फैक्ट चेक: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न को विपक्ष द्वारा फैलाया गया ‘प्रोपगैंडा’ कहकर ख़ारिज कर दिया. हालांकि भाजपा राज के पिछले एक दशक में भारत के अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुसलमानों और ईसाइयों को हिंदुत्व चरमपंथियों के हमलों का सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ा है.
मुंबई के मीरा रोड स्थित रिहायशी इलाके में बकरीद की तैयारियों को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश के तहत ईद की कुर्बानी से पहले सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी द्वारा निर्धारित जगह पर बकरे रखने के विरोध में हिंदुत्ववादी समूह सुअर लेकर पहुंचे. इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें अफ़रातफ़री के बीच पुलिस, पत्रकारों और लोगों की भीड़ को देखा जा सकता है.
द वायर की यह पड़ताल दिखलाती है कि बीतते समय के साथ दोषी याचिकाएं एनआईए के लिए दोषसिद्धि हासिल करने का एक सटीक और आसान रास्ता बन गई हैं. लेकिन, इस आसान रास्ते ने सैकड़ों युवाओं को इतने लंबे समय तक जेल की सलाखों के पीछे रखने का काम किया है कि उनके पास जेल से रिहाई पाने के लिए अपना दोष स्वीकार कर लेने के अलावा कोई वास्तविक विकल्प ही नहीं बचता.
एल्गार परिषद केस: मुंबई प्रेस क्लब बैठक को लेकर एनआईए की दो कार्यकर्ताओं की ज़मानत रद्द करने की मांग
विशेष एनआईए अदालत में दायर आवेदन में एजेंसी ने दावा किया कि 19 जनवरी को दोनों आरोपी- वरवरा राव और सुधा भारद्वाज मुंबई प्रेस क्लब गए थे और वहां उन्होंने मामले के अपने सह-आरोपियों से बातचीत की, जो उनकी ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन है. कोर्ट ने उनकी ज़मानत शर्तों में अपने सह-आरोपियों से संवाद करने पर रोक लगाई गई थी.
बीते 23 अप्रैल को महाराष्ट्र के यवतमान ज़िले में एल्विन और उनका साथी मोहम्मद नदाफ निसार क़ुरैशी केरल के पलक्कड़ ज़िले के पट्टांबी कस्बे से फल लदा ट्रक लेकर मध्य प्रदेश जा रहे थे, तभी रास्ते में हथियारबंद लोगों के एक समूह ने उनकी गाड़ी को रोककर हमला कर दिया. कुरैशी गंभीर रूप से घायल है और आईसीयू में भर्ती है. इसके बावजूद पुलिस ‘रोड रेज’ का केस दर्ज कर हल्की धाराएं ही लगाई है.
टीसीएस की आठ महिला और एक पुरुष कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई नौ शिकायतों के आधार पर पांच एफआईआर दर्ज की गई है. इसमें यौन उत्पीड़न और हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का आरोप है. हालांकि, इनमें से अधिकांश शिकायतें कई महीनों या सालों पहले की घटनाओं से संबंधित थीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी एफआईआर आधी रात को दर्ज की गई हैं.
आतंकवाद के आरोपी अपने मुवक्किलों द्वारा दोषी याचिकाएं देने के बाद भी उनका पक्ष लेने को लेकर वकीलों के पास अलग-अलग कारण हैं, लेकिन वे सब इस बात पर सहमत हैं कि एनआईए ही इन याचिकाओं को बढ़ावा दे रही है और यहां तक कि उसके लिए दबाव भी बना रही है.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए सांस्कृतिक कलाकार तथा कार्यकर्ता सागर गोरखे और रमेश गायचोर को ज़मानत दे दी. दोनों 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. इस रिहाई के आदेश के बाद अब गिरफ़्तार किए गए 16 लोगों में से केवल मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र गाडलिंग ही जेल में हैं.
लंदन में रहने वाले डॉक्टर और लोकप्रिय यूट्यूबर संग्राम पाटिल, जो भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की तीखी आलोचना के लिए जाने जाते हैं, को अपनी भारत यात्रा के दौरान मानहानि के मुकदमे से लेकर लुकआउट सर्कुलर जारी होने और यहां तक कि हवाई अड्डे पर हिरासत में लिए जाने तक की कार्रवाई का सामना करना पड़ा है.
एनआईए के प्रभावित करने वाले दोषसिद्धि आंकड़ों को लेकर कई आरोपियों, उनके वकीलों और यहां तक कि एजेंसी से जुड़े रहे एक व्यक्ति ने द वायर से बात की और बताया कि क्यों एनआईए के इतने सारे मामले आरोपियों के कबूलनामों के साथ उन्हें दोषी मान लिए जाने के साथ ख़त्म होते हैं.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 100% दोषसिद्धि दर का दावा करने के एक साल बाद द वायर की एक पड़ताल में सामने आया है कि लंबे समय तक हिरासत, ज़मानत न मिलने और जांचकर्ताओं के दबाव के कारण दर्जनों आरोपी, जिनमें ज्यादातर मुस्लिम हैं, अपने मुक़दमे शुरू होने से पहले ही ख़ुद को दोषी मान लेने के लिए मजबूर हो रहे हैं.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने एल्गार परिषद केस में गिरफ़्तार किए गए दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर हेनी बाबू को मुकदमे में देरी के आधार पर ज़मानत दे दी. वह 28 जुलाई 2020 से मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं. एनआईए ने उनके ज़मानत का विरोध करते हुए आदेश पर रोक लगाने की मांग की. अदालत ने अनुरोध को ख़ारिज कर दिया.
दिल्ली के लाल क़िला मेट्रो स्टेशन के पास हुए एक कार धमाके के कुछ ही घंटों बाद मुंबई पुलिस 2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में बरी किए गए लोगों के घर पहुंची थी. हालांकि, पुलिस के पास इसके लिए कोई वैध अदालती दस्तावेज़ या कागज़ नहीं थे.
30 वर्षीय पार्वती संडमेक कथित माओवादी संबंध के मामले में छह साल जेल में बिताने और पांच केसों में बरी होने के बाद 30 अक्टूबर नागपुर केंद्रीय कारागार से रिहा हुई थीं. जैसे ही वह जेल से बाहर निकलीं, पुलिस की एक टीम बिना किसी वॉरंट या नोटिस के उन्हें अपने साथ ले गई.
दक्षिणी दिल्ली के मैदानगढ़ी इलाके में स्थित साउथ एशियन यूनिवर्सिटी की एक स्नातक छात्रा ने आरोप लगाया है कि रविवार को चार लोगों ने विश्वविद्यालय परिसर में उनके साथ सामूहिक बलात्कार करने की कोशिश की. हालांकि, पुलिस ने इस मामले में मंगलवार को एफआईआर दर्ज की है.