सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निष्क्रिय जन धन खातों की संख्या बढ़कर 26% हुई: रिपोर्ट

केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खुले खातों की गतिविधियों में मंदी देखी जा रही है. एक रिपोर्ट बताती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में योजना के तहत खुले निष्क्रिय खातों की संख्या पिछले एक साल में बढ़ी है.

प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खातों में निष्क्रियता बढ़ रही है. (फोटो साभार: विकिपीडिया)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी परियोजना प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत खुले खातों की गतिविधियों में मंदी देखी जा रही है. एक रिपोर्ट में सामने आया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में इस योजना के तहत खुले निष्क्रिय खातों की संख्या पिछले एक साल में बढ़ी है.

बिजनेस स्टैंडर्ड ने एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया है कि ऐसे खातों की कुल संख्या पिछले साल के 21% से बढ़कर सितंबर के अंत तक 26% हो गई है.

अधिकारी के अनुसार, ‘सितंबर 2025 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कुल 55.45 करोड़ पीएमजेडीवाई खातों में से लगभग 14.28 करोड़ खाते निष्क्रिय थे. वहीं, 2025-26 के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नए पीएमजेडीवाई खाते खोलने का लक्ष्य 3.8 करोड़ है, जिनमें से सितंबर तक 1.32 करोड़ खाते खोले जा चुके हैं.’

वरिष्ठ अधिकारी की मानें, तो सरकार के वित्तीय समायोजन की इस महत्वकांक्षी योजना में सक्रिय खातों की संख्या और कम हो सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख बैंक जिसमें बैंक ऑफ इंडिया (32%) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (33%) शामिल हैं, में ऐसे निष्क्रिय खातों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है, जबकि पंजाब एंड सिंध बैंक (8%) में सबसे कम देखी गई.

बैंक ऑफ इंडिया का निष्क्रिय अनुपात सितंबर 2024 में 19% से बढ़कर सितंबर 2025 में 25% हो गया है.

इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में भी निष्क्रिय खातों में बढ़ोतरी देखी गई है. 2024 के सितंबर महीने में जहां इन खातों की संख्या 19 प्रतिशत थी, वहीं ये सितंबर 2025 में बढ़कर 25 प्रतिशत हो गए हैं.

इस संबंध में अखबार द्वारा वित्त मंत्रालय को भेजे गए ईमेल का जवाब खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हुआ है.

उल्लेखनीय है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों के अनुसार, किसी बचत खाते में दो साल से ज़्यादा समय तक कोई लेन-देन न होने पर उसे निष्क्रिय या डॉरमेंट (Dormant) मान लिया जाता है.

इससे पहले अखबार ने इस साल की शुरुआत में यह भी बताया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने एक मुश्त उपाय के तहत इस साल अप्रैल में 15 लाख निष्क्रिय शून्य बैंलेंस वाले जन धन खाते बंद कर दिए थे. यह कदम डुल्पीकेट और गैर सक्रिय खातों को बंद करने के लिए उठाया गया था.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य बैंकिंग/बचत और जमा खातों, धन प्रेषण, ऋण, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं तक किफायती तरीके से पहुंच सुनिश्चित करना था.

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 55.5 मिलियन पीएमजेडीवाई खाते, जिनमें 75,315 मिलियन रुपये की बैलेंस राशि है, निष्क्रिय हैं. जबकि 480 मिलियन रुपे कार्ड (RuPay cards) अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं.