झारखंड: प्रदर्शन के दौरान गिरफ़्तार छात्र को हथकड़ी में कॉलेज लाई पुलिस, कार्रवाई की मांग

पिछले महीने चाईबासा में खनन और अन्य भारी वाहनों के लिए ‘नो-एंट्री’ नियम लागू करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र को पुलिस कथित तौर पर हथकड़ी लगाकर परीक्षा फॉर्म भरने के लिए उनके कॉलेज ले गई. उनके परिवार का आरोप, ऐसा तब हुआ जब एक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को मौखिक रूप से कहा था कि उन्हें कॉलेज ले जाते समय हथकड़ी न लगाई जाए.

(इलस्ट्रेशनः द वायर)

नई दिल्ली: झारखंड के चाईबासा में पिछले महीने एक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र को पुलिस कथित तौर पर हथकड़ी लगाकर परीक्षा फॉर्म भरने के लिए उनके कॉलेज ले गई.

उनके परिवार के अनुसार, ऐसा तब हुआ जब एक मजिस्ट्रेट ने पुलिस को पहले ही मौखिक रूप से कहा था कि छात्र को कॉलेज ले जाते समय हथकड़ी न लगाई जाए.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह छात्र उन कई आदिवासी लोगों में शामिल थे जिन्हें 27 अक्टूबर को चाईबासा के एक ऐसे इलाके के पास खनन और भारी वाहनों के ‘नो-एंट्री’ नियम लागू करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, जिसे स्थानीय लोग दुर्घटना-स्पॉट इलाका बताते हैं.

अखबार ने उनकी बड़ी बहन के हवाले से बताया कि परिवार ने मजिस्ट्रेट से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया था कि कॉलेज ले जाते समय उनके भाई को हथकड़ी न लगाई जाए. उन्होंने कहा, ‘मजिस्ट्रेट ने पुलिस को मौखिक रूप से भी कहा था कि वे उन्हें हथकड़ी न लगाएं और पुलिस उस समय मान भी गई थी. लेकिन फिर भी उन्हें हथकड़ी लगाकर कॉलेज ले गए.’

उन्होंने कहा कि इस घटना का भाई पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘मेरा भाई हिरासत में बीमार है, लेकिन वह अस्पताल जाने से इनकार कर रहा है. वह कहता है कि उसे एक अपराधी जैसा महसूस हो रहा है और लोग, यहां तक कि उसके दोस्त और कॉलेज के साथी भी, उन्हें अलग नज़र से देखेंगे – ठीक वैसे ही जैसे उस दिन उन्हें हथकड़ी में देखकर हुआ था.’

उन्होंने बताया कि गिरफ्तारी से कुछ सप्ताह पहले ही वह 18 वर्ष का हुआ था. कॉलेज परिसर के अंदर से कथित तौर पर ली गई तस्वीरों में हथकड़ी लगे छात्र को वर्दीधारी पुलिसकर्मियों द्वारा ले जाते हुए दिखाया गया है.

उप-विभागीय पुलिस अधिकारी बहमन टुटी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई उचित प्रक्रिया के अनुसार की गई. उन्होंने कहा, ‘प्रक्रिया के अनुसार, जब कोई व्यक्ति न्यायिक हिरासत में होता है और उसे बाहर ले जाना होता है, तो उसे ले जाते समय हथकड़ी लगाई जा सकती है, खासकर अगर उसके भागने की कोई संभावना हो.’

उन्होंने आगे कहा कि जब तक अदालत की ओर से कोई विशिष्ट लिखित आदेश न हो, तब तक एस्कॉर्टिंग पुलिसकर्मी मानक प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए बाध्य हैं.

टुटी ने यह भी कहा कि चूंकि इस मामले में अनुरोध लिखित में नहीं था, इसलिए पुलिस यह जोखिम नहीं उठा सकती थी. उन्होंने कहा कि अगर कोई आरोपी भागने में कामयाब हो जाता है, तो पूरी ज़िम्मेदारी एस्कॉर्टिंग अधिकारियों की होती है, जिससे उनकी नौकरी भी जा सकती है.

उन्होंने कहा, ‘जेल प्रशासन मौखिक निर्देशों पर भी कार्रवाई नहीं कर सकता – उसे लिखित निर्देशों या स्थापित नियमों का पालन करना होगा.’

पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु ने भी कहा कि पुलिस उचित प्रक्रिया का पालन कर रही है. उन्होंने कहा, ‘अगर कुछ भी गैरकानूनी है, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि छात्र के खिलाफ मामला कथित पथराव से जुड़ा है. एसपी ने कहा, ‘हमें स्थिति की गंभीरता का भी आकलन करना होगा. एक 17-18 साल का लड़का पथराव करने और पुलिसकर्मियों को घायल करने में शामिल था.’

हालांकि, छात्र के परिवार ने मांग की है कि ज़िला पुलिस और जेल प्रशासन को छात्र के ‘सार्वजनिक अपमान’ के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाए.

चाईबासा इंजीनियरिंग कॉलेज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर ऐसे मामलों में जहां कोई छात्र न्यायिक हिरासत में होता है, लेकिन उसे परीक्षा या पंजीकरण के लिए उपस्थित होने की अनुमति दी जाती है, कॉलेज को अधिकारियों से लिखित अदालती आदेश या औपचारिक सूचना मिलती है.

अधिकारी ने कहा कि हालांकि, इस बार कॉलेज के अधिकारियों को घटना के दिन तक यह पता नहीं था कि छात्र को लाया जाएगा.

अधिकारी ने कहा, ‘अतीत में हमारे पास ऐसे मामले आए हैं जहां हिरासत में लिए गए छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी. उनके माता-पिता को अदालत की अनुमति लेनी पड़ी थी, और पुलिसकर्मी उनके साथ गए थे. परीक्षा के दौरान उन्हें हॉल के अंदर हथकड़ी नहीं लगाई गई थी, बल्कि वे बाहर से पुलिस की निगरानी में रहे.’

इस मामले में अधिकारी ने दावा किया कि कॉलेज के कर्मचारियों ने साथ गई पुलिस टीम से हिरासत का कारण और प्रक्रिया के दिशानिर्देश बताने वाले दस्तावेज़ साझा करने के लिए कहा, ‘लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया.’

अधिकारी ने कहा, ‘एक व्यक्ति के तौर पर मेरा निजी तौर पर मानना ​​है कि उन्हें हथकड़ी लगाकर नहीं लाया जाना चाहिए था. लेकिन एक कॉलेज होने के नाते हम अदालत के आदेश के बिना पुलिस पर ऐसे निर्देश नहीं थोप सकते.’

ज्ञात हो कि इस विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार की गई एक आदिवासी महिला का जेल में गर्भपात होने का आरोप लगाया गया है. महिला के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस की मारपीट और मानसिक प्रताड़ना की वजह से गर्भपात हुआ है. जांच की मांग की है.