली रखने की कोशिश की. मैं उसे थूकने में कामयाब रही.’ छात्रा ने बताया है कि कथित घटना के कुछ ही मिनटों बाद किसी को खाने की ट्रॉली घसीटते हुए उनकी ओर आते सुना गया. उन्होंने दावा किया कि इसके बाद वे लोग घटनास्थल से भाग गए.
उन्होंने कहा, ‘जाने से पहले उनमें से एक ने मुझे थप्पड़ मारा.’
एफआईआर में यह नहीं बताया गया है कि जिन लोगों ने कथित तौर पर उन पर हमला किया, क्या वे वही लोग थे जिन्होंने उन्हें ईमेल करके घटनास्थल पर आने के लिए कहा था.
प्रशासन पर सवाल
एफआईआर में छात्रा ने एसएयू के उन कर्मचारियों का भी नाम लिया है, जिन्होंने कथित तौर पर इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया और उन्हें उनकी मां से बात करने से भी रोका.
छात्रा ने कहा कि हॉस्टल वार्डन ने उन्हें ही दोषी ठहराया और कहा कि उसने खुद अपने कपड़े फाड़े थे. एफआईआर में छात्रा ने बताया कि वार्डन ने उनसे कहा कि ‘तुम्हारे बहुत सारे बॉयफ्रेंड हैं.’
ख़बरों के अनुसार, पुलिस ने शुरुआत में छेड़छाड़ का मामला दर्ज करने पर विचार किया था, लेकिन छात्रा की विस्तृत बात सुनने के बाद भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत सामूहिक बलात्कार के प्रयास का मामला दर्ज किया गया.
सोमवार शाम से ही बड़ी संख्या में छात्र इकट्ठा हो गए और विश्वविद्यालय से कथित अपराधियों के नाम सार्वजनिक करने की मांग की.
प्रदर्शनकारी छात्रों में से एक ने द वायर को बताया, ‘लड़की को भेजे गए ईमेल विश्वविद्यालय की आधिकारिक आईडी से थे. हम मांग कर रहे हैं कि आरोपियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं और विश्वविद्यालय उन ईमेल भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए आईपी एड्रेस की पहचान करने के लिए आवश्यक कार्रवाई भी करे.’
एक विद्यार्थी ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को संभालने में न तो गंभीरता दिखाई और न ही संवेदनशीलता. एक अन्य छात्र का कहना था, ‘वे आरोप को मामूली बात मान रहे हैं और छात्रा को ही घटना के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.’
घटना के बाद विश्वविद्यालय ने एक समिति का गठन किया. शुरुआत में इस समिति में केवल स्टाफ के ही सदस्य थे, लेकिन छात्रों के आंदोलन तेज़ होने के बाद समिति में कुछ छात्र प्रतिनिधि भी शामिल किए गए.
एक छात्र ने आरोप लगाया कि समिति की कार्यवाही के बारे में छोत्रों को जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई और प्रशासन ने इस कार्यवाही की वीडियोग्राफी भी नहीं होने दी.
(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
