झारखंड: विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई महिला का गर्भपात, आदिवासी समूहों का दुर्व्यवहार का आरोप

पिछले महीने चाईबासा में खनन और अन्य भारी वाहनों के लिए ‘नो-एंट्री’ नियम लागू करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक गर्भवती आदिवासी महिला को हिरासत में लिया गया था. आदिवासी समूहों का आरोप है कि इस हफ्ते की जेल में उनका गर्भपात हो गया. चाईबासा जेल अधीक्षक ने क़ैदियों में किसी भी तरह की गर्भावस्था या गर्भपात की ख़बरों से इनकार किया है.

(इलस्ट्रेशन: परिप्लब चक्रबर्ती/द वायर)

नई दिल्ली: झारखंड के आदिवासी समूहों ने आरोप लगाया है कि पिछले महीने चाईबासा में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई एक आदिवासी महिला का इस हफ्ते की शुरुआत में पश्चिमी सिंहभूम जिले की जेल में गर्भपात हो गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, स्थानीय आंगनवाड़ी रजिस्टर में दर्ज रिकॉर्ड में महिला के गर्भवती होने की पुष्टि हुई है, लेकिन चाईबासा जेल अधीक्षक ने कैदियों में किसी भी तरह की गर्भावस्था या गर्भपात की खबरों से इनकार किया है.

बताया गया है कि तुलसी पुरती नाम की यह महिला 27 अक्टूबर को गांव में खनन और अन्य भारी वाहनों के लिए ‘नो-एंट्री’ नियम लागू करने की मांग को लेकर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई छह महिलाओं में शामिल थीं. आंदोलन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव करने के आरोप में सोलह लोगों – छह महिलाओं और 10 पुरुषों – को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा कि जेल के अंदर पुरती की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों को भ्रूण को निकालना पड़ा. बाद में उन्हें वापस जेल भेज दिया गया.

जब इंडियन एक्सप्रेस ने गांव के आंगनवाड़ी रजिस्टर को देखा, तो उसमें पुरती का नाम पाया गया. आंगनवाड़ी की एक सहायिका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ‘हमने एक डायरी रखी है जिसमें हम गांव की नई गर्भवती महिलाओं का विवरण दर्ज करते हैं. हालांकि मुझे नहीं पता कि उन्हें किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया था, लेकिन वह उस समय गर्भवती थीं.’

आदिवासी समूहों का आरोप पुलिस हिंसा के कारण गर्भपात हुआ

चाईबासा के आदिवासी समूहों ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की हिंसा के कारण गर्भपात हुआ. उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच और ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

अखबार के अनुसार, ज़िला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल, जो विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए और बाद में ज़मानत पर रिहा हुए लोगों में शामिल हैं, ने कहा कि हालांकि विवरण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन मामला गंभीर है और इसकी जांच ज़रूरी है.

उन्होंने कहा, ‘अगर किसी गर्भवती महिला को जेल में रखा गया है और मानसिक तनाव या किसी भी तरह के दुर्व्यवहार के कारण उसका गर्भपात हुआ है, तो इसकी जांच होनी चाहिए. जेल के अंदर मानसिक दबाव भी ऐसी घटना का कारण बन सकता है.’

उन्होंने ज़िला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

वहीं, चाईबासा जेल अधीक्षक सुनील कुमार ने किसी भी महिला कैदी के गर्भवती होने या गर्भपात होने की खबरों से इनकार किया. कुमार ने कहा, ‘जेल प्रोटोकॉल के अनुसार, उस दिन जेल में लाई गई सभी छह महिलाओं की गर्भावस्था जांच की गई थी. सभी की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी.’

उन्होंने कहा, ‘फिलहाल, चाईबासा जेल में कोई गर्भवती महिला नहीं है.’ उन्होंने आगे कहा कि जेल को ऐसी किसी घटना के संबंध में कोई मेडिकल रिपोर्ट या शिकायत नहीं मिली है.

ज़िले के एक अधिकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों द्वारा परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ के आवास को घेरने की कोशिश के बाद हुए विरोध प्रदर्शन के बाद मुफ़स्सिल पुलिस स्टेशन में 74 नामज़द और लगभग 500 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई थी. प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ के आवास को घेरने की कोशिश की थी, जिसके बाद झड़प हुई और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया.